Agriculture Knowledge for Everyone

trap Tag

Light Trap: An efficient IPM tool for farmers of Sipahijala, Tripura   समेकित नाशीजीव प्रबंधन (आईपीएम) किसानों के लिए एक प्रभावी नीति है | यह एक स्थायी संयंत्र संरक्षण रणनीति है जो पर्यावरण की दृष्टि से सुरक्षित, आर्थिक रूप से व्यवहार्य और किसान हितैषी है । उधाराण के तौर पर त्रिपुरा में सिपाहीजला में जहाँ किसान कई फसलों की खेती कर रहे हैं परन्तू इन फसलों पर कीटो के हमले के कारणवश किसानों को उपज में भारी नुकसान उठाना पड रहा है | इन प्रमुख कीटों की दीर्घकालिक रोकथाम या हानि को सांस्कृतिक, जैविक, भौतिक, यांत्रिक उपकरणों, रासायनिक कीटनाशकों के संयोजन के माध्यम से प्रबंधित किया जा सकता है| कीटों और कीटनाशकों के प्रदूषण से जोखिम को कम करने / पहचानने, प्रबंधन और त्वरित निदान के लिए ये हमारे लिए सहायक हैं । आईपीएम प्रबंधन के उपकरण और रणनीति समग्र आर्थिक नुकसान को कम करने में मदद करते हैं और पशु / मानव स्वास्थ्य और पर्यावरणीय नुकसान को भी कम करता है। और यह आर्थिक चोट स्तर (EIL) के नीचे इन कीटों की आबादी को भी कम करता है। लाइट ट्रैप, आईपीएम/ जैविक खेती उत्पादकों के लिए कीट प्रबंधन के लिए उपयोग किए जाने वाले प्रभावी आईपीएम उपकरणों में से एक है। यह व्यापक रूप से निगरानी, ​​कैप्चरिंग, कीड़ों को मारने और जैव विविधता अध्ययन...

जैविक खेती में नाशीजीव प्रबंधन के सुरक्षित उपाय  कृषि के व्यापारिकरण का हमारे वातावरण पर बहुत नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है । कृषि मे नाशीजीवों के प्रबन्धन हेतु उपयोग किए जाने वाले रसायन हमारे वातावरण, मिट्टी, पानी, हवा, जानवरों, यहाँ तक की हमारे शरीर में भी एकत्रित होते जा रहे है । रासायनिक उर्वरकों का कृषि उत्पादकता पर क्षणिक प्रभाव पड़ता है जबकि हमारे पर्यावरण पर अधिक समय तक नकारात्मक प्रभाव बना रहता है जहाँ वे रीसाव एवं बहाव के द्वारा भूमिगत जल तथा अन्य जल संरचनों को प्रदूषित करते हैं । ये सभी प्रदूषण मानव स्वास्थ्य के साथ ही साथ पर्यावरणीय सन्तुलन पर प्रतिकूल प्रभाव डालते है । उपरोक्त समस्याओं की रोकथाम के लिए विशेषकर सब्जी उत्पादन में जैविक नाशीजीव प्रबन्धन पर विवरण प्रस्तुत है ।   सामान्य सिद्धान्त जैविक कृषि प्रणाली में नशीजीवों जैसे: कीट व्याधि एवं खरपतवारों से होने वाली क्षति को कम से कम रखना सुनिश्चित किया जाना चाहिए । जिसके लिए संतुलित पोशाक तत्व प्रबन्धन, वातावरण के अनुरूप फसलों की उन्नतशील प्रजाति, उच्च जैविक सक्रियता युक्त उर्वर मृदा, अंगीकृत फसल चक्र, सह:फसल, हरी खाद इत्यादि विंदुओं पर विशेष ध्यान आकर्षित करने की आवस्यकता है । साथ ही साथ फसल की वृद्धि एवं विकास प्राकृत के अनुरूप होनी चाहिए । संस्तुतियाँ नशीजीवों की रोकथाम के लिए ऐसी पारम्परिक तकनीकों का उपयोग किया जाना चाहिए...

कारगिल, लद्दाख क्षेत्र में कोडलि‍गं मोथ के प्रबंधन के लिए एक संभावित उपकरण - सामूहिक फंदा (मास ट्रैप)  Mass trapping is just as the name suggests, placement of a large number of traps in an area, which usually have a sticky cardboard bottom baited with pheromone lures. The lure mimics the scent of a female moth attracting male moths to the trap with the result preventing or delaying mating. Mass trapping requires a high density of traps in order to remove enough males to reduce insect damage. Mass trapping has been attempted for a variety of agricultural, orchard and forest pests on scales ranging from a few to thousands of hectares . The majority of mass trapping programs have been used for pest management rather than eradication program. Mass trapping has been tested both as a stand-alone control method and in combination with insecticides and other treatments. It can help to reduce codling moth populations but won’t  eliminate the damage. This method works best where trees are isolated from other trees harboring codling moth (Apple, Pear, English Walnut). The key objective of mass trapping in pest management or eradication is to capture enough insects in the treated area before they reproduce or damage crops, which requires the following:- Deployed traps release pheromone/attractant that is perceived by...