07 Oct फसल में जैविक ऐजेन्टों के प्रयोग से किसानों को लाभ
Farmers benefit from the use of organic agents in crops किसान की आय दोगुना करने के लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु किसान भाईयों को अपनी फसलों पर होने वाले रासायनों एवं कीट नाशकों पर अत्यधिक खर्च को कम कर के लाभ प्राप्त किया जा सकता है। उत्तर प्रदेश में फसलों को कीटों, रोगों एवं खरपतवारों आदि से प्रति वर्ष 7 से 25 प्रतिशत की क्षति होती है। प्रदेश में 33 प्रतिशत क्षति खरपतवारों द्वारा, 26 प्रतिशत रोगों द्वारा, 20 प्रतिशत कीटों द्वारा, 7 प्रतिशत भण्डारण के कीटों द्वारा, 6 प्रतिशत चूहों द्वारा तथा 8 प्रतिशत अन्य कारकों से होती है। इस क्षति को रोकने के लिए कृषि रक्षा रसायनों का प्रयोग किया जा रहा है प्रदेश में कीटनाशकों की (टेक्निकल ग्रेड) औसत खपत 256 ग्राम प्रति हे0 है, जो देश के औसत खपत (टेक्निकल ग्रेड) 380 ग्राम प्रति हेक्टेयर से कम है। इस औसत खपत में 58.7 प्रतिशत फफॅूदनाशक तथा 3.3 प्रतिशत चूहानाशक एवं धूम्रक सम्मिलित है। रसायनिक कृषि रक्षा रसायनों के प्रयोग से जहॉ कीटों, रोगों एवं खरपतवारों में सहनशक्ति पैदा हो रही है वहीं कीटों के प्राकृतिक शत्रु (मित्र कीट) प्रभावित हो रहे है, वहीं कीटनाशको के अवशेष खाद्य पदार्थों, मिट्टी, जल एवं वायु को प्रदूषित कर रहे है। रसायनिक कीटनाशकों के हानिकारक प्रभावों से बचने के लिए जैविक कीटनाशी/ जैविक एजेन्ट एवं...