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3 Major Diseases of Cumin and their management विभिन्न बीजीय मसाला फसलों में जीरा अल्पसमय में पकने वाली प्रमुख नकदी फसल हैं। जीरे के दानों में पाये जाने वाले वाष्पषील तेल के कारण ही इनमें जायकेदार सुगध होती है। इसी सुगन्ध के कारण जीरे का मसालों के रूप में उपयोग किया जाता है। जीरे में यह विषिष्ट सुगंध क्यूमिनॉल या क्यूमिन एल्डीहाइड के कारण होती है। इसका उपयोग मसाले के अलावा औषधि के रूप में भी होता हैं, जीरे में मुत्रवर्धक, वायुनाषक, व अग्निदीपक गुण पाये जाते हैं। इन गुणों के कारण कई देषों में आयुर्वेदिक दवाओं में जीरे का उपयोग बढ़ता जा रहा है। भारत में जीरे की ख्ैंती अधिक नमी वाले क्षेत्रों को छोड़कर देष के सभी राज्यों में की जाती है। जीरे के कुल क्षेत्र व उत्पादन का लगभग 90 प्रतिषत भाग राजस्थान व गुजरात के अन्तर्गत आता है। देष के कुल उत्पादन का 48 प्रतिषत जीरा राजस्थान में होता है। राजस्थान के जालौर, बाड़मेर, पाली, अजमेर, जौधपुर, नागौर, टोंक व जयपुर जीरा उत्पादन करने वाले मुख्य जिले है। जीरे के रोग एवं रोकथाम :- 1. छाछया या चूर्णिल आसिता :- यह रोग एरीसीफी पोलीगोनी नामक कवक से होता हैं। इस रोग की प्रारम्भिक अवस्था में पौधों की पत्तियों व टहनियों पर सफेद चूर्ण नजर आता हैं। धीरे- धीरे सफेद चूर्ण पूरे...

Advanced Production Techniques of Fenugreek सामान्य मेथी का वानस्पतिक नाम ट्राइगोनेला फोइनमग्रेसियम एवं एक और वर्ग कस्तूरी मेथी का है जिसका वानस्पतिक नाम ट्राइगोनेला कार्निकुलाटा है। मेथी की खेती मुख्यतः हरी सब्जियों, दानो (मसालों) एवं कुछ स्थानो पर चारो के लिये किया जाता है।  मेथी के सूखे दानो का उपयोग मसाले के रूप मे, सब्जियो के छौकने व बघारने, अचारो मे एवं दवाइयो के निर्माण मे किया जाता है। इसकी भाजी अत्यंत गुणकारी है जिसकी तुलना काड लीवर आयल से की जाती है। इसके बीज में डायोस्जेनिंग नामक स्टेरायड के कारण फार्मास्यूटिकल उधोग में इसकी मांग रहती है। इसका उपयोग विभिन्न आयुर्वेदिक दवाओं को बनाने में किया जाता है। इस लेख मे सामान्य मेथी की उन्नत उत्पादन तकनीक का वर्णन किया जा रहा है। मेथी के लिए जलवायु : मेथी शरदकालीन फसल है तथा इसकी खेती रबी के मौसम में की जाती है। इसकी वानस्पतिक वृद्धि के लिए लम्बे ठंडे मौसम, आर्द्र जलवायु तथा कम तापमान उपयुक्त रहता है। फूल बनते समय या दाने बनते समय वायु में अधिक नमी और बादल छाये रहने पर बीमारी तथा कीड़ों का प्रकोप बढ़ जाता है। फसल पकने के समय ठण्डा एवं शुष्क मौसम उपज के लिये लाभप्रद होता है। मेथी अन्य फसलो की तुलना मे अधिक पाला सहनशील होता है। मेथी के लिए भूमि एवं भूमि की तैयारी : दोमट या बलुर्इ दोमट...

अदरक की फसल केे प्रमुख रोग राईजोम रोट का प्रबंधन कैसे करें।  Ginger is one of the most promising spice crop grown in North Eastern States particularly in the state of Arunachal Pradesh, Meghalaya, Mizoram, Nagaland etc. It is estimated that 50% of the national production ginger comes from the North Eastern States. India one of the leading producer and exporter of ginger in the world. India’s production of ginger constitutes about 50% of the total world’s production of ginger. Rhizome or soft rot is one of the most devastating diseases of ginger causing heavy yield loss, wherever this crop is grown. Due to this disease more than 50% yield loss has been reported. This disease is mainly caused by the species of Pythium but associated with this disease are the fungus Fusarium spp. and the root knot nematode Meloidogyne sp. occasionally, the fungi Rhizoctonia solani, along with the bacterium Pseudomonas sp. have been isolated from diseased rhizomes.                                                        Symptoms Initial symptom of the disease appear as light yellowing of the tips of lower leaves which gradually spreads down to the leaf blade and leaf sheath along the margin. In the early stages, the middle portion of the lamina remains green while the margins become yellow. The yellowing spreads to all the leaves of plant...