10 Jun पर्वतीय क्षेत्रों के लिए संरक्षित खेती की तकनीकी जानकारी
Technical knowhow of protected farming for hilly areas पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि के तौर तरीके अन्य भागों से थोड़ा अलग है। जिसका मुख्य कारण वातावरण के साथ-साथ अन्य कारकों का अलग होना है जैसे की समतल भूमि का आभाव, खड़ी चढ़ाईया, सिचाई के पानी की कमी इत्यादि जो काश्तकारी को और विषम बना देती हैं ऐसे हालातों में अनाजों या अन्य फसलो की अपेक्षा सब्जियों का उत्पादन अधिक लाभप्रद है। क्योकि इनसे हमें कम भूमि से अधिक शुद्ध लाभ मिलता है। इसी को ध्यान में रखतें हुए संरचित खेती का विकास किया गया हैं जिससे तापमान, आद्रता, सूर्य का प्रकाश एवं हवा के आगमन में फसलों की आवश्यकता के अनुसार परिवर्तन करके फसलो की उत्पादकत के साथ-साथ गुणवत्ता भ बढ़ाई जा सकती है। इस प्रकार इस तकनीक के उपयोग से सालों भर बेमौसमी सब्जियों का उत्पादन आसान हो जाता हैं पर्वतीय क्षेत्रों में जाड़ों के मौसम में तापमान इतना कम हो जाता है कि पौधोे की बढ़वार लगभग रूक सी जाती है। लेकिन इन्ही पौधो को अगर पालीहाउस के अन्दर लगाते है तो इससे पौधो की बढ़वार संतोषजनक रहती है। इससे किसानों को सालो भर रोजगार के अवसर प्रदान होते है। यह तकनीक छोटे, सीमांत एवं बड़े किसानो सभी के लिये फायदेमंद है। इस प्रकार यह संरक्षित खेती पर्वतीय कृषि विकास को अधिक मजबूत...