29 Mar Watermelon (Citrulus lanatus Thunb.) farming an instrument to increase rural income
तरबूज की खेती ग्रामीण आय बढ़ाने का एक अच्छा साधन तरबूज़ ग्रीष्म ऋतु की फसल है । इसका फल बाहर से हरे रंग के होते हैं और अंदर से लाल होते है। ये पानी से भरपूर व मीठे होते हैं। इसे मतीरा और हदवाना भी कहा जाता है। तरबूज भारत मे बहुत लोकप्रिय फल है। बाजार मेें तरबूज की अच्छेे भाव आसानी से मिल जाते है अत: किसानो की आय बढाने मे तरबूज की खेती एक अच्छाा साधन हो सकता है। तरबूज की खेती के लिए भूमि : तरबूज की फसल के लिए बलुई दोमट जमीन बेहतर होती है। इसी वजह से नदियों के किनारे की दियारा जमीन इस के लिए सब से अच्छी मानी जाती है। जमीन में जलनिकासी और सिंचाई का अच्छा इंतजाम होना चाहिए। जलभराव से इस फसल को काफी नुकसान पहुंचता है। परीक्षणों के मुताबिक पाया गया है कि दोमट मिट्टी जिस का पीएच मान 6.5 से 7 के बीच हो तरबूज की खेती के लिए ज्यादा बढि़या होती है। खेत की तैयारी : सब से पहले खेत की गहरी जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करनी चाहिए। उस के बाद 3-4 जुताइयां कल्टीवेटर या देशी हल से करके मिट्टी को खूब भुरभुरी बना लेना चाहिए। नमी की कमी होने पर पलेवा जरूर करना चाहिए। तरबूज की बुआई : तरबूज की फसल पानी नहीं बर्दाश्त...