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Need and importance of relay crop in India वर्तमान मे देश की बढ़ती जनसंख्या को भोजन उपलब्ध कराने के लिये सघन खेती ही एकमात्र विकल्प बनता जा रहा है, क्योकि बढ़ती जनसंख्या के दबाव के कारण खेती की भूमि अन्य कार्यो के लिये परिवर्तित हो रही है एवं खेती का रकबा बढ़ाना अब संभव प्रतीत नही होता है। देश मे बहुत से क्षेत्र ऐसे है जहां की कृषि पूरी तरह से वर्षा पर आधारित है तथा सिंचार्इ के सीमित साधन के कारण ही रबी मौसम में खेत खाली पड़ी रहती है अत: ऐसे क्षेत्रों के लिए सघन खेती के रूप मे उतेरा खेती एक महत्वपूर्ण विकल्प साबित हो सकती है। उतेरा खेती का मुख्य उद्देश्य खेत में मौजूद नमी का उपयोग अगली फसल के अंकुरण तथा वृद्धि के लिए करना है। इस प्रकार की खेती मे किसी भी प्रकार की कर्षण क्रियाये नही की जाती है। क्या है उतेरा खेती:- यह फसल उगाने की वह पद्धति है जिसमे दूसरी फसल की बुंवार्इ, पहली फसल के कटने के पूर्व ही कर दी जाती है। खेत का चुनाव:- उतेरा खेती के लिए कन्हार या मटियार दोमट जैसी भारी मृदा वाली खेत उपयुक्त रहती है। अत: मध्यम तथा निचली (बहरा) भूमि का चुनाव करना चाहिए। भारी मृदा में जलधारण क्षमता अधिक होती है साथ ही काफी लम्बे समय तक इस मृदा में नमी बनी रहती है।...