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Spirulina cultivation  for More income in low investment यह वास्तव में एक जलीय सूक्ष्म जीव है जिसे अक्सर कवक परिवार के रूप में जाना जाता है, लेकिन तथ्य की भाति जीवाणु परिवार से संबंधित है।भारत में स्पिरुलिना की खेती विशेष रूप से तमिलनाडु राज्य में सुनिश्चित बाजार और नियमित आय के कारण बहुत तेज गति से बढ़ रही है। स्पिरुलिना एक ऐसा पदार्थ है जिससे दुनिया काफी अनजान है, लेकिन पोषक तत्वों और दवाओं में उपयोग के कारण इसकी खेती में वृद्धि हुई है। स्पिरुलिना अपने बेहतरीन औषधीय गुणों के कारण सुपरफूड और भविष्य के भोजन में से एक के रूप में जाना जाता है। यह प्रोटीन, एंटीऑक्सिडेंट और स्वस्थ जीवन शैली के लिए आवश्यक कई विटामिन और खनिजों से पूरी तरह भरा हुआ है। स्पिरुलिना के उपयोग और स्वास्थ्य लाभ स्पिरुलिना का उपयोग कई दवाओं और सौंदर्य प्रसाधनों के निर्माण में किया जाता है। स्पिरुलिना के कुछ स्वास्थ्य लाभ निम्नलिखित हैं। स्पिरुलिना प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है। यह पाचन में सुधार करता है। यह महिलाओं और बच्चों के लिए अच्छा है, क्योंकि इसमें आसानी से अवशोषित होने वाली आयरन की खुराक होती है। यह बीटाकैरोटीन का एक उत्कृष्ट स्रोत है इसलिए इसे एक अच्छा एंटीऑक्सीडेंट और आंखों के स्वास्थ्य के लिए अच्छा माना जा सकता है। मांसपेशियों के निर्माण के लिए अच्छा है। स्पिरुलिना में एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होते...

अजोला की खेती और इसका देशी दुधाारु जानवरो के चारे के रुप मे ऊपयोग  अब तक अजोला का इस्तेमाल मुख्यत: धान में हरी खाद के रूप में किया जाता था, लेकिन अब इसमें छोटे किसानों हेतु पशुपालन के लिए चारे हेतु बढती मांग को पुरा करने की जबरदस्त क्षमता हैं।  अजोला खेती की प्रक्रिया किसी छायादार स्थान पर पशुओं की संख्या के अनुसार किसान 1.5 मीटर चौडी, लम्बाई आवश्यकतानुसार (3 मीटर) और 0.30 मीटर गहरी क्यारी बनाये। क्यारी को खोदकर या ईंट लगाकर भी बनाया जा सकता हैं। क्यारी में आवश्यकतानुसार सिलपुटिन शीट को बीछाकर ऊपर के किनारों पर मिट्टी का लेप कर व्यवस्थित कर दें। सिलपुटिन शीट को बिछाने की जगह पशुपालक पक्का निर्माण कर क्यारी तैयार कर सकते है। 100-120 किलोग्राम साफ उपजाऊ मिट्टी की 3 इंच मोटी मिट्टी की परत क्यारी में बना देवें। नोट- आज कल बाजार में कृत्रिम अजोला टब भी उपलब्ध हैं, किसान चाहे तो उसे खरीद सकते हैं। अब इसमें 5-10 सेमी तक जलस्तर आ जाये इतना पानी क्यारी में भरते हैं। 5-7 किलो गोबर (2-3 दिन पुराना) 10-15 लीटर पानी में घोल बनाकर मिट्टी पर फैला दे, यदि जानवर गोबर की घोल वाले अजोला को नहीं खाते हैं, तो इसके लिए रासायनिक खाद भी तैयार करके डाला जाता हैं, जैसे- एसएसी- 5 किलो मैग्नीशियम सल्फेट- 750 ग्राम पोटाश- 250 ग्राम इनका मिश्रण तैयार करके,...

Cultivation Technique of Beneficial Dragon Fruit (pitaya or pitahaya) ड्रैगन फ्रूट सेहत के लिए बहुत फायदेमंद और पोषक तत्त्वों से भरपूर फल माना जाता है। ड्रैगन फ्रूट का फल अंदर से काफी मुलायम और बहुत टेस्टी होता है। केक्टस की नस्ल से निकलने वालेे  ड्रैगन फ्रूट में हमारे शरीर के लि‍ए अच्छे प्रोटीन की काफी मात्रा उपलब्ध रहती है। यह एक अनोखा फूल है जो रात के समय जयादा तेजी बढ़ता है और इसी लि‍ए इसका एक फेमस नाम  क्वीन ऑफ़ द नाईट भी है । ड्रेगन फ्रूट मुख्य रूप से थाइलैंड, वियतनाम, इज़रायल और श्रीलंका में लोकप्रिय है। बाजार में 150 -200 रु कि‍लो तक दाम मिलने की वजह से हाल के दिनों में भारत में भी इसकी खेती का प्रचलन बढ़ा है। कम वर्षा वाले क्षेत्र ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए उपयुक्त माने जाते हैं। ड्रैगन फ्रूट में औषधीय गुण भी होते हैं। इस फल में एंटी ऑक्सीडेंट की मात्रा ज्यादा पायी जाती है जो कई सारे रोगों से लड़ने में सहायता करता है। इस फल के सेवन से मधुमेह नियंत्रित होती है। शरीर में बढे हुए कोलेस्ट्रॉल को कम करता है। ड्रेगन फ्रूट के पौधे का उपयोग सजावटी पौधे के साथ साथ ड्रेगन फ्रूट के उत्‍पादन के लिए कि‍या जा सकता है।यह फ्रूट खाने में मुलायम होता है और हमें हमारे दैनिक जीवन में...

Spirulina (Arthro spira platensis) cultivation for low investment and high income स्पिरोलिना (ऑरथो स्पाइरा प्लैटेंसिस), एक नील हरि‍त शैवाल (Blue green algae) है। यह एक पौष्टिक प्रोटीन आहार पूरक है और इसका उपयोग कई दवाओं के निर्माण और सौंदर्य प्रसाधनों में भी किया जाता है। इसमें  प्रोटीन, एंटीऑक्सिडेंट्स, कई विटामिन और खनिज प्रचूर मात्रा पाए जाते है। स्वस्थ जीवन शैली के लिए यह एक सूपर फूड के रूप में जाना जाता है। कृषि में बढती लागत व कम रि‍टर्न के कारण कि‍सान की आय में नि‍रंतर गि‍रावट आ रही है। कि‍सान की आय को बढाने के लि‍ए स्‍पाईरूलि‍ना की खेती में बहुत संभावनाऐ नजर आती है। आजकल एक किलो सूखे स्पिर्युलिन पाउडर (Dry spirulina powder) का बाजार मुल्‍य लगभग 1000 रुपये के आसपास है। अत: स्पिरोलिना की खेती से कि‍सान कम निवेश करके, नियमित फसलों की तुलना में, अच्छी आय पा सकते है। स्पाइरुलिना की व्यावसायिक स्तर खेती, धीरे-धीरे भारत के कई हि‍स्‍सो में, विशेषकर तमिलनाडु में होने लगी है। भारत में मानसून अनि‍श्‍चि‍तता तथा फसल उत्‍पादो की बि‍क्री से जुडी समस्‍याओं के कारण भी कि‍सानो का रूझान स्‍पि‍रोलि‍ना की खेती की ओर जा रहा है क्‍योकि‍ स्‍पि‍रोलि‍ना के लि‍ए नि‍श्‍चि‍त बाजार है तथा ये नि‍यमि‍त आय देने वाली फसल है। स्पाइरुलिना का उत्‍पादन हालाकि‍ स्पाइरुलिना किसी भी सुविधाजनक आकार के सीमेंट या प्लास्टिक के...

Azolla production techniques and benefits of Azolla कृषि उत्पादों की कीमत में अनिश्चितता और कृषि आदानों की तेजी से बढ़ती लागत, भूजल स्तर में गिरावट के कारण कृषि लागत बढ़ गई है, यही कारण है पिछले कुछ वर्षो में पेशे के रूप में खेती के प्रति किसानों का आकर्षण कम हो रहा है। इस समस्या के समाधान के लि‍ए अजोला की खेती बहुत ही लाभकारी हो सकती है। अजोला एक महत्वपूर्ण  बहुगुणी फर्न  है जिसका उपयोग पशुओं, मछली एवं कुक्कुट के चारे के रूप में उपयोग किया जाता है और इसकी कास्त लागत भी बहुत कम (एक रुपय प्रति कि.ग्रा.)  होती है। अजोला  तेजी से बढ़ने वाली एक प्रकार की जलीय फर्न है,  जो पानी की सतह पर छोटे - छोटे समूह में सघन हरित गुच्छ की तरह तैरती रहती है। भारत में मुख्य रूप से अजोला की जाति अजोला पिन्नाटा पायी जाती है। यह  गर्मी सहन करने वाली किस्म है । अजोला की पंखुड़ियो में एनाबिना नामक नील हरित काई के जाति का एक सूक्ष्मजीव होता है जो सूर्य के प्रकाश में वायुमण्डलीय नत्रजन का यौगिकीकरण करता है और हरे खाद की तरह फसल को नत्रजन की पूर्ति करता है। अजोला की विशेषता यह है कि यह अनुकूल वातावरण में 5 दिनों में ही दो गुना हो जाता है। यदि इसे पूरे वर्ष बढ़ने दिया जाये तो 300 टन से भी अधिक सेन्द्रीय पदार्थ प्रति...