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अज़ोला: पशुधन के लिए एक वैकल्पिक और स्थायी चारा एजोला पानी की सतह पर एक नि: शुल्क चल, तेजी से बढ़ती जलीय फ़र्न है। अज़ोला की खेती किसान को पशुधन आहार पूरक की लागत को कम करने में मदद करती है और यह पशुधन, मुर्गी पालन और मछली के लिए पूरक आहार खिलाने के लिए उपयोगी है। यह एक छोटे, सपाट, सघन हरे द्रव्यमान की तरह तैरता है। आदर्श परिस्थितियों में, एजोला संयंत्र तेजी से बढ़ता है, हर तीन दिन में इसका बायोमास दोगुना हो जाता है। भारत में एजोला की सामान्य प्रजाति अज़ोला पिन्नता है। यह ल्यूसर्न और संकर नैपियर की तुलना में उत्कृष्ट गुणवत्ता के प्रोटीन का 4 से 5 गुना से अधिक उत्पादन करता है। इसके अलावा, संकर नेपियर और ल्यूसर्न की तुलना में, बायोमास उत्पादन लगभग 4 से 10 गुना है। दूध का सबसे बड़ा उत्पादक होने के बावजूद, भारत में डेयरी पशुओं के लिए चारा और चारे की भारी कमी है। सूखे चारे, हरे चारे और सांद्रता की कमी क्रमशः 12 से 14 प्रतिशत, 25 से 30 प्रतिशत और 30 से 35 प्रतिशत होने का अनुमान लगाया गया है। चारे की कमी की पूर्ति बने बनायेे वाणिज्यिक आहार के उपयोग से होती है, जिसके परिणामस्वरूप दूध उत्पादन की लागत बढ़ जाती है। हरे चारे के विकल्प की तलाश और...

अजौला: दुधारु पशुओ के लिए एक पौष्टिक आहार  भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि‍ व्यवसाय के सहायक उद्यम के रूप में पशुपालन की महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रायः मानसून के अलावा पशुओं को फसल अवशेषों, सूखे चारें आदि खिलाया जाते है। पौष्टिक चारें के अभाव में पशुओं के विकास, उत्पादन तथा प्रजनन क्षमता में कमी आती है जिससे पशुपालक की आय पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इस समस्या से उभरने के लिए पशुपालको द्वारा अजौला उगाकर पशुओं को पौष्टिक चारा खिलाया जा सकता है। क्या है अजौला : अजौला एक जलीय फर्न है जो छोटे-छोटे समूह के रूप में सघन हरित गुच्छे की तरह जल की सतह पर मुक्त रूप से तैरती रहती हैं। भारत में इसकी प्रजाति अजौला पिन्नाटा मुख्य रूप से पायी जाती है, जो काफी हद तक अधिक तापमान को सहन कर लेती है। अजौला के गुण : यह तीव्र गति से बढवार करती है, सामान्य अवस्था में यह फर्न तीन दिन में दोगुनी हो जाती हैं। इसमें उत्तम गुणवत्ता युक्त तत्व होनें के कारण आसानी से पच जाती है। इसकी उत्पादन लागत काफी कम होती है तथा औसतन 15 किग्रा प्रति वर्गमीटर की दर से प्रति सप्ताह उपज देती है। यह पशुओं के लिए प्रतिजैविक का कार्य करती है क्योंकि इसमें प्रोटीन, आवश्यक अमीनों अम्ल, विटामिन ए व बी, कैल्सियम, फास्फोरस, पोटेशयम, आयरन, कॉपर तथा...

Azolla: An awesome and amazing Plant अजोला  तेजी से बढ़ने वाली एक प्रकार की जलीय फर्न है, जो  पानी की सतह पर तैरती रहती है। धान की फसल में नील हरित काई की तरह अजोला को भी हरी खाद के रूप में उगाया जाता है और कई बार यह खेत में प्राकर्तिक रूप से भी उग जाता है। इस हरी खाद से भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ती है और उत्पादन में भी आशातीत बढ़ोत्तरी होती है।   एजोला की सतह पर नील हरित शैवाल सहजैविक के  रूप में विध्यमान होता है। इस नील हरित शैवाल को  एनाबिना एजोली के  नाम से जाना जाता है जो  कि वातावरण से नत्रजन के  स्थायीकरण के  लिए उत्तरदायी रहता है। एजोला शैवाल की वृद्धि के  लिए आवश्यक कार्बन स्त्रोत  एवं वातावरण प्रदाय करता है । इस प्रकार यह अद्वितीय पारस्परिक सहजैविक संबंध अजोला को  एक अदभुद पौधे के  रूप में विकसित करता है, जिसमें कि उच्च मात्रा में प्रोटीन उपलब्ध होता है।  प्राकृतिक रूप से यह उष्ण व गर्म उष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में पाया जाता है। देखने में यह शैवाल से मिलती जुलती है और  आमतौर पर उथले पानी में अथवा धान के  खेत में पाई जाती है। पशुओं को अजोला चारा खिलाने के लाभ अजोला सस्ता, सुपाच्य एवं पौष्टिक पूरक पशु आहार है। इसे खिलाने से वसा व वसा...