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Disease of goat Tag

Important Disease occurring in Goat and its control रोगग्रस्त बकरियों की पहचान के लिए उनका ध्यान से अवलोकन करना चाहिए। बीमार बकरी केे हाव-भाव, चाल तथा बर्ताव में बदलाव आता है वह दूसरों से अलग हटकर खड़ी, बैठी या सोती मिलती है । बकरी का खाना कम कर देना या छोड़ देना, जुगाली न करना। थूथन पर पसीना नही रहना और सूख जाना भी बीमारी के संकेत है।  इसके अलावा शरीर के तापमान सामान्य (102.5 डिग्री फारेनहाइट या1 डिग्री सेन्टीग्रेट) से ज्यादा या कम होना। नाड़ी तथा सास के गति में बदलाव आना। तथा पैखाना और पेशाब के रूप रंग में बदलाव आना। इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई देने पर उसे अलग रखे तथा उसका इलाज कराये। सर्वप्रथम इसके बुखार की जाच करें और अन्य लक्षणों को नोट करें। अलग-अलग बीमारियों में अलग-अलग लक्षण होते है। जीवाणु जनित रोग आंत्रा विषाक्तता (इन्टेरोटोक्सीमिया) बकरियों में यह रोग क्लास्ट्रीडियम परप्रिफजेन्स जीवाणु टाईप डी द्वारा आंतों में उत्पन्न किये गये जहर (टाक्सिन) के आंतों द्वारा अवशोषण से होता है। यह जीवाणु सामान्यतः आंत में रहता है पशु द्वारा आवश्यकता से अधिक दाना या चारा खा लेने या खान-पान में अचानक से परिवर्तन होने से यह जीवाणु की वृद्वि दर अचानक बढ़ जाती है, जिसके फलस्वरूप टाक्सिन का अत्याध्कि उत्पादन होता है। इस बीमारी का मुख्य लक्षण अचानक से पेट में तीव्र...