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Guava: Enriched Source of Antioxidants अमरुद सबसे लोकप्रिय उष्णकटिबंधीय फल हैं, जिन्हें दुनिया भर में उगाया जाता है। अमरुद को ‘’उष्णकटिबंधीय का सेब’’ भी कहा जाता है, क्योंकि इसका उत्कृष्ट पाचन और पोषक तत्व, उच्च स्वाद और मध्यम मूल्य पर प्रचुर मात्रा में उपलब्धता है, अधिक सहिष्णु होने के कारण इसकी सफल खेती अनेक प्रकार की मिट्टी तथा जलवायु में की जा सकती है। जाड़े की ऋतु मे यह इतना अधिक तथा सस्ता प्राप्त होता है कि लोग इसे निर्धन जनता का एक प्रमुख फल कहते हैं। अमरूद मीठा और स्वादिष्ट फल होने के साथ-साथ कई औषधीय गुणों से भरा हुआ है। फल विटामिन-सी, पेक्टिन और कैल्शियम, फास्फोरस और लोहे जैसे खनिजों में समृद्ध है। अमरूद के फल में मौजूद पेक्टिन की उच्च सांद्रता कोलेस्ट्रॉल को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जिससे हृदय रोगों का खतरा कम होता है। यह शरीर में मौजूद कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि को रोकता है, इसलिए यह प्रोस्टेट कैंसर, स्तन कैंसर और मौखिक कैंसर को रोकने में लाभकारी पाया जाता है। ये आहार फाइबर सामग्री में भी उच्च हैं, इसलिए यह उन लोगों के लिए भी फायदेमंद है, जो मधुमेह से पीड़ित हैं। अमरूद भी विटामिन-ए का एक उत्कृष्ट स्रोत हैं, इसलिए ये नेत्र स्वास्थ्य और नेत्र दृष्टि को बढ़ाने में भी फायदेमंद हैं। यह शरीर...

अमरूद की लोकप्रिय किस्में 1. इलाहाबाद सफेदा - फल का आकार मध्यम, गोलाकार एंव औसत वजन लगभग 180 ग्राम होता है। फल की सतह चिकनी, छिल्का पीला, गूदा मुलायम, रंग सफेद, सुविकसित और स्वाद मीठा होता है। इस किस्म की भंडारण क्षमता अच्छी होती है। 2. लखनऊ-49 (सरदार अमरूद) - फल मध्यम से बडे, गोल, अंडाकार, खुरदुरी सतह वाले एवं पीले रंग के होते हैं। गूदा मूलायम, सफेद तथा स्वाद खटास लिये हुये मीठा होता है। इसकी भंडारण क्षमता अन्य प्रजातियों की तुलना में अच्छी होती है तथा इसमें उकठा रोग का प्रकोप अपेक्षाकृत कम होता है। 3. चित्तीदार - फलों की सतह पर लाल रंग के धब्बे पाये जाते हैं। फल मध्यम, अंडाकार, चिकने एवं हल्के पीले रंग के होते हैं। गूदा मुलायम, सफेद, सुवास युक्त मीठा होता है। 4. एप्पल-कलर - फल गोल एवं चिकने होते हैं। छिल्का गुलाबी या हरे लाल रंग का होता है। फलों का गूदा मुलायम, सफेद एवं सुवास युक्त होता है। फलों की भंडारण क्षमता मध्यम होती है। 5. अर्का मृदुला - फल चिकने, मध्यम आकार, मुलायम बीज, गूदा सफेद एवं मीठा होता है। इस किस्म में प्रचुर मात्रा में विटामिन-सी पाई जाती है। फलों की भंडारण क्षमता अच्छी होती है। 6. ललित - फल मध्यम आकार एवं केशरनुमा आकर्षक पीले रंग के होते हैं। गूदा गुलाबी रंग का होता है। जिसके कारण यह किस्म...

अमरूद की अति सघन बागवानी अमरूद भारत का एक लोकप्रिय फल है। इसका उत्पत्ति स्थान पेरू (दक्षिण अमेरिका) है। क्षेत्रफल एवं उत्पादन की दृष्टि से देश में उगाये जाने वाले फलों में अमरूद का चौथा स्थान है। यह “विटामिन सी” का मुख्य स्त्रोत है। अमरूद पोषक तत्वों का एक बहुत अच्छा और सस्ता स्रोत है। इसका उपयोग ताजा खाने के अतिरिक्त इससे जैम, जेली, नेक्टर, चीज और टॉफी इत्यादि बनाया जाता है। अपनी बहुउपयोगिता एवं अपने उत्तम पौष्टिक गुणों के कारण अमरूद आज सेब से भी अधिक लोकप्रिय होता जा रहा है।  अमरूद में पाये जाने वाले मुख्य पोषक तत्व - मुख्य तत्व मात्रा प्रति 100 ग्राम फल पानी प्रोटीन वसा खनिज पदार्थ विटामिन-सी कार्बोहाइडे्टस कैल्सियम फास्फोरस रेशा 76.1 प्रतिशत   1.5  प्रतिशत   0.2  प्रतिशत   7.8  प्रतिशत   0.25 ग्राम 14.6 प्रतिशत   0.01 प्रतिशत   0.44 प्रतिशत   6.9  प्रतिशत अन्य फल वृक्षों की तरह अमरूद में भी सघन बागवानी की अच्छी संभावनाएँ हैं। अमरूद की सघन बागवानी (हाई डैनिसिटी आर्चडिंग / एच.डी.पी.) उच्च उत्पादकता के साथ उच्च गुणवत्तायुक्त अमरूद उत्पादन की पद्धति है। जिसमें अमरूद की परम्परागत दूरी से कम दूरी पर पौधे लगाये जाते हैं। आम तौर पर देखें तो अमरूद के सामान्य बागवानी में पौधो को अधिक दूरी पर लगाये जाते हैं। जबकि अति सघन बागवानी में परम्परागत दूरी 6 से 8 मी के मुकाबले कम दूरी पर पौधे लगाये जाते है, जिससे प्रति इकाई क्षेत्र में अधिक पौधे...

Cultivation of guava    अमरूद भारत का एक लोकप्रिय फल है। क्षेत्रफल एवं उत्पादन की दृष्टि से देश में उगाये जाने वाले फलों में अमरूद का चैथा स्थान है। इसकी बहुउपयोगिता एवं पौष्टिकता को ध्यान मे रखते हुये लोग इसे गरीबों का सेब कहते हैं। यह स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभदायक फल है। इसमें विटामिन सी अधिक मात्रा में पाया जाता है। इसके अतिरिक्त विटामिन ए तथा बी भी पाये जाते हैं। इसमें लोहा, चूना तथा फास्फोरस अच्छी मात्रा में होते हैं। अमरूद की जेली तथा बर्फी (चीज) बनायी जाती है। इसे डिब्बों में बंद करके सुरक्षित भी रखा जा सकता है। अमरूद के लिए जलवायु अमरूद के लिए गर्म तथा शुष्क जलवायु सबसे अधिक उपयुक्त है। यह गर्मी तथा पाला दोनों सहन कर सकता है। केवल छोटे पौधे ही पाले से प्रभावित होते हैं।  अमरूद की खेती के लिये 15 से 300 सेंटीग्रेड तापमान अनुकूल होता है। यह सूखे को भी भली-भाँति सहन कर लेता है। तापमान के अधिक उतार चढ़ाव, गर्म हवा, कम वर्षा, जलक्रान्ति का फलोत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव कम पड़ता है। अमरूद के लिए मिट्टी अमरूद को लगभग प्रत्येक प्रकार की मृदा में उगाया जा सकता है, परन्तु अच्छे उत्पादन के लिये उपजाऊ बलुई दुमट भूमि अच्छी पाई गई है। इसके उत्पादन हेतु 6 से 7.5 पी.एच. मान की मृदा उपयुक्त होती है किन्तु 7.5...

Diseases, pests and their control during springtime of Guava crop. अमरूद अपनी व्यापक उपलब्धता, भीनी सुगन्ध एवं उच्च पोषक गुणों के कारण यह ‘‘गरीबों का सेब’’ कहलाया जाता है। नियमित रूप से इसका सेवन करने से सामान्य मौसमी बीमारियों से बचा जा सकता है अमरूद के फलों में विटामिन ‘सी’ (200-300 मिली. ग्राम प्रति 100 ग्राम फल) की प्रचुर मात्रा होती है। जो की सफ़ेद रक्त कणों को तेजी से संक्रमण से लड़ने में मदद करता है| इस तरह हमारी प्रतिरोधक  क्षमता में कई गुना  वृद्धि हो जाती है| इसमें फाइबर का भी प्रचुर भंडार है| यह कोलेस्ट्रोल से मदद करता है साथ ही दिल  के रोगों से बचाव करता है| विटामिन ए कीटाणु को रोक कर शरीर में प्रवेश करने से पहले ही खत्म कर देता है इसमें मोजूद लायकोपिन सूरज की हानिकारक किरणों से बचाता है तथा  त्वचा कैंसर से सूरक्षा करता है| प्राकृतिक अवस्था में खाना सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है सुबह के समय इसे पीना भी काफी लाभकारी होता है| बहुत सारे आर्थिक और स्वास्थ्य लाभ होते हुए भी बहुत सारी ऐसी समस्या है जो अमरुद के विकास में अवरोध पैदा करती है| अमरूद के फलों को ताजे खाने के साथ-साथ, व्यवसायिक रूप से प्रसंस्करित कर जैम, नेक्टर एवं स्वादिष्ट पेय बनाकर प्रयुक्त किया जाता है।  अमरूद बहुत कम देखभाल के भी आसानी...

Controlling blossom (Bahar) for high quality fruiting in guava अमरूद का फल वृक्षो की बागवानी मे एक महत्वपूर्ण स्थान है। इसकी बहुउपयोगिता एवं पौष्टिकता को ध्यान मे रखते हुये लोेग इसे गरीबो का सेब कहते है। इसमे विटामिन सी प्रचुर मात्रा मे पाया जाता है। इससे जैम, जैली, नेक्टर आदि परिरक्षित पदार्थ तैयार किये जाते है। उत्तरी व पूर्वी भारत मे वर्ष मे दो बार फलन एवं पश्चिमी व दक्षिणी भारत मे वर्ष मे तीन बार फलन आता है, जिसमे मृग बहार, अम्बे बहार एवं हस्त बहार आते है। भारत मे मृग बहार जो है वह अम्बे बहार एवं हस्त बहार से ज्यादा पसंद किये जाते है क्योंकि अन्य दोनो बहार की तुलना मे मृग बहार के फल गुणवत्ता, स्वाद एवं उपज मे सर्वोत्तम रहते है। फलो की गुणवत्ता के हिसाब से वैसे तो हस्त बहार भी अच्छा रहता है लेकिन इससे उपज कम मिलती है। अतः मृग बहार मे अधिक फूलो/ फलो का उत्पादन, स्वाद एवं गुणवत्तायुक्त फलन प्राप्त करने के लिये वर्षा ऋतु वाली फसल अर्थात अम्बे बहार के फूलो का नियंत्रण करना जरूरी हो जाता है क्योंकि इस फसल की गुणवत्ता अच्छी नही रहती एवं बाजार मूल्य भी नही मिल पाता। बहार का नाम फूल लगने का समय फलन का समय गुणवत्ता मृग बहार जून-जुलाई (वर्षा ऋतु) नवंबर-जनवरी (शरद ऋतु) फल उच्च कोटि के मीठे एवं बड़े होते है। उपज अधिक व बाजार मूल्य...

Flowering and blooming time of guava in India अमरूद के पेड़ प्राकृतिक परिस्थितियों के अंतर्गत उत्तरी भारत में साल में दो बार लेकिन पश्चिमी और दक्षिणी भारत में साल भर में तीन बार अर्थात साल भर फूलों और फलों का उत्पादन करते हैं परिणामस्वरूप यह विराम अवधि (rest period) में चला जाता है और अंततः साल के अलग-अलग समय पर छोटे फसल देने लगते हैं, फूल और फल देने की यह पद्धति व्यावसायिक खेती के लिए वांछनीय नहीं है । अच्छी तरह से परिभाषित अवधि हैं: फूलों के प्रकार फूल देने का समय कटाई का समय फलों की गुणवत्ता अम्बे बहार फरवरी-मार्च (वसंत ऋतु) जुलाई-सितम्बर  (वर्षा ऋतु) फीका, पानी जैसा, स्वाद और रखने की गुणवत्ता खराब मृग बहार जून-जुलाई (मानसून ऋतु) नवम्बर-जनवरी (शरद ऋतु) उत्कृष्ट* हस्त बहार** अक्टूबर फरवरी-अप्रैल बढ़िया, लेकिन उपज कम, अच्छी कीमत मिलती है *अमरूद के पेड़ केवल मृग बहार फूलों का उत्पादन करने के लिए बनाये गए हैं । **यह प्रकार सामान्य नहीं है । यह प्रवृत करना आसान है । यह ज्यादातर एक मौका फसल है । यह पश्चिमी और दक्षिणी भारत में देखा जाता है । मृग बहार के लिए अमरूद में फूल, फल लगने को नियन्त्रि‍त करने की वि‍धि‍: भारत भर में, मृग बहार अम्बे बहार और हस्त बहार से अधिक पसंद किए जाते हैं । इसलिए, फूलों का नियंत्रण आवश्यक हो जाता है ताकि मृग बहार अत्यधिक फूलों का उत्पादन कर सके और सर्दियों में फल...

अमरूद में फसल नि‍यमि‍ति‍करण के लिए एक सरल तकनीक: ब्रांच बैंडि‍ग या शाखा मोडना Guava (Psidium guajava L.) is a commercially important fruit crop belonging to the family Myrtaceae. It is widely grown all over the tropical and subtropical parts of India viz., Maharashtra, Bihar, Uttar Pradesh, Odisha, West Bengal, Chhattisgarh, Gujarat, Madhya Pradesh, Andhra Pradesh, Punjab, Tamil Nadu, and Karnataka. Over the past decade (2001 -2010) there has been a 1.3 fold increase in area (0.16 to 0.21 million hectares) and 1.4 fold increase in production (1.72 to 2.46 million tonnes) of guava. However, its productivity has not yet increased significantly. Among several reasons for low productivity, non-adoption of crop regulation is one of the most important reasons. Crop regulation can be practiced through various techniques viz., pruning, use of chemicals and plant growth regulators, branch bending, etc. Of these, branch bending is the simplest and cost- effective technique of crop regulation. Bearing habit of guava and branch bending Guava plant bears flowers on current season’s growth or new shoots irrespective of time of year. New shoots are produced on mature wood or past season’s growth laterally or terminally. In general flowers are produced in the axils of leaves as solitary or in cymes of two or three flowers. The current season’s flowering shoot...