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5 Major pests of mustard crop and their control तिलहन की फसलों में सरसों (तोरिया, राया और सरसों) का भारत वर्ष में विशेष स्थान है तथा यह हरियाणा प्रदेश में रबी की मुख्य फसल है। सरसों में अनेक प्रकार के कीट समय-समय पर आक्रमण करते हैं लेकिन 4-5 कीट ही आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इसलिए यह अति आवश्यक है कि इन कीटों की सही पहचान कर उचित रोकथाम की जाएं । इस लेख में सरसों के कीटों के लक्षण व उनकी रोकथाम के उपाय दियें गए है  1. सरसों में बालों वाली सुण्डी (कातरा) इस कीट की तितली भूरे रंग की होती है, जो पत्तियों की निचली सतह पर समूह में हल्के पीले रंग के अण्डे देती है। पूर्ण विकसित सुण्ड़ी का आकार 3-5 सैं. मी. लम्बा होता है। इसका सारा शरीर बालों से ढका होता है तथा शरीर के अगले व पिछले भाग के बाल काले होते है। इस सुण्डी का प्रकोप अक्तूबर से दिसम्बर तक, तोरिया की फसल में अधिक होता है तथा कभी-कभी राया व सरसों की फसलें भी इसके आक्रमण की चपेट में आ जाती है । नवजात सुण्डियां आरम्भ में, 8-10 दिन तक, समूह में पत्तियों को खाकर छलनी कर देती है बाद में अलग-अलग होकर पौधों की मुलायम पत्तियों, शाखाओं, तनों व फलियों की छाल आदि को खाती...