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An overview of Mushroom Cultivation मशरूम की खेती का अवलोकन When envisioning a crop that does not require sunlight, soil, or open fields, mushrooms stand out as the perfect example. Mushroom cultivation is a prime model of the “Zero Emission” concept of total recycling, as it utilizes agricultural waste from other crops and, in return, provides a highly nutritious food source. Mushroom farming is a profitable and sustainable enterprise with immense potential. Unlike traditional farming, it is an eco-friendly practice that requires minimal land and water and can be conducted indoors. With the rising demand for organic and health-conscious foods, mushrooms have gained popularity due to their rich nutritional profile and medicinal properties. One of the key advantages of mushroom cultivation is that it is a soilless farming system. Instead of soil, agricultural byproducts such as wheat straw and paddy straw serve as the growth medium. Cultivation takes place in controlled environments such as rooms, huts, or tin sheds that shield the mushrooms from direct sunlight. Being fungi, mushrooms derive their energy from the substrate through biochemical decomposition, making them well-suited for indoor farming. Mushrooms are a nutritional powerhouse and an excellent supplement to staple foods, often referred to as the “meat of the vegetable world”. They are low in calories, rich in dietary...

मशरूम के पौषक तत्व तथा उसके औषधीय गुण Mushroom is the rich source of vitamin B and many recipes of mushroom in hindi reveals the medicinal and nutritional values of mushroom in our diet. Mushroom protein powder is very popular among the youth to fulfill daily need of protein in athletes. मशरूम के पौषक तत्व तथा उसके औषधीय गुण मशरूम की‌ खेती आदी- अनादी काल से की जाती है।  बर्षा के समय जंगलो में नमी, आदृता मिलने पर वे पेड़ों, झाड़ियों, पत्तीयों, जड़ों से निकल आते हैं।  मशरूम एक पौष्टिक, स्वास्थ्यवर्धक एवं औषधीय गुणों से युक्त रोगरोधक सुपाच्य खाद्य पदार्थ है। यह पोषक गुणों से भरपूर शाकाहारी जनसंख्या के लिए महत्वपूर्ण विकल्प है तथा पौष्टिकता की दृष्टि से शाकाहारी एवं मांसाहारी भोजन के बीच का स्थान रखता है। मशरूम का 21वीं सदी में उत्तम स्वास्थ्य के लिए भोजन में प्रमुख स्थान है। पोषक तत्वों की प्रचुरता के दृष्टिकोण से मशरूम में पोषक तत्व अधिकांश सब्जियों की तुलना में अधिक पाए जाते हैं।  यह एक कमाईपूत फसल है जिसमें लागत कम और आय अधिक होती है। कम साधन व कम क्षेत्रफल में उगाय जाने वाली फसल है। इसमें अधिक मात्रा मे रासायनिक तत्व पाए जाते है जो दवाईयों में उपयोग होते हैं। इसकी खेती पोषकीय एवं औषधीय लाभ के लिए की जाती है। मशरूम में विभिन्न...

स्वास्थ्य और स्वाद से भरपूर मशरूम के मूल्य संवर्धित उत्पाद Mushrooms are an edible fungus typically grown above the soil. Mushrooms grow at temperatures ranging 15 - 23 0c. There are different types of mushrooms like milky mushrooms, White button mushroom, Crimino Mushroom, Portabello Mushroom, Shiitake Mushroom, Maitake Mushroom, Oyster Mushroom, Enoki Mushroom, Beech Mushroom, Black Trumpet Mushroom, King Trumpet Mushroom, Chanterelle Mushroom, Hedgehog Mushroom, Morel Mushroom, Porcino Mushroom. The three majorly grown mushrooms in India are button mushrooms, milky mushrooms, oyster mushrooms. Mushrooms are nutritious, medicinal and functional food. It is considered as a health food as it contains low calories, high protein, dietary fiber, vitamins, and minerals (Barros et al., 2008). Mushrooms are nutritionally desirable because of their low energy value, fiber content, and high antioxidant capacity (Kalac, 2013). According to reports of Cheung 2010 different species of mushroom contains different amount of carbohydrates which usually ranges between 35- 70%, including digestible and non-digestible carbohydrates. The protein content ranges from 1.6 -2.1 g/100g (Mattila et al., 2002). According to Sadler (2003), mushrooms are a good source of insoluble fiber in the form of chitin (polymer of N-acetyl-glucosamine) and non-starch polysaccharides like β-glucans. Mainly mushrooms are low in fat and a good source of unsaturated fatty acids, 75% (w/w) of the total fatty...

मशरूम की खेती: अतिरिक्त आय का साधन मशरुम एक प्रोटीनयुक्त खाद्य फसल है। इसमें शुष्क भार के आधार पर 28 से 30 प्रतिशत तक उच्च श्रेणी का प्रोटीन होता है। मशरुम खाने से प्रोटीन की कमी से होने वाले रोगों का बचाव होता है। प्रोटीन के अतिरिक्त इसमें विटामिन-सी एवं विटामिन-बी काॅम्प्लेक्स ग्रुप में थाइमिन, राइबोफ्लेविन, नियासिन, फोलिक एसिड़ तथा कोबालएमिन (बी- 12) है जो कि गर्भवती महिलाओं व बच्चों के लिये आवश्यक है। इसमें लवण जैसे सोडियम, पोटेशियम, फाॅस्फोरस व लोहा प्रचुर मात्रा में होते हैं। मशरुम खाने से खुन की कमी के ‘एनिमिक’ रोगियों को लाभ होता है। सोडियम तथा पोटेशियम का अनुपात अधिक होने के कारण यह उच्च रक्तचाप को भी दूर करता है। मशरुम एक कम कैलोरी देने वाला भोजन है, इसलिये यह मोटापा दूर करने के लिये भी उपयोगी है। इसमें शर्करा तथा स्टार्च नहीं होने के कारण इसे ‘‘डिलाइट आफ डाइबिटिक” कहा जाता है। यह मधुमेह रोगियों के लिये एक वरदान है। इसमें काॅलेस्ट्राॅल बिल्कुल नहीं होता तथा अर्गोस्ट्राॅल होता है जो कि पाचन क्रिया के दौरान विटामिन-डी में बदल जाता है। अतः यह हृदय रोगियों के लिये भी अच्छा भोजन है। राजस्थान में मशरुम की 2 प्रजातियों की खेती आसानी से व्यवसायिक स्तर पर की जाती है। इन प्रजातियों की खेती का उपयुक्त समय निम्नानुसार हैः- सफेद बटन...

Mushroom production, product and dishes. मशरूम विशेष प्रकार की फफूंदों का फलनकाय है, जिसे फुटु, छत्तरी, भिभौरा, छाती, कुकुरमुत्ता, ढिगरी आदि नामों से जाना जाता है, जो पौष्टिक, रोगरोधक, स्वादिष्ट तथा विशेष महक के कारण आधुनिक युग का एक महत्वपूर्ण खाद्य आहार है। बिना पत्तियों के, बिना कलिका व बिना फूल के भी फल बनाने की अदभूत क्षमता रखता है।  मशरूम का प्रयोग भोजन के रूप में, टॉनिक के रूप में व औषधि के रूप में होता है। भारत जैसे देश में जहॉ की अधिकांश आबादी शाकाहारी है उस स्थिति में खुम्बी का महत्व पोषण की दृष्टि से और भी अधिक बढ़ जाता है। मौसम की अनुकूलता एवं सघन वनों के कारण भारतवर्ष में मशरूम खेतों में, मेड़ों में, वनों में प्राकृतिक रूप से विभिन्न प्रकार के माध्यमों में निकलते है। ग्रामीण जन खाद्य मशरूम का बड़े चाव से उपयोग करते है। आज अनेक प्रकार के मशरूम को न केवल प्रयोगशाला में उगाया जा रहा है, वरन उनकी व्यावसायिक खेती कर उनका निर्यात एवं आयात कर कृषि अर्थव्यवस्था को भी सुदृढ़ किया जा रहा है। मशरूम का प्रयोग सब्जी के रूप में किया जाता है। व्यवसायिक रूप से तीन प्रकार की खुम्बी उगाई जाती है। बटन खुम्बी, ढींगरी खुम्बी तथा धान पुआल या पैडी स्ट्रा खुम्बी। व्यावसायिक स्तर पर उत्पादित आयस्टर एवं पैरा मशरूम की...

Mushroom cultivation - an additional source of income  भारत में मशरूम उत्पादन का इतिहास लगभग तीन दशक पुराना है परंतु लगभग 10-12 वर्षो के दौरान मशरूम उत्पादन में लगातार वृध्दि दर्ज की गई है। बस्तर क्षेत्र में धान का अधिक रकबा होने के कारण पर्याप्त मात्रा में धान का पैरा प्रतिवर्ष निकलता है, जिसका मात्र 2-3 फीसदी हिस्सा जानवरों के खाने के काम में लाया जाता है, शेष खलियानों, घरों, बाडियों आदि में व्यर्थ रह जाता है जि‍सका उपयोग मशरूम की खेती में कि‍या जा सकता है। बस्तर का अधिकांश भाग असिंचित एवं एक फसली होने के कारण दिसम्बर माह के पश्चात् यहां रोजगार की समस्या उत्पन्न हो जाती है ऐसे मे मशरूम की खेती ग्रामीण महिलाओं, बेरोजगार युवकों, कृषि मजदूर आदि के लिए रोजगार तथा अतिरिक्त आय का साधन बन सकता है क्‍योकि‍ बस्तर संभाग में प्राचीन काल से ही खाद्य मशरूमों का प्रयोग हो रहा है और यहां के जन समुदाय द्वारा इसे  पसंद किया जाता है। बस्तर में क्षेत्रा में बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं में कुपोषण कि समस्या देखने को मिलती है। मशरूम एक मात्र एैसा खाद्य है जिससे सेवन से सभी प्रकार के पौष्टिक तत्व मानव शरीर में पहुंचते है जिससे कुपोषण को हटाया जा सकता है। सामान्य बोलचाल की भाषा में मशरूम को खुंभ, खुंभी, भमोडी एवं गुच्छी आदि कई...

More beneficial cultivation of Mushroom वर्षा ऋतु में मिट्टी में से अपने आप छतरीनुमा आकार के सफेद, लाल, भूरे विभिन्न रंगों के फफूँद या क्षत्रक उगते हैं। यही फफूँद मशरूम (mushroom) कहलाते हैं। इसे फुटू या पीहरी भी कहा जाता है। यह फफूँदो का फलनकाय होता है। जो  पौश्ष्टिक, रोगरोधक, स्वादिष्ट तथा विशेष महक के कारण आधुनिक युग का महत्त्वपूर्ण खाद्य आहार है।  बिना पत्तियों के, बिना कलिका, बिना फूल के भी फल बनाने की अदभूत क्षमता वाली मशरूम, जिसका प्रयोग भोजन के रूप में, टानिक के रूप में औषधि के रूप में होता है, अत्‍यन्‍त बहुमूल्य है। मौसम की अनुकूलता एवं सघन वनों के कारण भारतवर्ष में पर्याप्त प्राकृतिक मशरूम निकलता है। ग्रामीणजन इसके बड़े चाव से उपयोग करते है। उनकी मशरूम के प्रति विशेष रूचि है। इसीलिए इन क्षेत्रों में व्यावसायिक स्तर पर उत्पादित आयस्टर व पैरामशरूम की अधिक माँग है। यहां व्यावसायिक स्तर पर चार प्रकार के मषरूम उगाये जा सकते है। आयस्टर मशरूम या प्लूरोटस मशरूम पैरा मशरूम या फूटु) (वोल्वेरियेला प्रजाति) सफेद दूधिया मशरूम (केलोसाइबी इंडिका) सफेद बटन मशरूम (अगेरिकस बाइस्पोरस) उपरोक्त प्रकार के मशरूम की संक्षिप्त तकनीक निम्नानुसार है। आयस्टर मशरूम :- 100 लीटर पानी में 5 ग्राम बाविस्टिन दवा 125 मि.ली. फार्मेलीन को ठीक से मिला देते है। 12 किलो गेहूँ भूसा या धान की पैरा कुट्टी को भिगोने के उपरांत पॉलीथीन षीट से...

Grow Milk or Dudhia mushroom in the summer season to earn good returns दूधिया मशरूम एक स्वाटिष्ट प्रोटीनयुक्त तथा कम कैलोरी प्रदान करने वाला खाद्य पदार्थ है। इसमे पायी जाने वाली प्रोटीन में आवश्यक अमीनो अम्ल प्रचुर मात्रा में पाया जाता है जो कि वृ़ध्दि और विकास के लिए अत्यन्त उपयोगी है ताजे मशरुम में पाये जाने वाला प्रोटीन, दूघ के प्रोटीन के बराबर होता है व अत्यधिक सुपाच्य होता है। इसके साथ ही यह विटामिन व खनिज लवण का अच्छा स्त्रोत है। मशरुम में वसा कम व प्रोटीन ज्यादा होता है। अतः यह ह्रदय रोगियो के लिए उपयोगी है। इसमे स्टार्च नहीं होता यह डायबिटीज के मरीजो को फायदा करता है। यह वैक्टीरिया से लड़ले की क्षमता रखता है। तथा ट्यूमर के वृ़ध्दि को रोकता है। चावल व गेहूँ अपेक्षा मशरूम से शरीर को कम कैलोरी प्राप्त होती है, इसलि‍ए यह मोटापा नहीं बढ़ाता है। इसमें शर्करा एवं स्टार्च कम होता है इस कारण इसे ‘डिलाइट आॅफ डाइबेटिक‘ कहा जाता है। इसमें कोलेस्ट्रोल बिल्कुल नहीं होता है  अतः यह दिल के मरीज के लिए काफी अच्छा होता है। मशरूम मे उपस्थित लौह  तत्व पूरी तरह शरीर में उपलब्ध होने की अवस्था  में होते हैं जिससे यह रक्ताल्पता (एनीमिया) में बहुत फायदेमंद होते है। इसमें सोडियम व पोटाशियम का अनुपात अधिक होने के कारण उच्च...