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Hybrid seed production of watermelon: a profitable business  तरबूज (Citrulus lanatus Thunb.) एक वर्षिय, उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय बेल फसल है। यह उभयलिंगाश्रयी होता है, अत: नर व मादा फूल अलग-अलग उत्पन्न होते है। फूल ज्यादातर एकल ही आता हैं। नर एवं मादा पुष्पो का खिलना प्रात: 6.00 बजे से शुरू होता है और 7.30 पर पूर्ण हो जाता है। परागकण स्फुटन पुष्पन से एक घंटे पहले शुरू होता है और 7.00  बजे तक जारी रहता है। इसमे प्राकृतिक परागण मधुमक्खी द्वारा होता है। उच्च तापमान पर वर्तिका द्रव सुखना शुरू हो जाता है। इसलिए फलन दर कम हो जाती है। संकर किस्मे: तरबूज की अनेकों संकर किस्मे वर्तमान मे उपलब्ध है। इनमे भारतीय उद्यानिकी अनुसंधान संस्थान से अर्का ज्योति, इंडो-अमेरीकन हाइब्रिड सीड कंपनी से मधु, मिलन एवं मोहिनी, नामधारी सीडस से एन.एस. 295, नन्हेमस सीड्स से खुशबू, मधुबाला, सितारा तथा नॉन यू सीड्स से किरण, मिथिला एवं मधुमिता विकसित की गई है।   तरबूज के लिए मृदा एवं जलवायु: तरबूज के लिए 6.5-7.0 पी एच वाली गहरी व अच्छे जल निकास वाली बलुई एवं बलुई दोमट मिट्टी अच्छी रहती है। यह उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में उगाया जाता है। बीज उत्पादन के लिए शुष्क क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाती है क्योकि इस क्षेत्र मे कीट एवं व्याधियों का प्रकोप कम होता है। पृथककरण दूरी : तरबूज एक...