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धान के प्रमाणित बीज उत्पादन की उत्रत तकनीक धान एक महत्वपूर्ण फसल होने के साथ-साथ भोजन का प्रमुख श्रोत्र है जिससे मनुष्य अपने शरीर के लिए कार्बोहाड्रेट की अधिकांशतः भाग की पूर्ति करता है। इसकी खेती भारतवर्ष के अधिकांशतः प्रदेषों में की जाती है। धान की अच्छी उपज लेने के लिए आनुवंशिक रूप से गुणवकतापर्ण बीज का होना बहुत जरूरी होता है। शुद्व आनुवांशिक बीज उत्पादन के लिए बुआई से लेकर भंडारण तक बहुत सारी बातों का ध्यान रखना चाहिए तभी व्यवसायी स्तर पर बीज उत्पादन कर सकते हैं। थोङी सी भूल होने पर बीज की आनुवंशिक गुण खराब हो सकते हैं इसके बहुत से कारण हैं जैसेः विकाशात्मक भिन्नताः इन सभी विषमताओं से बचने के लिए धान के फसलों का बीज उत्पादन उसी प्रदेशों एवं जगहों पर करना चाहिए जहाँ के लिए वह किस्में विकसित की गई हों। ऐसा नहीं करने पर जलवायु परिवर्तन कें चलते उन किस्में में थोङी सी भिन्नता आ सकती है। यांत्रिक मिश्रणः यह आनुवंशिक मिश्रण का प्रमुख श्रोन्न है। यदि किसान बुआई। कटाई और गहाई के समय यंन्नो की सफाई अच्छी तरह से नहीं करते हैं तो इससे भी बीज की गुणवता खराब हो सकती है। इसीलिए किसानों तथा अन्य जो धान के प्रमाणित बीज का उत्पादन करते हैं उन्हें यंन्नों तथा मङाई वाले जगहों को अच्छी तरह से...

Causes of mysterious dwarfism in paddy and its adverse effect on production धान, खरीफ मौसम में उगाए जाने वाले मुख्य खाद्यान्नों में से एक है, जिसकी बुवाई जून-जुलाई में होती है और अक्टूबर में कटाई होती है। डाउन टू अर्थ की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वर्ष की तुलना में 2022 में धान का रकबा 13.27 प्रतिशत कम है, जबकि देश के अधिकांश हिस्सों में धान की बुवाई जुलाई के अंत तक पूरी हो गई थी। केंद्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 29 जुलाई, 2022 तक लगभग 23.15 मिलियन हेक्टेयर (mha) धान बोया गया था, जो इसी अवधि के दौरान 2021 में बोए गये धान के रकबे की तुलना में 3.55 मिलियन हेक्टेयर कम है। 2022 के लिए धान का लक्ष्य क्षेत्र 41.31 मिलियन हेक्टेयर अधिक था। कम बुवाई क्षेत्र का प्राथमिक कारण, जून के महीने में मानसून की विफलता और देश के अधिकांश हिस्सों में जुलाई में इसकी सुचारू प्रगति है। भारतीय मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, कुल मिलाकर, मानसून 31 जुलाई तक आठ प्रतिशत 'सामान्य से ऊपर' रहा है। इस से पहले की किसान बारिश की मार से ऊपर उठ पाते, धान उत्पादको को, धान में रहस्यमयी बौनापन की समस्या का सामना करना पड़ा और यह समस्या पंजाब और हरियाणा से आ रही  है, जो देश की हरित क्रांति...

False smut (Villosiclava virens) disease an emerging threat in rice crop धान (ओरिज़ासैटिवा) कई प्रकार के कवक, जीवाणु और वायरल रोगजनकों से ग्रसित हो जाता है। वर्तमान जलवायु परिवर्तन परिदृश्य में धान की फसल को नई बीमारियों की कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है जो अन्यथा आर्थिक रूप से नुक्सान नहीं पंहुचा रहे थे। फाल्स स्मट, एक कवक रोग, जो उस्टिलागिनोइडिया विरेन्स (कुक) ताकाहाशी [टेलोमॉर्फ: विलोसिकलावा विरेन्स (नाकाटा) तनाका और तनाका] के कारण होता है। फाल्स स्मट धान की खेती के लिए एक संभावित खतरे के रूप में उभर रहा है, जो पूरे धान के दाने को एक काले रंग की बीजाणु गेंद में बदल देता है। रोग की छिटपुट प्रकृति के कारण, भारत में इस बीमारी के प्रबंधन के लिए अतीत में जोर नहीं दिया गया था। दक्षिणी भारत के कुछ हिस्सों में इसे "लक्ष्मी" रोग के रूप में जाना जाता है और इसे बंपर फसल का प्रतीक माना जाता था, लेकिन वर्ष 2000 के बाद से इसे एक महामारी रोग के रूप में रिपोर्ट किया गया है फाल्स स्मट एक प्रमुख उत्पादन बाधा बन गया है। भारत में यह रोग उच्च उपज और संकर धान की किस्मों को अपनाने, रासायनिक उर्वरकों (उच्च नाइट्रोजन वाले) पर भारी निर्भरता के साथ धान की गहन खेती के तरीकों और जलवायु परिस्थितियों में...