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Reaper binder: suitable machine for wheat harvesting रबी की सबसे महत्‍वपूर्ण फसलों में से गेंहॅू  एक है । वर्ष 2016-17 में देश में कुल 31 मिलियन हेक्‍टेयर क्षेत्रफल में गेंहॅू बोया गया तथा 98 मिलियन टन गेंहॅू का उत्‍पादन हुआ और गेंहॅू की औसत उपज 3161 कुन्‍तल/हेक्‍टेयर रही । गेंहॅू  की फसल तैयार होते-होते मौसम बदल जाता है और तेज हवाओं एवं बारिश की शंका बनी रहती है । ऐसे में किसान की चिंता होती है कि पकी फसल को काटकर जल्‍द से जल्‍द घर में लाया जाए । गेंहॅू को काटकर काटते समय ही मढ़ाई करके लाने के लिए कम्‍बाइंड हारबेस्‍टर का उपयोग बढ़ता जा रहा है । इस समय कम्‍बाइंड हारबेस्‍टर का प्रयोग रबी फसल की कटाई में खूब हो रहा है । थ्रेसिंग से निकले भूसे को खेत में छोड़ देती है । जिसकी मात्रा करीब 4 से 5 टन / हेक्‍टेयर होती है । साथ ही कम्‍बाइंड हारबेस्‍टर करीब 30 सेमी ऊपर से फसल को काटता है और कटाई के बाद फसल का ठॅूठ खेत में खड़ा रह जाता है । इससे बड़ा नुकसान होता हैं । एक तो फसल से मिलने वाले अवशेष अर्थात भूसे का नुकसान होता है जो जानवरों के खाने में प्रयोग होता है जो कि‍मती भी है और जिसकी बहुत कमी रहती है और दुसरा, ...

ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए एक उपकरण- दीर्घकालिक डेयरी खेती Women form the backbone of agriculture, comprising the majority of agricultural labourers in India. Women play a significant and crucial role in agriculture and animal husbandry development. Female agricultural labourers are still among the poorest sections of Indian society.  Dairy a source of income and employment of rural women The dairying has been considered as a potential means of alleviating large scale unemployment, especially in rural areas. Women play a key role in animal, farm and home management. Successful dairy husbandry enterprise not only improves the socio-economic status of rural women, but also assures a sustained and assured means of income to supplement their income from the main enterprise. The major activities involved in dairy farming include collection of fodder/cultivation of fodder, grazing the animals, feeding & watering, cleaning the animals and shed, milking and marketing of milk. T he operations are flexible and staggered depending upon the convenience of the family members and need not necessarily be attended foregoing wage employment opportunities.  Why dairy farming is preferred This activity does not require heavy capital investment as the farmers can start with the available non-descript cows or purchase cows easily in local markets.  The local cows are hardy and can be maintained even by landless by procuring crop residues.  Dairy...

Save oil and energy in farming खेती में खनिज तेल की बहुत ज्यादा खपत है. तेल के दाम दिन प्रतिदिन बढते ही जा रहे है अतः यह आवश्यक हो गया है की इनका उपयोग किफ़ायत के साथ किया जाए. किसान भाइयो को ट्रेक्टर और इंजनों में डीजल की खपत कम करने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए. ये बातें निम्न हैं: प्रत्येक ट्रेक्टर और इंजन का निर्माता नए मशीन के साथ निर्देश पुस्तिका देता है. मशीनों के उपयोग करने से पहले उसकी निर्देश पुस्तिका को ध्यान से पढ़ें और उसमे लिखी सलाह के अनुसार ही मशीन का प्रयोग करें. इंजन  चालू  करने  पर यदि टैपित का शोर  सुने पड़ता है तो इसका मतलब है इंजन में  हवा कम जा रही है जिसके कारण डीजल की खपत बढ़ जाएगी .इसलिए टैपित से आवाज़ आने पर उसे फिर से बंधवाना चाहिए. इंजन से काला धुआं निकलने का मतलब है ज्यादा डीजल खर्च हो रहा है. इंजेक्टर या इन्जेक्सन पम्प की कोई खराबी इसका कारण हो सकती है. अतः ट्रैक्टरों में ६०० घंटे प्रयोग के बाद इंजेक्टर की जाँच करवा कर उसे फिर से बन्धवाएँ. इंजन से काम लेना शुरू करने पर  कुछ काला धुआं निकलता है पर यह जल्दी ही स्वयं साफ हो जाता है. यदि इंजेक्टर और इन्जेक्सन पम्प ठीक होने पर भी काला...

Increase the age of farming machines by taking proper care.  अक्सर देखा जाता है की मशीनों का उपयोग करने के बाद इसे जैसे तैसे छोड़ दिया जाता है. खेती  में प्रयुक्त होने वाले मशीनों को ज्यादा देखभाल की जरुरत होती है क्योंकि इनका संपर्क हमेशा मिटटी एवं पानी से होता रहता है. चूँकि इनमे अधिकतर पुर्जे घूमने वाले होते है अतः इनका थोड़े थोड़े दिनों में साफ सफाई करते रहना चाहिए. बहुत सारे किसान भाई मशीनों को किराए पर चलते है. अतः थोडा अच्छे से इस्तेमाल एवं धयान देने पर इन मशीनों की उम्र बढ़ सकती है . निचे कुछ मशिनो के इस्तेमाल एवं रख रखाव से सम्बंधित जानकारी दी जा रही है जिसका थोडा सा भी अनुसरण करने से किसान भाइयों क फायदा हो सकता है. मशीन का नाम रख रखाव सावधानियाँ कल्टीवेटर           आमतौर से सभी नट तथा बोल्टों की जांच करते रहना चाहिए जिससे वे हमेशा टाइट फिट रहें। सबसे बढि़या तरीका यह है कि प्रतिदिन कार्य प्रारम्भ करने से पहले इनकी जांच कर लें। फालों को घिस जाने पर पलट देना चाहिए या फिर नये फाल लगाने चाहिए। प्रतिदिनि कार्य समाप्त करने के पश्चात तथा यन्त्र के उचित भण्डारण हेतु यन्त्र की पालिश की गयी सतहों पर ग्रीस लगाना चाहिए, जिससे कि यंत्र में जंग न लगने पाये। आपरेटर को मशीन के विवरण के बारे में...

Suggestion for Selecting Dairy Plant यदि नये स्थान पर किसी डेरी प्लांट को स्थापित करना हो तो संयंत्रों का चुनाव तथा उनको स्थापित करने के लिए भवन निर्माण संबंधी आवश्यकताओं की जानकारी होना आवश्यक है। अधिकांश रूप से संयंत्रों का माप और उन्हें स्थापित करने के लिए आवश्यक सूचनाएँ निर्माताओं से ही मिल पाती हैं। इसके साथ ही किस प्रकार का फर्श हो और कितने रोशनदान होने चाहिए आदि जैसी सूचनाएँ भी बड़ी आसानी से प्राप्त हो जाती हैं। फिर भी किस कम्पनी से सयन्त्र मंगाए जायें और उनकी कितनी क्षमता होनी चाहिए, इन बातों का निर्णय तो डेरी इंजीनियर तथा विभागीय विशेषज्ञ ही ले सकते हैं। मोटे रूप से निम्नांकित विचारों को ध्यान में रखकर डेरी संयन्त्रों का चुनाव करना उचित होगा: 1- संसाधन क्षमता - इसका निर्णय तभी हो सकता है जब यह मालूम हो कि वर्तमान समय तथा भविष्य में कितना दूध एकत्रित हो सकेगा। अच्छा तो यह होगा कि संयन्त्र की क्षमता इतनी रहे जो कि कम से कम 5 वर्ष तक आवश्यकता पूरी कर सके। उसके पश्चात यदि अधिक मात्रा में दूध प्राप्त होने लगे तो फिर एक और नया संयंत्र उसी माप पर स्थापित कर दिया जाए। शुरू में ही बहुत बड़ी क्षमता वाले संयन्त्रों के प्रयोग में अधिक व्यय होगा तथा ऊर्जा व्यर्थ जाना स्वाभाविक है। 2-...