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Under relay farming method, before the harvesting of base crop, the next crop is sown in the field in the standing condition of base crop and the subsequent crop is called Utera crop. With the use of relay farming, the farmer brother is able to harvest crops with limited resources (land, time, water, labor etc.) and less cost. अधिक आय के लिए गेहूँ में खरबूज कि रिले खेती  सब्जियों का भारतीय कृषि में महत्वपूर्ण स्थान है। ये बहुत सी दूसरी फसलों की तुलना में प्रति ईकाई क्षेत्र में अधिक पैदावार देती है और कम समय में तैयार हो जाती है। भारत में खीरा वर्गीय कुल की लगभग 20 प्रकार की सब्जियों की खेती की जाती है। इनमें धीया/ लौकी, तोरी, करेला, खीरा, तरबूज, खरबूज, ककड़ी, कद्दू/ सीताफल, चप्पनकद्दृ, टिण्डा, परवल, फुट, आदि मुख्य है। ये सभी बेलवाली फसलें होती हैं जो कम कैलोरी व सरलता से पचने वाली होने के साथ-साथ विटामिन्स, अमीनो अम्ल एवं खनिज लवणों का अच्छा स्त्रोत है। उत्तर भारत के मैदानी भागो में साघारणत्या आलू, गाजर, मटर, सरसों, तोरिया आदि फसल लेने के उपरातं अधिकतर किसान भाई जनवरी के अंत से लेकर मार्च के प्रथम पखवाड़े तक खीरा-ककड़ी वर्गीय सब्जियों की बुवाई बीज द्वारा करते है तथा फसल की पैदावार अप्रैल से जून तक चलती है। दिसंबर या जनवरी माह में...

Need and importance of relay crop in India वर्तमान मे देश की बढ़ती जनसंख्या को भोजन उपलब्ध कराने के लिये सघन खेती ही एकमात्र विकल्प बनता जा रहा है, क्योकि बढ़ती जनसंख्या के दबाव के कारण खेती की भूमि अन्य कार्यो के लिये परिवर्तित हो रही है एवं खेती का रकबा बढ़ाना अब संभव प्रतीत नही होता है। देश मे बहुत से क्षेत्र ऐसे है जहां की कृषि पूरी तरह से वर्षा पर आधारित है तथा सिंचार्इ के सीमित साधन के कारण ही रबी मौसम में खेत खाली पड़ी रहती है अत: ऐसे क्षेत्रों के लिए सघन खेती के रूप मे उतेरा खेती एक महत्वपूर्ण विकल्प साबित हो सकती है। उतेरा खेती का मुख्य उद्देश्य खेत में मौजूद नमी का उपयोग अगली फसल के अंकुरण तथा वृद्धि के लिए करना है। इस प्रकार की खेती मे किसी भी प्रकार की कर्षण क्रियाये नही की जाती है। क्या है उतेरा खेती:- यह फसल उगाने की वह पद्धति है जिसमे दूसरी फसल की बुंवार्इ, पहली फसल के कटने के पूर्व ही कर दी जाती है। खेत का चुनाव:- उतेरा खेती के लिए कन्हार या मटियार दोमट जैसी भारी मृदा वाली खेत उपयुक्त रहती है। अत: मध्यम तथा निचली (बहरा) भूमि का चुनाव करना चाहिए। भारी मृदा में जलधारण क्षमता अधिक होती है साथ ही काफी लम्बे समय तक इस मृदा में नमी बनी रहती है।...

Inter relay technique for Cucumber cultivation in wheat crop सब्जियों का भारतीय कृषि में महत्वपूर्ण स्थान है। ये बहुत सी दूसरी फसलों की तुलना में प्रति ईकाई क्षेत्र में अधिक पैदावार देती है और कम समय में तैयार हो जाती है। भारत में खीरा-ककड़ी वर्गीय कुल की लगभग 20 प्रकार की सब्जियों की खेती की जाती है।  इनमें धीया/ लौकी, तोरी, करेला, खीरा, तरबूज, खरबूज, ककड़ी, कद्दू /सीताफल, चप्पनकद्दृ, टिण्डा, परवल आदि मुख्य है। ये सभी बेलवाली फसलें होती हैं जो कम कैलोरी व सरलता से पचने वाली होने के साथ-साथ विटामिन्स, अमीनो अम्ल एवं खनिज लवणों का अच्छा स्त्रोत है । ये सब्जियां उत्तर भारत के मैदानी भागों में फरवरी से जून तथा जुलाई से नवबंर तक उगाई जाती है। उत्तर भारत में गैंहू, की फसल एक बड़े भू-भाग में उगाई जाती है। मार्च-अप्रैल माह में गैंहू की कटाई उपरांत अधिकाशं खेत खाली रहते है जिनमें जून-जूलाई माह में खरीफ फसल की बुवाई की जाती है। मार्च-अप्रैल से जून-जूलाई तक 80-90 दिन की इस अवधि के दौरान किसान भाई गैहूं में खीरा-ककड़ी वर्गीय सब्जियों की रिले फसल उगाकर अपनी आमदनी बढा सकते है। उत्तर भारत में साघारणत्या आलू , मटर, सरसों, तोरिया आदि फसल लेने के उपरातं अधिकतर किसान जनवरी के अंत से लेकर मार्च के प्रथम पखवाडे तक खीरा-ककड़ी वर्गीय सब्जियों...