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Precautions in the use of pesticides, why and how फसलों की कीटों से सुरक्षा के लिए फसल रक्षा रसायनों अर्थात कीटानाश्कों का प्रयोग किया जाता है । ये कीटनाशक जहरीले तथा मूल्यवान होते हैं । जिनके प्रयोग की जानकारी न होने के कारण इनके नुकसान भी हो सकते हैं । इसलिए कुछ बातों का ध्यान रखने के साथ-साथ इनके प्रयोग के समय क्या-क्या सावधानियाँ रखनी चाहिए, इसकी जानकारी किसानों को होना अति आवश्यक है । कीटनाशकों के घातक प्रभाव से बचने के लिए आवश्यक होता है कि उन पर लिखे हुए निर्देशों का पालन सही ढंग से किया जाय । जिसमें किसी प्रकार की लापरवाही न वरती जाए क्योंकि थोड़ी सी असावधानी होने से बहुत बड़ा नुकसान हो सकता है । कीटनाशकों के प्रयोग से पहले सावधानियाँ कीटों की अच्छी तरह पहचान कर लेनी चाहिए । यदि पहचान सम्भव नहीं हो पा रही हो तो स्थानीय स्तर पर उपस्थित विशेषज्ञ से कीट की पहचान करा कर कीट की किस्म के अनुरूप ही रसायन क्रय करने चाहिए । कीटनाशक का प्रयोग तभी करना चाहिए जब कीट से आर्थिक नुकसान की क्षति निम्न स्तर की सीमा से बढ़ गयी हो । कीट को मारने का सही उपाय एवं समय पता कर लेना चाहिये । कीटनाशकों के विशाक्तता को प्रदर्शित करने के लिए कीटनाशक के डिब्बों पर तिकोने आकार का...

पश्‍चि‍मी राजस्थान में टि‍ड्डी प्रकोप एवं उसका नि‍यंत्रण  राजस्थान के पश्चिमी भाग की जलवायु, मृदा एवं भौगोलिक परिस्थितियाँ अन्य भागो से भिन्न है। इस क्षेत्र के जिले जैसे बाडमेर, जोधपुर, जैसलमेर एवं बीकानेर की सीमा अंतर्राष्ट्रीय सीमा से मिलती है। इस क्षेत्र में मृदा रेतीली, अल्प वर्षा आधारित, उष्ण, उच्च तापमान एवं कम वनस्पति युक्त है। इस प्रकार की जलवायु एवं भौगोलिक परिस्थितियाँ पड़ोसी देश पाकिस्तान में मिलती जो कि टिड्डी जैसे अति हानिकारक कीट के लिए अति उपयुक्त है। वर्ष 2019 (21 अप्रैल से) एवं वर्ष 2020 (11 मई से) में राजस्थान के जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर, बीकानेर, श्रीगंगानगर, जालोर एवं हनुमानगढ़ में टिड्डी दलों का आक्रमण हुआ जो कि नागौर पाली, सिरोही एवं चूरू जिलों तक पहुंच गया था। वर्ष 2020 का आक्रमण यहां तक की गुजरात उत्तरप्रदेश मध्यप्रदेश छत्तीशगढ एवं महाराष्ट्र के कुछ जिलों तक जा पहुंचा। बड़े टिड्डे जो दल या झुण्ड के रूप में रहते हैं उन्हें टिड्डी कहते हैं। टिड्डी फॅमिली एक्रीडीडी का सदस्य है। भारत में टिड्डी की तीन स्पीशीज (रेगिस्तानी टिड्डी सिस्टोसरका ग्रेगरिया, बॉम्बे टीडी पटांगा सकसिंटा एवं प्रवासी टिड्डी लोकस्टा माईग्रेटोरिया) पायी जाती हैं। इसमें से रेगिस्तानी टिड्डी बहुत आम हैं एवं यह एक अंतर्राष्ट्रीय कीट मानी जाती है। ये लगभग 150 किमी तक प्रतिदिन उड़ सकती है। टिड्डी दो अवस्थाओं में पायी जाती है एकांत...

Precaution before use of pesticides विभिन्न प्रकार की फसलों, सब्जियों, एवं फलों के पेड़ों पर कई प्रकार के कीट आक्रमण करते हैं तथा उन कीटो को नष्ट करना आवश्यक होता है अन्यथा वे संपूर्ण फसल को खराब कर सकते हैं। इन कीटों को नष्ट करने हेतु कीटनाशक दवाइयों का इस्तेमाल आजकल बहुतायत से किया जाता है यह कीटनाशक दवाइयां विषैले पदार्थों की श्रेणी में आती है कीटनाशक दवा का छिड़काव करते समय कुछ सावधानियां रखना आवश्यक है जिससे कीट भी नष्ट हो जाये और उसका दुष्प्रभाव मनुष्य अथवा जानवरों पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से न पड़े। इन कीटनाशक दवाइयों का शरीर में प्रवेश कर जाने पर लकवा या अन्य भवकर रोग भी हो सकते हैं। यदि यह दवाइयां भूमि पर गिर कर वही ज्यादा समय तक पड़ी रहती है तो जमीन की उपजाऊपन को यह नष्ट करती है । यही कीटनाशक वर्षा के पानी के साथ घुलकर नदी, नालों में भी चले जाते हैं जिससे जल स्रोत भी दूषित हो जाते हैं। कीटनाशक खरीदते समय ध्यान देने योग्य बातें जहां तक संभव हो आई. एस. आई. मार्क वाली प्रमाणित कीटनाशक दवाइयां ही खरीदनी चाहिए जिससे धोखाधड़ी से बचा जा सके। कीटनाशक के डिब्बे पर लगी प्रभावी तिथि अवश्य देख ली जानी चाहिए। प्रभावी तिथि का तात्पर्य है कि उक्त दवाई को उस तिथि के पहले...

पुराने अप्रयुक्‍त कीटनाशकों का प्रबंधन Pesticides are developed to control pests including weeds and are being extensively used in India. Pesticide includes any substance, or mixture of substances of chemical or biological ingredients intended for repelling, destroying or controlling any pest, or regulating plant growth. According to statistical database of Directorate of Plant Protection, Quarantine & Storage, India, in 2017-18, 62247 “000’ hectare area under cultivation is under pesticide usage. It indicated that 71.54 % of area under cultivation in India is under pesticide usage.   Environment protection act 1986 and Hazardous wastes Management rules, 2016 recognizes date expired and off specification pesticides as hazardous wastes under schedule 1. At various stages from production to usage pesticide becomes obsolete. India is a country with diverse geography and rich biodiversity. Highly hazardous obsolete pesticides stockpiled may pose risk to human and environment. The Vulnerability is high for pesticide related hazards in the country. It is the social responsibility of people using pesticides in farming and public health applications to prevent accumulation of obsolete pesticides that have adverse human health and environment implications. In this article issues on obsolete pesticides, prevention of their accumulation and their safe disposal as per the Food and Agriculture Organizations’ International Code of Conduct on Pesticide Management is discussed. What are obsolete pesticides? Obsolete pesticides...

Judicious Application of Agricultural Chemicals for Sustainable Agriculture फसलों व सब्जियों की कीटों, बिमारियों एवं खरपतवारों से सुरक्षा हेतु विभिन्न उपाय किये जाते है, जिसमें कृषि रसायनों का प्रयोग जैंसे – कीटनाशी, जीवाणुनाशी, फफूँदनाशी एवं खरपतवारनाशी इत्यादि का प्रयोग किया जाता है। ये कृषि रसायन प्रभावी एवं जहरीले होते है, जिसकी वजह से इनके प्रयोग में अप्रत्याशित वृद्धि हो रही है। किसान को इन कृषि रसायनो के प्रयोग सम्बन्धी उचित जानकारी न होने के कारण फायदा होने की जगह नुकसान होने की प्रबल सम्भावना रहती है। कई बार किसान स्वयं इनके प्रभाव में आ जाते है, जिससे उनकी हालत बिगड जाती है तथा समय पर उपचार के अभाव में मृत्यु तक हो जाती है। कृषि रसायन केवल मनुष्यों के लिये ही नहीं अपितु सभी जीव-जन्तुओं, पेंड-पौंधो के लिये भी उतनें ही घातक है। अतः इनके प्रयोग से किसी भी प्रकार की हानि से बचने के लिए तथा पर्यावरण को बिना क्षति पहुचाएँ, यह आवश्यक  हो गया है कि इन कृषि रसायनों को खरीदते समय, घोल बनाते समय, छिड़काव के समय, छिड़काव के बाद तथा भण्डारण के समय उचित सावधानी बरतनी चाहिए। कृषि रसायनों को खरीदते समय आवश्यक सावधानियां :- कीट, रोग एवं खरपतवारों की पहचान व गम्भीरता के आधार पर सिफारिश किये गये कृषि रसायन ही खरीदें। इन रसायनों को सदैव पंजीकृत डीलर के यहॉ...

Safety measures while using insecticides पारंपरिक कृषि प्रणाली में उत्पादन कम होने के कारण किसानों को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ता था अतः उनका आकर्षण आधुनिक कृषि प्रणाली के तरफ बढ़ा जि‍समें किसान उच्च पैदावार वाली कि‍स्‍मों , सिंचाई सुवि‍धा, रासायनि‍क उर्वरकाेें, तथा कीटनाशक का उपयोग करके फसल उत्पादन में कई गुना वृद्धी करने में सफल रहा । उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि के साथ ही कीट का प्रकोप बढ़ा जिसके परिणाम स्वरूप कीट द्वारा होने वाले आर्थिक नुकसान में काफी वृद्धि हुई | एक अनुमान के अनुसार हरित क्रांति के पहले वर्ष 1960 से पूर्व कीट द्वारा होने वाला औसतन नुकसान (सभी मुख्य फसलों को मिलाकर) 7.2 % था जबकि हरित क्रांति के बाद वर्ष 2000 के बाद यह बढ़कर 23.3 % हो गया (धालीवाल, 2007) |  इतनी बड़ी मात्रा में होने वाले नुकसान को रोकने के लिए किसान रासायनिक कीटनाशक का प्रयोग करता है। रसायनिक कीटनाशक की लोकप्रियता का मुख्य कारण है कि यह कीट प्रबंधन के तरीके जैसे भौतिक प्रबंधन, जैविक प्रबंधन, सांस्कृतिक प्रबंधन के तुलना में शीघ्र कीट  का नियंत्रण करता है | अधिक प्रकोप होने पर रासायनिक कीटनाशक केवल एकमात्र नियंत्रण का साधन संभव हो पाता है | अतः वर्तमान समय में रासायनिक कीटनाशक के बिना कृषि की कल्पना करना असंभव है | कीटनाशक जहर के अधि‍क प्रयोग से  प्रदूषण,...

Essential precautions in the use of pesticides in crops फसलों की कीटों से सुरक्षा के लिए फसल रक्षा रसायनों अर्थात कीटानाश्कों का प्रयोग किया जाता है । ये कीटनाशक जहरीले तथा मूल्यवान होते हैं । जिनके प्रयोग की जानकारी न होने के कारण इनके नुकसान भी हो सकते हैं । इसलिए कुछ बातों का ध्यान रखने के साथ-साथ इनके प्रयोग के समय क्या-क्या सावधानियाँ रखनी चाहिए, इसकी जानकारी किसानों को होना अति आवश्यक है । कीटनाशकों के घातक प्रभाव से बचने के लिए आवश्यक होता है कि उन पर लिखे हुए निर्देशों का पालन सही ढंग से किया जाय । जिसमें किसी प्रकार की लापरवाही न वरती जाए क्योंकि थोड़ी सी असावधानी होने से बहुत बड़ा नुकसान हो सकता है । कीटनाशकों के प्रयोग से पहले सावधानियाँ कीटों की अच्छी तरह पहचान कर लेनी चाहिए । यदि पहचान सम्भव नहीं हो पा रही हो तो स्थानीय स्तर पर उपस्थित विशेषज्ञ से कीट की पहचान करा कर कीट की किस्म के अनुरूप ही रसायन क्रय करने चाहिए । कीटनाशक का प्रयोग तभी करना चाहिए जब कीट से आर्थिक नुकसान की क्षति निम्न स्तर की सीमा से बढ़ गयी हो । कीट को मारने का सही उपाय एवं समय पता कर लेना चाहिये । कीटनाशकों के विशाक्तता को प्रदर्शित करने के लिए कीटनाशक के डिब्बों पर तिकोने आकार का...

Justified use and precautions of pesticide chemicals किटनाशको का स्वभाव जहरीला होने के कारण उनके उपयोग के दौरान किसानो, खेत में काम करने वाले मजदूरो एवं जनवरो के स्वास्थ पर बुरा असर होने का खतरा बना रहता है। किटनाशको का संतुलित एवं अनुचित मात्रा पर्यावरणीय घटकों पर प्रतिकुल प्रभाव डालता है। इसलिए किटनाशको को कृषि वैज्ञानिक के सलाह परामर्श से न्यायसंगत उपयोग व स्वास्थ की सुरक्षा को देखते हुऐ इस्तेमाल करना चाहिए। लेकिन बहुत से किसानों को किटनाशको कि उचित मात्रा व सुरक्षा के बारे में ज्ञान नही होता है। या इसे महत्व नही देते है। किटनाशको से स्वास्थ कि सुरक्षा एवं प्र्यावरण को टिकाऊ बनाये रखने के लिए कृषि प्रसार सेवको, उद्योगो एवं खेतो में काम करने वाले मजदूरों का यह एक कर्तव्य है। कि किटनाशको से सुरक्षा के उपायो को जन जन तक पहुँचाये। फुटपाथ डीलरों या गैर-लाइसेंस प्राप्त व्यक्ति से कीटनाशक न खरीदें। पूरे सीजन के लिए थोक में कीटनाशक न खरीदें। कंटेनर पर बिना अनुमदित लेबल के कीटनाशक न खरीदें। कभी भी समाप्त हो चुकी अवधि वाला कीटनाशक न खरीदें। लीक/ढीले/गैर-सीलबंद कंटेनर वाले कीटनाशक न खरीदें। घर के परिसर में कीटनाशक कभी भी संग्रहित न करें। कभी भी मूल कंटेनर से कीटनाशक दूसरे कंटेनर में स्थानांतरित न करें। खरपतवारनाशक के साथ कीटनाशक को संग्रहित न करें। बच्चों को संग्रहण वाली जगह पर प्रवेश न करने दें। कीटनाशक धूप या...