04 Dec धान की कटाई, मड़ाई, सुखाई एवं भण्डारण की वैज्ञानिक विधियॉं।
Scientific methods of harvesting, threshing , drying and storage of paddy विश्व में भारत धान उत्पादन मे चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है। देश मे लगभग 50 प्रतिशत से अधिक लोग चावल का उपयोग करते हैं। धान की फसल मे कटाई से लेकर भंडारण तक लगभग 10 प्रतिशत धान की क्षति हो जाती है। कटाई एवं इसके उपरांत धान में होने वाली क्षति को कम करने की सबसे अधिक आवश्यकता है। यह पाया गया है कि कटाई, मड़ाई, सुखाना एवं भण्डारण के दौरान क्षति अधिक होती है। इस क्षति से बचने के लिए वैज्ञानिक विधियों का प्रयोग करना जरूरी है। इन्हीं कुछ विधियों का विवरण यहां प्रस्तुत किया गया है। धान की कटाई:- धान की कटाई श्रमिको या शक्ति चालित यंत्रो जैसे रीपर/ कंबाइन हारवेस्टर आदि द्वारा की जाती है। श्रमिको द्वारा कटाई करने में हस्तचालित उपकरणों जैसे कि हंसिया का उपयोग किया जाता है। हंसिया द्वारा कटाई में फसल की क्षति काफी कम होती है एवं धान का पुआल भी अधिक मात्रा में मिलता है। पुआल का उपयोग पशु आहार, ईंधन एवं रसायन निर्माण में किया जाता है। अतः पुआल संरक्षण से किसानों की आय बढ़ जाती है। परन्तु हंसिया से कटाई काफी मंद गति से होती है जिससे कटाई का खर्च अधिक आता है। शक्ति चालित मशीनों में रीपर एवं ट्रैक्टर चालित कम्बाइनर...