27 Jul चिरौंजी प्रसंस्करण की विधियाँ एवं इ.गाँ.कृ.वि. द्वारा निर्मित चिरौंजी गुठली छिलाई मशीन का परिक्षण
Processing of Chironji Seeds (charoli seeds ) and evaluation of Chironji Decortication Machine developed by IGKV चिरौंजी (Buchnania lanzan) का पेड एनाकार्डिशी कुल के अंतर्गत आता है| इसे चारोली के नाम से भी जाना जाता है| इसका उपयोग भारतीय पकवानों में किया जाता है तथा यह प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, खनिज, फाईबर, विटामिन और सुक्ष्म पोषक तत्वों की समृध स्रोत है| चारोली का वृक्ष अधिकतर सूखे पर्वतीय प्रदेशों में पाया जाता है| दक्षिण भारत, उड़ीसा, हिमाचल प्रदेश आदि स्थानों पर यह वृक्ष विशेष रूप से पाए जाते है| छत्तीसगढ़ में बस्तर से लेकर कांकेर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर, बीजापुर, सुकमा, महासमुंद, सरगुजा आदि क्षेत्रो के वनों में चिरौंजी के पेड़ प्राकृतिक रूप से विद्यमान है| बस्तर संभाग के जंगल चिरौंजी का सबसे बड़ा क्षेत्र है| बस्तर वनक्षेत्र के आदिवासी चिरौंजी के महत्व व मूल्य से अनजान है वे चिरौंजी के फल को खाकर इसके कीमती गुठली को यूं ही फेंक देते है या नगरों कस्बों के चतुर व्यापारियो के हाथों औंने पौंने दामो में गुठली बेंच देते है| राज्य सरकार इस वनक्षेत्र में प्राकृतिक रूप से सदियों से लगे पेड़ो द्वारा प्राप्त हो रहे चिरौंजी के गुठलियों के संग्रहण एवम विपणन पर ध्यान देकर वनक्षेत्र में बसे आदिवासियों को उचित कीमत दिला सकती है| उचित प्रसंस्करण की विधि ज्ञात ना होने के कारण आज भी क्षेत्र के आदिवासी चिरौंजी गुठली का प्रसंस्करण...