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गागर निम्बू की खेती गागर निम्बू जिसे अंग्रेजी में पोमेलो कहा जाता है, तथा जिसका वैज्ञानिक नाम साइट्रस मैक्सिमा है, साइट्रस जाति का सबसे बड़ा फल है| साइट्रस फलों का एक बड़ा जाति है| जिसमे कई प्रमुख फलों कि प्रजाति शामिल हैं, उनमे से संतर और गागर निम्बू प्रमुख प्रजाति हैं| जीन अनुक्रम के आधार पर संतरा (साइट्रस चीनेंसिस),  गागर निम्बू (साइट्रस मक्सिमा) तथा मैंडरिन (साइट्रस रेटिकुलाटा) के बीच का एक संकर है| इसकी संरचना मूलतः संतरा जैसी होती है जो पूर्णतः पक जाने पर बाहरी छिलका पीला तथा अन्दर की पेशियां गुलाबी,लाल अथवा उजाले रंग की होती हैं| परन्तु इसका बाहरी छिलका संतरा की तुलना में मोटा होता है और पेशियां भी अकार में बड़ी और अधिक होती हैं| पेशियां रसदार होती हैं, जो बड़े लोब्यूलों में विभाजित होती हैं| प्रत्येक लोब्यूल एक दूसरे से घने सफ़ेद विभाजन से अलग होता है| प्रत्येक लोब्यूल के अंदर बीज होते हैं| इसके बीज भी संतरा की तुलना में बड़े और अधिक होते हैं| इसका स्वाद लगभग संतरा के जैसा ही, कुछ खट्टा तो, कुछ मीठा होता है| इसके आकर में विभिनता देखि जा सकती है, कुछ गागर निम्बू पूर्णतः गोल, तो कुछ निचे की तरफ से चपटे होते हैं| इसके वजन में भी विभिनता देखि जा सकती है, यह 500 ग्राम से लेकर 2...

The usefulness of lemon in human health नीबू विटामिन सी से भरपूर नीबू स्फूर्तिदायक और रोग निवारक फल है। इसका रंग पीला या हरा तथा स्वाद खट्टा होता है। इसका रस में साइट्रिक अम्ल सर्वप्रमुख स्रोत था। साधारणतः नीबू में ए बी और सी विटामिनों की भरपूर मात्रा है-विटामिन ए अगर एक भाग है तो विटामिन बी दो भाग और विटामिन सी तीन भाग। इसमें पोटेशियम लोहा,सोडियम, मैगनेशियम तांबा फास्फोरस और क्लोरीन तत्त्व तो हैं ही प्रोटीन वसा और कार्बोज भी पर्याप्त मात्रा में हैं। विटामिन सी से भरपूर नीबू शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ ही एंटी आक्सीडेंट का काम भी करता है और कोलेस्ट्राल भी कम करता है। नीबू में मौजूद विटामिन सी और पोटेशियम घुलनशील होते हैं जिसके कारण ज्यादा मात्रा में इसका सेवन भी नुकसानदायक नहीं होता। रक्ताल्पता को भी नीबू के रस के सेवन से फायदा होता है। नीबू का सेवन करने से जुकाम भी दूर रहता हैं। एक नीबू दिन भर की विटामिन सी की जरूरत पूरी कर देता है। नीबू के कुछ घरेलू प्रयोगों से ऐसा माना जाता है कि दिन भर तरोताजा रहने और स्फूर्ति बनाए रखने के लिए एक गिलास गुनगुने पानी में एक नीबू का रस व एक चम्मच शहद मिलाकर पीना चाहिए। इसके अलावा इसमें विटामिन ए, सेलेनियम और जिंक भी...

Techniques for producing nutritional and beneficial fruits of lemon नीबू में ए, बी और सी विटामिनों की भरपूर मात्रा होती है। इसमें -पोटेशियम, लोहा, सोडियम, मैगनेशियम, तांबा, फास्फोरस और क्लोरीन तत्त्व तो हैं ही, प्रोटीन, वसा और कार्बोज भी पर्याप्त मात्रा में हैं।विटामिन सी से भरपूर नीबू शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ एंटी आक्सीडेंट का काम भी करता है और कोलेस्ट्राल भी कम करता है।  नीबू में मौजूद विटामिन सी और पोटेशियम घुलनशील होते हैं, जिसके कारण ज्यादा मात्रा में इसका सेवन भी नुकसानदायक नहीं होता। रक्ताल्पता से पीडि़त मरीजों को भी नीबू के रस के सेवन से फायदा होता है। यही नहीं, नीबू का सेवन करने वाले लोग जुकाम से भी दूर रहते हैं।  गर्मी के मौसम में हैजे से बचने के लिए नीबू को प्याज व पुदीने के साथ मिलाकर सेवन करना चाहिए। लू से बचाव के लिए नीबू को काले नमक वाले पानी में मिलाकर पीने से दोपहर में बाहर रहने पर भी लू नहीं लगती। इसके अलावा इसमें सेलेनियम और जिंक भी होता है। गले में मछली का कांटा फंस जाए तो नीबू के रस को पीने से निकल जाता है। नींबू की खेती केे लि‍ए जलवायु कागजी निम्बू की खेती के लिए उष्ण कटिबंधीय और नमीयुक्त गर्मी का मौसम उपयुक्त है। पाला और जोड़ की हवा से मुक्त वाले क्षेत्रों को अच्छा माना जाता...

Seedless lemon cultivation technique बीजरहित नींबू को फ़ारसी में नींबू या ताहिती नींबू के रूप में भी जाना जाता है। इसका वानस्पतिक नाम है साइट्रस लैटिफ़ोलिया जो कि रुटेसी परिवार से संबंध रखती है। बीजरहित नींबू संकर मूल का होता है, जो कि खट्टा नींबू (साइट्रस औरंटीफोलिया) और बड़ा नींबू (साइट्रस लिमोन) या चकोतरा (साइट्रस मेडिका) के बीच एक सलीब से होने की संभावना है। यह एक मध्यम आकृति का, लगभग कॉटे रहित वृक्ष है, जो कि विस्तृत फैल, झालरदार शाखाओं के साथ 4.5 से 6.0 मीटर (15 से 20 फीट) लंबा है। फूल हल्का बैंगनी के साथ सफेद रंग के होते है। फल अंडाकार या आयताकार है जो कि 4 से 6.25 सेंटीमीटर (1.5 से 2.5 इंच) चौड़े और 5 से 7.25 सेंटीमीटर (2 से 3 इंच) लंबे है, आम तौर पर कुछ बीजों वाले या बीजरहित होते है। हालांकि फलों को आम तौर पर हरा अवस्था में तोड़ा और बेचा जाता है, पर पूरी तरह परिपक्व होने पर फल पीलापन लिये हुए हरा या बिलकुल पीले रंग के हो जाते है। फल का गूदा रसदार, पर फल में एक सुगंधित, मसालेदार सुगंध और तीखा स्वाद होता है। वाणिज्यिक कृषि के प्रयोजनों के लिए इसमें दुसरे नींबू की तुलना में कई फायदे है, जैसे बड़ा आकृति, बीज की अनुपस्थिति, प्रतिकूल वातावरण में रहने...

Citrus fruit cultivation in Malwa region भारत में,  केले एवं आम के बाद  नीबू वर्गीय फलों की सर्वाधिक  खेती की जाती  है। पिछले तीन दशको से नींबू वर्गीय फलों के क्षेत्र एवं उत्पादन में लगातार वृद्धि हुई है। मध्यप्रदेश, देश का चौथा सबसे बड़ा नींबू उत्पादक राज्य है और देश के कुल उत्पादन में मध्य प्रदेश की 10.7% हिस्सेदारी हैं।   राज्य में  नींबू वर्गीय फलों की खेती मुख्यतः मंदसौर, शाजापुर, बैतूल, उज्जैन, छिंदवाडा, खण्डवा और होशंगाबाद में होती हैं। मौसम्बी  की खेती  मंदसौर, नीमच, राजगढ़ जिलों में लगातार बढ़ रही है। मध्य प्रदेश में  नींबू वर्गीय फलों का औसत  उत्पादन अन्य उत्पादक राज्यों की तुलना में चिंताजनक रूप से कम है। नींबू वर्गीय फलों की खेती और राष्ट्रीय महत्व:- देश भर में नींबू वर्गीय फलों की खेती  व्यापक रूप से की जाती  है। इसकी खेती में बहुत  समस्याओं का सामना करना पड़ता है जैसे: खेती की सीमित जगह, सीमित जल स्रोत और पौध रोपण से फलन तक पौधों को विभिन्न बीमारियो एवं  विभिन्न कीटो से बचाना, सीमित उत्पादन अवधि आदि । नींबू वर्गीय फलों के लि‍ए मिट्टी एवं जलवायु: - नीबू वर्गीय फल एक  सदाबहार, उप-उष्णकटिबंधीय समूह से संबंधित है, इनकी खेती  पाले रहित अर्द्ध उष्णकटिबंधीय  एवं  उपोष्णकटिबंधीय जलवायु में भी अच्छी तरह से की जा सकती है। इसकी खेती 13-370C के तापमान सीमा के बीच...

दार्जिलिंग और सिक्किम के उत्तर पूर्वी पहाड़ी क्षेत्र में मेंडारि‍न ऑरेंज के प्रमुख रोग तथा उनका प्रबंधन Fruit crops play an important role in the life of farmers of North Eastern hill regions. Fruit crops make hill agriculture vibrant and potentiate the economic condition of the farmers of this region. In Darjeeling region of West Bengal and Sikkim, cultivation of fruit crops mainly Darjeeling Mandarin is main source of livelihood for the farmers. In India, every year a huge loss to citrus production occurs due to damage caused by insect pests, diseases and off course physiological disorders. All these factors together cause a great damage to citrus crops; and growers as well as consumers are disadvantaged with it.   A. Disease Pests and their Management: The diseases are caused by fungi, bacteria, virus, virus like pathogens, etc. They cause severe damage to the mandarin orange cultivation. The major diseases affecting citrus crops in Darjeeling and Sikkim regions are as follows: 1. Gummosis disease (Causal organism: Phytophthora palmivora, P. citrophthora, P. nicotianae var. parasitica): The characteristic symptom of the disease is exudation of gum from bark of the tree trunk. The leaves of affected plants, turn yellow and show blight symptoms. The bark shows conspicuous brown staining along with hardened masses of gum on the surface. The bark cracks open and...

Major Disease and Their Management in Citrus Crop आजकल नींबू वर्गीय फलों पर, इनके शरीर को ऊर्जादायक एवं औषधीय प्रभाव वाले गुणों के कारण, विशेष ध्यान है। यें फल विटामिन सी, शर्करा, अमीनो अम्ल एवं अन्य पोषक तत्वों के सर्वोत्तम श्रोत होते हैं। इन फल वृक्षों में नींबू वर्गीय फलों जैसे सन्तरे, नींबू व मौसमी आदि का महत्वपूर्ण स्थान है। नींबू वर्गीय फसलों में अनेक प्रकार के कारक जीवों जैसे कवक, जीवाणु, विषाणु, विषाणु समकक्ष जीव एवं सूत्रकृमि द्वारा विभिन्न रोग व्याधियों का प्रकोप होता है। भारत में नींबू वर्गीय फसलों की प्रमुख रोग व्याधियां एवं उनकी रोकथाम इस प्रकार है– 1. नींबू का आर्द्र गलन रोगः यह रोग नर्सरी में पौधों को हानि पहुंचाता है। आर्द्रगलन नये पौधों या बीजांकुरो का सामान्य रोग है। यह उन सभी स्थानों पर पाया जाता है जहां पर नमी की अधिकता तथा खेतों मे जल निकास का उचित प्रबन्ध नही होता है। आर्द्रगलन रोग नींबू वर्गीय फसलों की सभी प्रजातियों के नये अंकुरित होने वाले पौधो को रोग ग्रसित कर सकता है। यह रोग पीथियम, फाइटोफ्थोरा एवं राइजोक्टोनिया नामक कवको की प्रजातियों द्वारा होता है। इस रोग में पौधें भूमि सतह के पास गलकर गिरने लगते है और मर जाते है। रोग की रोकथामः इस रोग के नियन्त्रण हेतु उचित कवकनाशियों से भूमि का उपचार करना चाहिये। मृदा के निर्जर्मीकरण...

नींबू की उन्‍नत प्रजातियॉं किस्‍म विकसित उपज विशेषताऐं कागजी कलॉं  Kagji Kalan भा.कृ अनुं.सं. 7-10 किग्रा प्रति पौधा (दसवें साल में)  ओजस्‍वी जिसे 8 से 12 गांठ पर कटाई की जाती है। फल पकने का समय जून का तीसरा सप्‍ताह। गुच्‍छे मध्‍यम (500-750 ग्रा) लम्‍बे बेनाकर एवं बीजरहित । दाने अण्‍डाकार तथा हरा पीलापन लिए हुए। फल खाने तथा किसमिस बनाने के लिए अति उपयुक्‍त (22 से 24 डिग्री ब्रिक्‍स)। 1979 में मे उत्‍तर व मध्‍य भारत के लिए अनुमोदित किस्‍म। ...