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Biopesticides: An Eco-friendly Tool for Crop Production जैव-कीटनाशक पारिभाषिक शब्द उन यौगिकों को परिभाषित करता है जो कि व्यापक रासायनिक कीटनाशकों के बजाय विशिष्ट जैविक प्रभाव के माध्यम से कृषि कीटों का प्रबंधन करने के लिए उपयोग किये जाते है। यह जैव नियंत्रण घटकों - यानी प्राकृतिक जीवों या प्राकृतिक सामग्री (जैसे कि जानवरों, पौधों, बैक्टीरिया, या कुछ खनिजों) से उत्पन्न पदार्थों को संदर्भित करता है, जिनमें उनके जीन या चयापचय पदार्थ शामिल हैं, जो कि कीटनाशकों को नियंत्रित करने के लिए उपयोग मे लिए जाते हैं। एफ.ए.ओ. की परिभाषा के अनुसार, जैव कीटनाशकों में वो जैव नियंत्रण घटक शामिल होते हैं जो निष्क्रिय घटक हैं जो कि जैव नियंत्रण घटकों जैसे कि पैरासिटोइड, शिकारी, और कीट रोगजनक निमेटोड की कई प्रजातियां के विपरीत सक्रिय रूप से कीटों (हानिकारक जीव) की तलाश करते हैं। जैव कीटनाशकों के प्रकारः 1. सूक्ष्मजीव कीटनाशकः अमेरिकी पर्यावरण संरक्षण संस्था (ईपीए) कि परिभाषा के अनुसार जैव कीटनाशक इस तरह के कीटनाशक हैं जो कुछ निश्चित प्रकार के प्राकृतिक जीवों जैसे  पशु, पौधे एवं  जीवाणुओं तथा  कुछ खनिजों से  प्राप्त  होते हैं। सूक्ष्मजीव कीटनाशकों में सक्रिय संघटक के रूप में एक सूक्ष्मजीव, जीवाणु, कवक, विषाणु, प्रोटोजोएन या शैवाल होते हैं। सूक्ष्मजीव कीटनाशक कई अलग-अलग प्रकार की कीटों को नियंत्रित कर सकते हैं। इन सूक्ष्मजीव जैव कीटनाशकों के अलग-अलग सक्रिय संघटक लक्ष्य कीट के लिए...

Entomopathogenic nematodes (EPNs) in biological pest control कीटों के आक्रमण को रोकने के लिए कीटनाशकों का उपयोग दिन - प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है । जिसके कई दुष्प्रभाव सामने आ रहे है । इन दुष्प्रभावों को कम करने में जैविक कीट नियंत्रण अहंम भूमिका निभाता है । जैविक नियंत्रण का उपयोग जीव विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में किया गया है, खासकर कीटनाशक और पौधों की वृद्धि के लिए । फसलों के नाशीजीवों को नियंत्रित करने के लिए दूसरे जीवो को प्रयोग में लाना जैव निंयत्रण कहलाता है । वर्तमान में ईपीएन जैविक नियंत्रण कारक दुनिया भर में कई महत्वपूर्ण कीटो को नियंत्रित करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है । ताकि कई महत्वपूर्ण कीट कीटनाशकों को नियंत्रित किया जा सके । कीटनाशको को नियंत्रित करने के लिए ईपीएन का उपयोग एक संभावित गैर रासायनिक दृश्टिकोण है। ईपीएन जैविक नियंत्रण गुणों के अनुकूलतम संतुलन रखने वाले एकमात्र कीट परजीवी सूत्रकृमि है । किसी विशेष कीट को नियंत्रित करने के लिए एक ईपीएन का चयन विभिन्न कारको पर आधारित है । सूत्रकृमि की मेजबान श्रृंखला, मेजबान खोज, पर्यावरणीय कारको की सहनशीलता, उत्तरजीविता और प्रभावशीलता । मृदा बनावट, तापमान और मेजबान उपलब्धता को उनके वितरण का निर्धारण करने के लिए महत्वपूर्ण कारक माना जाता है । एंटोमोपैथोजेनिक नेमाटोड्स (ईपीएन) क्या है ? ईपीएन, सूत्रकृमियो (धागे या कीड़ो)...

Microbial Pest management of crop diseases  अत्यधिक रासायनिक कीटनाशकों के प्रयोग के दुष्परिणाम अब सामने आने लगे है । किसानों को यह अनुभव होने लगा है कि रासायनिक कीटनाशक अब उन्हीं शत्रु  कीटों पर बेअसर हो रहे है, जिनपर वो रसायन प्रयोग कर पहले छुटकारा पा जाते थे। इसीलि‍ए अब किसान फसल सुरक्षा के अन्य विकल्प तलाशने लगे है | अतः यह बात अब समझ में आने लगी है कि प्रकृति के जितने समीप रहकर खेती की जाय उतनी ही समस्या कम आएगी । सूक्ष्म जैविक कीट प्रबंधन (Microbial Pest Management)  एक प्राकृतिक पारिस्थितिक घटना चक्र है , जिसमे नाशीजीवों के प्रबंधन में सफलतापूर्वक प्रयोग में लाया जा सकता है और यह एक संतुलित, स्थाई और किफायती कीट प्रबंधन का साधन हो सकता है| सुक्ष्जीवियों  का नाशीजीवों के लिए उपयोग सूक्ष्म-जैविक प्रबंधन कहलाता है | यह जैविक प्रबंधन का नया पहलु है, जिसमे नाशीजीवों के रोगाणुओं का उपयोग उनके नियंत्रण के लिए किया जाता है| इसके लिए उपयोग में लाये जाने वाले सूक्ष्मजीवों को जैविक कीटनाशक कहते है,जो वस्तुतः कम संख्या में प्रकृति में उपलब्ध रहते है| व्यवहारिक रूप से सूक्ष्म-जैविक प्रबंधन के लिए कीटों के प्राकृतिक शत्रुओं को ढूढ़कर ,पाल पोसकर (by rearing) और उनकी संख्या में वृद्धि करके उन्हें नाशीजीवों के प्रबंधन हेतु उपयोग में लाया जाता है| प्रकृति में बहुत से ऐसे सूक्ष्मजीव...