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चौडा धनिया: उष्णकटिबंधीय द्वीपों की एक सफल फसल Broad dhaniya (Eryngium foetidum  L. / Umbelliferae-Apiaceae) is a shade loving aromatic and medicinal plant also grown as a leafy vegetable in tropical regions.  Broad dhaniya plant               Broad dhaniya in flowering It is native to Central and Latin America. It is also known as Mexican coriander, cilantro, spiny coriander, fit weed, burma dhaniya, Vilayati dhaniya. CARI, Port Blair has developed its first variety through mass selection using local collections from Andaman & Nicobar Islands and named as ‘CARI Broad Dhaniya’. It has broad, long, serrated leaves with uniform growth and flowering pattern. It is rich in carotenoids, pohyphenols, chlorophyll and ascorbic acid and dietary nutrients like calcium, iron, sodium, copper and potassium. It’s cultivated in shade condition can be a profitable business in humid tropical and warmer regions even where heavy rains are common. Although, it common in Andaman and Nicobar Islands, Eastern and North-eastern parts of Indian at present, but its potential need to be explored in other parts of mainland India. It has unique taste, better post harvest life, demand among the traditional consumers settled in different parts of country, fit very well as intercrop in fruit orchards and grow very well in rainy season in shadenet.   Broad dhaniya in shadenet house...

How to grow Okra in scientific method  भिण्डी एक महत्वपूर्ण फल वाली उष्ण भागों और शीतोष्ण प्रदेश्‍ो के गर्म स्‍थानों पर उगाया जाने वाली सब्जि है। इसकी फसल उन स्‍थानों पर प्रमुखता से उगाई जा सकती है जहां दिन का तापमान 25-40 ड़िग्री सेग़्रे क़े बीच मे रहता है तथा रात्रि का तापमान 22 ड़िग्री सेग़्रे से नीचे नहीं आता है। भिण्डी को इसके हरे, मुलायम स्वादिष्ट फलों के लिए उगाया जाता है। भारत में मुख्य रूप से भिण्डी की दो फसलें ली जाती है, एक गर्मी में व दूसरी बरसात के मौसम में पर्वतीय क्षेत्रों में इसकी एक ही फसल ली जाती है। जिसकी बुवाई मार्च-अप्रेल में की जाती है। ग्रीष्मकालीन भिण्डी की फसल लेने के कुछ अतिरिक्त फायदे है, इस मौसम में आमतौर पर दूसरी सब्जियां कम उपलब्ध होने के कारण बाजार मूल्य अच्छा मिलता है तथा दूसरा इस मौसम मे मोजेक रोग का प्रकोप बहुत ही कम होता है अत: इस मौसम में भि‍ण्डी की वे किस्मे भी बो सकते है जो कि मोजेक के प्रति सवेदनशील होती है। इस प्रकार ग्रीष्मकालीन भिण्डी के उत्पादन की उन्नत तकनीकी को अपनाकर अधिक लाभ्‍ प्राप्त कर सकते है। भि‍ण्‍डी के खेत का चयन व तैयारी भिण्डी की फसल को लगभग सभी प्रकार की भूमियों मे उगाया जा सकता है। लेकिन गर्मियों की फसल के लिए...

Advanced Production Techniques of Fenugreek सामान्य मेथी का वानस्पतिक नाम ट्राइगोनेला फोइनमग्रेसियम एवं एक और वर्ग कस्तूरी मेथी का है जिसका वानस्पतिक नाम ट्राइगोनेला कार्निकुलाटा है। मेथी की खेती मुख्यतः हरी सब्जियों, दानो (मसालों) एवं कुछ स्थानो पर चारो के लिये किया जाता है।  मेथी के सूखे दानो का उपयोग मसाले के रूप मे, सब्जियो के छौकने व बघारने, अचारो मे एवं दवाइयो के निर्माण मे किया जाता है। इसकी भाजी अत्यंत गुणकारी है जिसकी तुलना काड लीवर आयल से की जाती है। इसके बीज में डायोस्जेनिंग नामक स्टेरायड के कारण फार्मास्यूटिकल उधोग में इसकी मांग रहती है। इसका उपयोग विभिन्न आयुर्वेदिक दवाओं को बनाने में किया जाता है। इस लेख मे सामान्य मेथी की उन्नत उत्पादन तकनीक का वर्णन किया जा रहा है। मेथी के लिए जलवायु : मेथी शरदकालीन फसल है तथा इसकी खेती रबी के मौसम में की जाती है। इसकी वानस्पतिक वृद्धि के लिए लम्बे ठंडे मौसम, आर्द्र जलवायु तथा कम तापमान उपयुक्त रहता है। फूल बनते समय या दाने बनते समय वायु में अधिक नमी और बादल छाये रहने पर बीमारी तथा कीड़ों का प्रकोप बढ़ जाता है। फसल पकने के समय ठण्डा एवं शुष्क मौसम उपज के लिये लाभप्रद होता है। मेथी अन्य फसलो की तुलना मे अधिक पाला सहनशील होता है। मेथी के लिए भूमि एवं भूमि की तैयारी : दोमट या बलुर्इ दोमट...