Agriculture Knowledge for Everyone

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Development of Hilly Agriculture With Protected Agriculture Technology पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि के तौर तरीके मेैदानी भागों से थोड़ा अलग है। जिसका मुख्य कारण वातावरण के साथ-साथ अन्य कारकों का अलग होना है जैसे की समतल भूमि का आभाव, खड़ी चढ़ाईया, सिचाई के पानी की कमी इत्यादि जो काश्तकारी को और विषम बना देती हैं। ऐसे हालातों में अनाजों या अन्य फसलो की अपेक्षा सब्जियों का उत्पादन अधिक लाभप्रद है क्योकि इनसे हमें कम भूमि से अधिक शुध्द लाभ मिलता है। इसी को ध्यान में रखतें हुए संरक्षित खेती का विकास किया गया हैं जिससे तापमान, आद्रता, सूर्य का प्रकाश एवं हवा के आगमन में फसलों की आवश्यकता के अनुसार परिवर्तन करके फसलो की उत्पादकता के साथ-साथ गुणवत्ता भी बढ़ाई जा सकती है। इस तकनीक के उपयोग से साल भर बेमौसमी सब्जियों का उत्पादन आसान हो जाता हैं पर्वतीय क्षेत्रों में जाड़ों के मौसम में तापमान इतना कम हो जाता है कि पौधो की बढ़वार लगभग रूक सी जाती है। लेकिन इन्ही पौधो को अगर पालीहाउस के अन्दर लगाते है तो इससे पौधो की बढ़वार संतोषजनक रहती है।  यह तकनीक छोटे, सीमांत एवं बड़े किसानो सभी के लिये फायदेमंद है और संरक्षित खेती पर्वतीय कृषि विकास को अधिक मजबूत बनाने में कारगर सिध्द हो सकती हैं। संरक्षित वातावरण की उपयोगिताएं एंव विशेषताऐं :- बेमौसमी सब्जियों की नर्सरी तैयार...

भारत में मूली का प्रयोग सलाद व सब्‍जी के रूप में पूरे साल होता है परन्‍तू इसकी कोई भी एक किस्‍म सारे साल नही उगाई जा सकती। पूसा संस्‍थान दिल्‍ली द्वारा विकस्ति पॉच किस्‍मो को उगाकर, उत्‍तरी भारत के मैदानों में पूरे साल मूली का उत्‍पादन किया जा सकता है। Varieties Sowing time Availability time Yield 1. पूसा देशी (Pusa Desi) अगस्‍त से अक्‍टूबर सितम्‍बर से नवम्‍बर 175 कि./है. 2. पूसा रश्मि (Pusa Rashmi) सितम्‍बर से नवम्‍बर अक्‍टूबर से दिसम्‍बर 200 कि./है. 3. जापानीज वहाईट (Japanes White) अक्‍टूबर से दिसम्‍बर नवम्‍बर से जनवरी 250 कि./है. 4. पूसा हिमानी (Pusa Himani) दिसम्‍बर से मार्च जनवरी से अप्रैल 250 कि./है. 5. पूसा चेतकी (Pusa Chetki) फरवरी से अगस्‍त मार्च से सितम्‍बर 170 कि./है. श्रोत: पूसा कृषि विज्ञान मेला शाकिय फसले संभाग, भाकृअसं, नई दिल्‍ली ...

Round the year ultivation of Cauliflower crop in Northern plains of India पूसा संस्‍थान दिल्‍ली द्वारा विकसित फूलगोभी की किस्‍मो को उगाकर, उत्‍तरी भारत के मैदानों में पूरे साल फूलगोभी का उत्‍पादन किया जा सकता है। परिपक्‍कता समूह किस्‍में बुआई समय परिपक्‍वता समय उपज अगेती-1 पूसा अर्ली सिंथेटिक, पूसा मेघना, पूसा कार्तिक संकर मई अंत तक अगस्‍त से अक्‍टूबर अंत 110 कि./है. अगेती-2 पूसा कात्‍तकी,पूसा दीपाली जून अक्‍टूबर से नवम्‍बर 110,120 कि./है. मध्‍य अगेती पूसा शरद,पूसा हाईब्रिड-2, इम्‍प्रूवड जापानीज जुलाई से अगस्‍त नवम्‍बर से दिसम्‍बर 250,200,225 कि./है. मध्‍य पछेती पूसा पौशजा,पूसा मुक्‍ती, पूसा सिंथेटिक, पूसा शुभ्रा अगस्‍त अंत दिसंबर से जनवरी 325,320,225,220 कि./है. पछेती पूसा स्‍नोबाल-1,पूसा स्‍नोबाल के-1, पूसा स्‍नोबाल के -25 सितम्‍बर से अक्‍टूबर जनवरी से मार्च 225,220 कि./है.   श्रोत: पूसा कृषि विज्ञान मेला शाकिय फसले संभाग, भाकृअसं, नई दिल्‍ली...

मूली फसल उगाने के लि‍ए उन्‍नत किस्‍में    Varieties प्रजाति Developed By विकसित की Average yield औसत उपज( कुं/है) Characters गुण पूसा चेतकी (Pusa Chetki) IARI 250-300 इसकी जडें शीघ्र तैयार होने वाली मध्‍यम लम्‍बाई की सफेद, तीखी व सतह चिकनी होती है। गर्मी व बरसात दोनो मौसम में बुआई के लिए उपयुक्‍त। बुआई के 35-40 दिनो बाद तैयार हो जाती है। बुआई का उपयुक्‍त समय मध्‍य अक्‍टूबर से नवम्‍बर तक । पूसा हिमानी (Pusa Himani) IARI -  जडें अधिक लम्‍बी, कम तीखी, सफेद रंग की चिकनी होती है। देर से बुआई के लिए उपयुक्‍त । बुआई के 35 से 40 दिनो में तैयार हो जाती है। बुआई का उचित समय अक्‍तूबर माह है। बोनस आर-33 (Bones R-33) Sungrow Seeds -  यह चेतकी समूह की संकर किस्‍म है। मूली का उपरी सिरा मध्‍यम मोटा, लम्‍बाई 28 से 30 से.मी. नीचे से नुकीली होती है इसका गूदा रवेदार तथा कम तीखा व सफेद रंग की चिकनी सतह होती है। बुआई के 30-35दिनो बाद तैयार हो जाती है। बुआई का उपयुक्‍त समय मार्च से सितम्‍बर है। मिश्रित खेती के लिए उत्‍तम शीतल आर-50 (Shital R-50) Sungrow Seeds -  मूली की लम्‍बाई 25 से 30 से.मी.नीचे से नुकीली होती है इसका गूदा रवेदार तथा कम तीखा व सफेद रंग की चिकनी रतह होती है। पत्तियों का रंग हरा होता है। बुआई के 50-52 दिनो बाद तैयार हो जाती है। शीत ऋतु के लिए उपयुक्‍त। उत्‍तर...