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मिट्टी में पोषक तत्वों की उपलब्धता में वृद्धि के लिए फसल अवशेषाेें का रखरखाव Crop residues have multiple uses on agricultural and allied sectors. Rice-wheat is the founder cropping system of Indo-Gangetic Plains (IGP) of South Asia which support food and energy source of a millions. Burning and/or removal of crop residue are not economical rather than endanger to ecosystem functions. A multiple problems are faced by crop growers on managing residues at time of harvesting to proceed for next crop. However, by adopting some useful interventions, a sizeable quantity of primary plant nutrients can be supplemented in soil without sacrificing the economic return of targeted crop. Crop residues are organic vegetative crop materials offer sustainable and ecologically sound alternatives for meeting the nutrient requirements of crops. These resources are facing increasingly competing uses, including soil and water conservation, livestock feed, industrial uses (e.g. papermaking fiber) and most recently, as feed stocks for cellulosic ethanol production (Blanco-Canqui et al., 2009).  Rice-wheat is a major crop rotation in the Indo Gangetic Plains (IGP) of South Asia, spread over 13.5 million ha in Bangladesh, India, Nepal and Pakistan (Ladha et al., 2000). Burning of rice residues is cost-effective and the predominant method of disposal in areas under combined harvesting in the IGP (Samra et al., 2003). However,...

How to make quality compost from garbage?  भारतीय कृषि क्षेत्र में पिछले चार दषकों से फसल उत्पादन में जो वृध्दि आई है, इसका मुख्य कारण उन्नत तकनीकों को अपनाया जाना और अधिक मात्रा में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाषकों का प्रयोग है। अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए इन कृत्रिम पदार्थों का भारी मात्रा में प्रयोग किया जा रहा है। मिट्टी की स्थिति की अनदेखी की जा रही है। इसके कई दुष्परिणाम हमारे समक्ष धीरे-धीरे प्रकट हो रहे हैं। मिट्टी के प्राकृतिक गुण्ा धीरे-धीरे समाप्त होते जा रहे हैं। इसके अलावा प्राकृतिक गुण के अभाव में उत्पादन लागत में वृध्दि हो रही है। मिट्टी में जीवांष या कार्बनिक पदार्थों की कमी के कारण गर्मियों में भूमि के ऊपरी भाग का तापमान 60 डिग्री सेल्सियस से ऊपर हो जाता है। मिट्टी की नमी ज्यादा देर तक नहीं रहती है। इससे खेतों में दरारें पड़ने लगती हैं। निम्न जल धारण क्षमता के कारण सिंचाई जल की आवष्यकता बहुत अधिक बढ़ जाती है और संसाधनों का दुरूपयोग होता है। कृषकों को यह बात जानना अति आवष्यक है कि मिट्टी एक भौतिक माध्यम ही नहीं, अपितु जीवित माध्यम भी है, जिसमें असंख्य लाभकारी सूक्ष्म जीव निवास करते हैं, जो विभिन्न तरीकों से पौधों का पोषण करते हैं। अत: मिट्टी में इनकी संख्या सुनिष्चित करना अति...

No more burning of crop residue use it to increase soil fertility हमारे देश में फ़सलों के अवशेषों (Crop Residue) का उचित प्रबन्ध करने पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है या कहें कि इसका उपयोग मृदा में जीवांश पदार्थ अथवा नत्रजन की मात्रा बढाने के लिये नही किया जाकर इनका अधिकतर भाग या तो दूसरे घरेलू उपयोग में किया जाता है या फ़िर इन्हें नष्ट कर दिया जाता है जैसे कि गेहूं, गन्ने की हरी पत्तियां, आलू, मूली, की पत्तियां पशुओं को खिलाने में उपयोग की जाती है या फ़िर फ़ेंक दी जाती हैं। कपास, सनई, अरहर आदि के तने गन्ने की सूखी पत्तियां, धान का पुआल आदि सभी अधिकतर जलाने के काम में उपयोग कर लिये जाते हैं। पिछले कुछ वर्षों में एक समस्या मुख्य रूप से देखी जा रही है कि जहां हार्वेस्टर के द्वारा फ़सलों की कटाई की जाती है उन क्षेत्रों में खेतों में फ़सल के तने के अधिकतर भाग खेत में खडे रह जाते हैं तथा वहां के किसान खेत में फ़सल के अवशेषों को आग लगाकर जला देते हैं। अधिकतर रबी सीजन में गेहूं की कटाई के पश्चात विशेष रुप से देखने को मिलता है कि किसान अपनी फ़सल काटने के पश्चात फ़सलों के अवशेष (Crop Residue) को उपयोग न करके उसको जला कर नष्ट कर देते...