06 Nov कद्दुवर्गीय सब्जियों के 7 प्रमुख रोगों के लक्षण व उनका निवारण
Diagnosis and control of 7 major diseases of Cucurbit crops कद्दूवर्गीय सब्जियों की उपलब्धता साल में लगभग 8-10 महीने रहती है। इनका उपयोग सलाद (खीरा, ककड़ी); पकाकर सब्जी के रूप में (लौकी, तोरई, करेला, काशीफल, परवल, छप्पन कद्दू); मीठे फल के रूप में (तरबूज, खरबूजा); मिठाई बनाने में (पेठा, परवल, लौकी) तथा अचार बनाने में (करेला) प्रयोग किया जाता है। इन सब्जियों में कई प्रकार के रोग लगते हैं जिससे इनकी उपज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इन फसलों में लगने वाले रोगों के लक्षण तथा उनके नियंत्रण के उपायों का उल्लेख निम्नप्रकार है- अ. फफूंद द्वारा होने वाले मुख्य रोग 1. मृदुरोमिल आसिता: इस रोग के लक्षण पत्ती की ऊपरी सतह पर हल्के पीले कोणीय धब्बे दिखाई देते हैं। बाद में पत्ती की निचली सतह पर मृदुरोमिल फफूंद बैंगनी रंग की दिखाई देती है । फल आकार में छोटे हो जाते हैं । रोगी पौधों के पीले धब्बे शीघ्र ही लाल भूरे रंग के हो जाते हैं। रोग का निदान : फसल के पकने के बाद फसल के अवशेषों को जला देना चाहिए। खड़ी फसल पर मैन्कोजेब का 0.2% की दर से छिड़काव करने से इस बीमारी को कम कर सकते हैं। रोग रोधी प्रजातियां उगानी चाहिए । 2. चुर्णिल आसिता : रोग ग्रसित पौधों की पत्तियों की ऊपरी सतह पर सफेद या धुंधले धूसर, गोल व चूर्ण रूप...