30 Sep फसल विविधीकरण꞉ संसाधन संरक्षण एिं कृ वि स्थिरता
फसल विविधीकरण कृषि को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाने की महत्वपूर्ण रणनीति है। जानिए इसके लाभ, उपाय, रणनीतियाँ और विभिन्न फसल प्रणालियों की भूमिका।...
फसल विविधीकरण कृषि को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाने की महत्वपूर्ण रणनीति है। जानिए इसके लाभ, उपाय, रणनीतियाँ और विभिन्न फसल प्रणालियों की भूमिका।...
भूमिका मृदा स्वास्थ्य कृषि उत्पादन की आधारशिला है। स्वस्थ मिट्टी ही लंबे समय तक टिकाऊ उत्पादन, बेहतर गुणवत्ता और कम लागत वाली खेती सुनिश्चित करती है। आज की कृषि व्यवस्था में केवल अधिक उत्पादन के लक्ष्य के कारण नाइट्रोजन (यूरिया) का अत्यधिक उपयोग हो रहा है, जिससे मिट्टी में पोषक असंतुलन, सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी और जैविक सक्रियता में गिरावट देखी जा रही है। भारत सरकार किसानों को सस्ती दरों पर खाद उपलब्ध कराने के लिए भारी उर्वरक सब्सिडी (Fertilizer Subsidy) प्रदान करती है। हालांकि, उर्वरकों के असंतुलित और अत्यधिक उपयोग के कारण यह सब्सिडी अब सरकार के खजाने पर एक बड़ा बोझ बनती जा रही है। संतुलित पोषक प्रबंधन का उद्देश्य...
प्राकृतिक संसाधनों के सिमित उपयोग से फसल नियोजन Crop planning is a type of technique under which, what, when, where, which crops are to be grown and their related location, sunlight, water, maturity, planting season and tolerance etc. requirements have to be decided. In this, the study of the crops grown in different categories through the cropping pattern and after that crops are grown in cycles at continuous intervals to maintain the system through crop rotation. प्राकृतिक संसाधनों के सिमित उपयोग से फसल नियोजन भारतीय कृषि भिन्न प्रकार के प्राकृतिक संसाधनों जैसे की भूमि, पानी, मिट्टी के पोषक तत्वों और जलवायु कारकों पर बहुत अधिक निर्भर करती है। प्राकृतिक संसाधनों की निरंतर कमी...
Harmful effects of current agricultural systems हरित क्रांति ने भारतवर्ष में खाद्यान्न के उत्पादन एवं आपूर्ति तथा खाद्यान्न सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। परिणामस्वरूप पारम्परिक कृषि पद्धतियां का स्थान कृषि की आधुनिक तकनीकों जैसे कि रासायनिक खादों, कृषि रसायनों (कीटनाशी) तथा फार्म मशीनरी ने ले लिया है तथा इस प्रकार का क्रांतिकारी परिवर्तन सिर्फ भारतीय परिदृश्य में ही नहीं अपितु समस्त विश्व की कृषि में देखा जा सकता है। बहुआयामी विकास एवं आधुनिकीकरण के पश्चात भी वर्तमान कृषि विभिन्न प्रकार की चुनौतियों का सामना कर रही है। वाह्य कृषि निवेशों के अत्यधिक प्रयोग से मृदा, जल एव अनुवांशकीय स्रोतों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है तथा मृदा अपरदन, मृदा में पोषक...
How to improve soil fertility and crop productivity कृषि उत्पादन मौसम और जलवायु स्थिति पर अत्यधिक निर्भर है। मौसम के तत्वों को प्रबंधित या बदलना असंभव है, लेकिन मृदा गुणों को फसल उत्पादन बढ़ाने के लिए आवश्यकतानुसार प्रबंधित किया जा सकता है। यह लेख मिट्टी के गुणों के प्रबंधन के माध्यम से मिट्टी की उर्वरता को सुधारने और बनाए रखने के लिए काम करेगा। मिट्टी की उर्वरता पौधे को उपलब्ध पोषक तत्व को इंगित करती है। यह मिट्टी के सूक्ष्मजीवों की गतिविधि को नियंत्रित करता है जो मिट्टी में पोषक तत्वों के परिवर्तन में महत्वपूर्ण हैं। मिट्टी की उर्वरता किसी विशेष फसल की उपज का संकेत देती है। मिट्टी की उर्वरता का अर्थ...
शुष्क क्षेत्रों में मिट्टी से पैदा होने वाले पौध रोग जनकों का पर्यावरण हितैषी प्रबंधन Crops of Indian arid region suffer heavily every year due to biotic stresses caused by soil born plant pathogens. These pathogens remain viable in soil as a dormant propagules and control of these pathogens by chemical means is not economical and also not advisable due to environment concerns. Management of these pathogens through eco-friendly approaches have been discussed here that provides long term benefit to the farmers for sustainable development of arid crops. Soil borne plant pathogens like Fusarium spp., Macrophomina phaseolina etc. causes severe yield losses in major arid land crops like Cumin, Pearl millet Clusterbean,...
Watermelon and Muskrmelon cultivation for more income in less time तरबूज (वैज्ञानिक नाम - सिटीलुस लैनाटस ) और खरबूजा (वैज्ञानिक नाम - कुकुमिस मेलो ), जायद मौसम की प्रमुख फसल हैं। इसकी खेती मैदानों से लेकर नदियों के पेटे में सफलतापूर्वक की जा सकती हैं। ये कम समय, कम खाद और कम पानी में उगाई जा सकने वाली फसलें हैं। उगने में सरल, बाजार तक ले जाने में आसानी और अच्छे बाजार भाव से इसकी लोकप्रियता बढती जा रही हैं इसके कच्चे फलो का उपयोग सब्जी के रूप में किया जाता हैं। इनके पके हुऐ फल अत्यंंत लोकप्रिय, मीठे, शीतल, मृदुल विरेचक एवं प्यास को शांत करने वाले होते हैं। तरबूज एक महत्वपूर्ण ककड़ी सब्जी...
मिट्टी की उर्वरता का संरक्षण और जैविक पदार्थों की भूमिका Maintenance of soil fertility is a great problem to our farmers. Cultivation of particular crop year after year in the same field decreases the soil fertility. To increase the soil fertility, it is necessary to check the loss of nutrient and to increase the nutrient content of soil. The following things must be properly followed for increasing the fertility of soil. Proper use of land improve soil fertility Good yield of crop is not possible if we cultivate any crop in any land. So it is necessary to select the crop which is suitable for a particular land. Practical experience will be helpful...