16 Dec जौ के गुणवत्तायुक्त बीज उत्पादन की उन्नत तकनीकियाँ
Quality Seed Production technologies in Barley जौ (होर्डियम वल्गेयर एल.) एक महत्वपूर्ण खाद्यान्न फसल है जिसका स्थान भारत मे चावल, गेहूँ, एवं मक्का के बाद आता है। जौ का खाद्य, चारा और पोषण सुरक्षा मे बहुत महत्वपूर्ण योगदान है। जौ की खेती प्रतिकूल जलवायु मे भी आसानी से की जा सकती है। रबी मौसम की यह फसल लवणीय, शुष्क मृदा मे तथा सीमान्त भूमि पर भी उगाई जा सकती है। जौ की खेती हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश उत्तराखण्ड, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश में करते है। जौ की चारे की श्रेष्ठ गुणवत्ता होती है, इस फसल दोबारा उगने की क्षमता के साथ साथ अनाज के रूप में पौषणिक महत्व होता है जिसके कारण भारत मे किसानो द्वारा इस फसल को बहुउद्देश्य रूप में उगाया जाता है। इनके अलावा जौ एक औद्योगिक फसल के रूप मे भी माल्टिंग और बीयर बनाने के उद्देश्य से पंजाब, हरियाणा, राजस्थान मे उपयोग मे लायी जाती है। भारतीय गेहूँ एवं जौ अनुसंधान संस्थान, करनाल, चौ. चरण सिह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार, राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान दुर्गापुरा, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय वाराणसी, चन्द्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कानपुर, आचार्य नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, अयोध्या एवं अन्य कृषि विश्वविद्यालय, द्वारा जौ की विभिन्न किस्में विकसित की गयी है। अखिल भारतीय समन्वित गेहूँ एवं जौ परियोजना विभिन्न उपभोक्ताओं को...