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ति‍लहनी फसलों में गंधक की कमी  Sulphur is an essential nutrient element for plant as well as animal kingdom. It often accumulates in areas with volcanic activity, and mostly found in organic form in soils. Though S is a secondary nutrient element, its uptake is 9-15% of N uptake and similar to that of P uptake. Crucifers are found to have much more requirement of S than other crops primarily because of oil production and other essential S containing volatile compounds. Sulphur deficiency is wide spread across the world soils (Scherer, 2009). Intensification of agriculture with high yielding varieties and multiple cropping coupled with use of high analysis sulphur free fertilizers along with restricted or no use of organic manures have accrued in depletion of soil sulphur reserve. Apart from that the reduction of sulphur dioxide emission from power plants and various industrial sources, the decreasing use of sulphur containing fungicides and pesticides and also injudicious use of irrigation water are the most important reasons for sulphur deficiency. Importance of Sulphur in Oilseed production: The importance of sulphur in oilseed production is obvious because of the following reasons- Required for the synthesis of sulphur containing amino acids methionine (21%), cysteine (26%) and cystine (27%), which are essential components of protein. Approximately 90% of plant sulphur is present...

Importance of sulfur in oilseed crops तिलहनी फसलें भारतीय आहार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहीं है।  इसका उत्पादन लगभग 24 मिलियन टन हो रहा है। तिलहन फसल के लिए संतुलित उर्वरक का प्रयोग आवश्यक है, जिसमें नत्राजन, फास्फोरस, पोटाश, गंधक, जिंक व बोरान तत्व अति आवश्यक है।  गत वर्षों में सन्तुलित उर्वरकों के अन्तर्गत केवल नत्राजन, फास्फोरस एवं पोटाश के उपयाेग पर बल दिया गया।  सल्फर के उपयोग पर विशेष ध्यान न दिये जाने के कारण मृदा के नमूनों में 40 प्रतिशत गंधक (सल्फर) की कमी पाई गई।  आज उपयोग में आ रहे गंधक रहित उर्वरकों जैैसे यूरिया, डी0ए0पी0, एन0पी0 के0 तथा म्यूरेट आफ पोटाश के उपयोग से गंधक की कमी निरन्तर बढ रही है।  गंधक की कमी मुख्यतः निम्न कारणों से भूमि के अन्दर हो जाती है, जिसकी तरफ कृषकों का ध्यान नहीं जाता।  भूमि में सन्तुलित उर्वरकों का प्रयोग न करना । लगातार विभिन्न फसलों द्वारा गंधक जमीन में लेते रहने व सल्फर रहित उर्वरकों के प्रयोग में इन तत्वों की कमी हो जाती है। ऐसे उर्वरकों का उपयोग जिसमें बहुत कम या न के बराबर सल्फर का होना। जहाँ अकार्बनिक खादें प्रयोग में नहीं आती है, वहाँ पर भी सल्फर की कमी का होना। हाल ही में तोड़ कर विकसित की गई भूमि या हल्क गठन वाली बलुई मिटटी में, जहाँ निक्षालन द्वारा पोषक तत्वों...

सूरजमुखी की उन्‍नत किस्‍में  Varieties प्रजाति Developed By विकसित की Average yield औसत उपज Characters गुण श्रेष्‍ठा NSFH-36 Nuziveedu Seeds 8 से 12 कुं/एकर फसल अवधि 88-93 दिन. सिंचित अवस्‍था में उत्‍पादन 8-12 q/acre तथा असिंचित अवस्‍‍था में 4-6 q/acre . पौधे की औसत लम्‍बाई 175-190 cm. Oil content 42-44%. Suitable for rabi, kharif and summer seasons. आर्ल्‍टनेरिया के प्रति सहनशील किस्‍म है। फूल पकने पर नीचे झुकजाता है जिससे पक्षियों का हमला कम होता है चित्रा Chitra JK Seeds, Hyderabad 8 से 10 कुं/एकर Duration 95-100 days in kharif and 100-105 days in rabi,Plant hight 165-170 cm. Oil content 38-40% सूर्या Surya JK Seeds, Hyderabad 9-12 कुं/एकर Duration 90-95 days in kharif and 95-100 days in rabi,Plant hight 160-175 cm. Oil content 40-42% JK 236 JK Seeds, Hyderabad - Duration 85-90 days, Oil content 42-44% एच.एस.एफ.एच.848 HSFH-848 चै.चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय,हिसार 22-25 किवंटल/हैक्ट इसके दानों में तेल की मात्रा 40 प्रतिशत होती है यह किस्म पकने में 95-100 दिन लेती हैं पकने से पहले इसे छत्ते नीचे की ओर झुक जाते हैं ताकि पक्षियों का कम नुकसान होता है। यह किस्म सभी प्रकार की बीमारियां के प्रति रोगरोधी है। हरियाणा सूरजमुखी नं.1 EC68415c    8  कुं/एकर  यह उन्नत किस्म समान रूप से पकती है इसकी औसत पैदावार 8 किवंटल प्रति एकड़ होती है तथा यह पकने में 90 दिन लेती है। पी.एच.एच.1962  पंजाब कृषि विश्वविद्यालय  8.2 किवंटल/एकड यह किस्म वर्ष 2015 में विकसित की गई यह किस्म पकने में 99 दिन की होती...

 सोयाबीन की उन्‍नत किस्‍में Varieties कि‍स्‍में Production पैदावार (कु/हैक्‍टे) उपयुक्‍त क्षेत्र एस-335 25-30 मध्‍य पूर्व व दक्षि‍ण क्षेत्र के लि‍ए उपयुक्‍त। 95 से 100 दि‍न मे पकती है पी के 1042 30-35 उत्‍तर भारतीय क्षेत्र के लि‍ए उपयुक्‍त। 110 से 119 दि‍न मे पकती है पी के 1029 25-30 दक्षि‍ण क्षेत्र के लि‍ए उपयुक्‍त। 90 से 95 दि‍न मे पकती है वी एल एस 47 25-30 उत्‍तर पहाडी क्षेत्र के लि‍ए उपयुक्‍त। 122 से 175 दि‍न मे पकती है एन आर सी 37 35-40 मध्‍य क्षेत्र व महाराष्‍ट्र के लि‍ए उपयुक्‍त। 96 से 101 दि‍न मे पकती है पी के 1092 30-35 उत्‍तर प्रदेश के सभी क्षेत्रो के लि‍ए उपयुक्‍त। 118 से 125 दि‍न मे पकती है एस-93-05 20-25 मध्‍य प्रदेश, उत्‍तर पश्‍चि‍मी महाराष्‍ट्र, राजस्‍थान, बुन्‍देलखण्‍ड व उत्‍तर प्रदेश के लि‍ए उपयुक्‍त। 90 से 95 दि‍न मे पकती है हरि‍त सोया 20-25 उत्‍तर पहाडी क्षेत्र के लि‍ए उपयुक्‍त। 108 से 130 दि‍न मे पकती है एम ए यू एस 2 25-30 दक्षि‍ण क्षेत्र के लि‍ए उपयुक्‍त। 105 से 110 दि‍न मे पकती है ईदरा सोया 9 25-30 मध्‍य प्रदेश व छत्‍तीसगढ क्षेत्र के लि‍ए उपयुक्‍त। 106 दि‍न मे पकती है पी के 1024 25-30 उत्‍तर क्षेत्र के लि‍ए उपयुक्‍त। 115 से 118 दि‍न मे पकती है Pusa 9712 20 Suitable for cultivation in NCR Delhi under irrigated conditions Pusa 9814 22.5 Suitable for cultivation in North Planin Zone under irrigated conditions     ...

Sowing time and Seed Rate of Oilseeds  फसल (crop) बुआई का सही समय (Sowing time) बीज की मात्रा (किग्रा/हैक्‍ट) Seed rate (kg/ha)  राई या सरसों (Rai/ Raya/ Indian mustard/ Brown mustard/ Laha) 30 सितंबर से 15 अक्‍तुबर  5-6 तोरिया/ लाही/ लहिया (Toria/ Lahi) 1 सितंबर से 15 सितंबर  4-5 सरसों (पीली, भूरी) (Yellow sarson, Brown sarson) 25 सितंबर से 15 अक्‍तुबर  5-6 तारामीरा (Taramira/ Rocket salad) अक्‍तूबर  5-6 तिल (Sesamum/ Sesame) जून - जुलाई (खरीफ)  3-5 मूंगफली (Ground nut) मध्‍य जून - जुलाई  70-75 अलसी (Linseed) अक्‍तूबर से नवम्‍बर  30-40 सोयाबीन (Soybean) मध्‍य जून से मध्‍य जुलाई  70 से 75 अरण्‍डी (Castor) 15 जून से मध्‍य जुलाई  15 सूरजमुखी (Sunflower) बसंत: 20 फरवरी से 10 मार्च, खरीफ: जुलाई से अगस्‍त आरम्‍भ, रबी: नवम्‍बर 6 से 7 संकर किस्‍में ...