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जलवायु परिवर्तन के शमन और अनुकूलन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता कंप्यूटर विज्ञान की एक तेजी से विकसित हो रही शाखा है जो बुद्धिमान प्रणालियों के डिजाइन से संबंधित है जो ऐसे कार्यों को करने में सक्षम होती हैं जिनके लिए आमतौर पर मानवीय संज्ञानात्मक क्षमताओं की आवश्यकता होती है, जिनमें सीखना, तर्क करना, समस्या-समाधान और निर्णय लेना शामिल हैं। हाल के वर्षों में, कृत्रिम बुद्धिमत्ता अपने सैद्धांतिक आधार से आगे बढ़कर कृषि, स्वास्थ्य सेवा और पर्यावरण प्रबंधन सहित कई क्षेत्रों में एक परिवर्तनकारी शक्ति के रूप में उभरी है। जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में इसका बढ़ता अनुप्रयोग, जिसे व्यापक रूप से 21वीं सदी की सबसे महत्वपूर्ण वैश्विक चुनौतियों में से एक माना जाता है (Rolnick et al., 2019), विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। बड़ी मात्रा में डेटा को संसाधित करके और जटिल पैटर्न की पहचान करके, जो अक्सर विश्लेषण की पारंपरिक विधियों की क्षमता से परे होते हैं, कृत्रिम बुद्धिमत्ता जलवायु परिवर्तन के मूल कारणों को कम करने और इसके तेजी से गंभीर होते प्रभावों के अनुकूलन को सुविधाजनक बनाने के लिए नवीन तरीके प्रदान करती है। 1. Climate Change: A Growing Global Concern जलवायु परिवर्तन: एक बढ़ती हुई वैश्विक चिंता जलवायु परिवर्तन को आम तौर पर तापमान, वर्षा के पैटर्न और चरम मौसम की घटनाओं की आवृत्ति में दीर्घकालिक परिवर्तन के रूप में समझा...

Agricultural Weather Forecasting and Crop Management किसी भी क्षेत्र का कृषि उत्पादन उस क्षेत्र विशेष में पाये जाने वाले बहुत से जैविक, अजैविक, भौतिक, सामाजिक व आर्थिक कारकों पर निर्भर करता है। मुख्यत: जैविक व अजैविक कारकों में मुख्य रूप से मौसमी तत्व, मिट्टी का स्वास्थय, जल संसाधन, फसलों के प्रकार व विभिन्न प्रजातियाँ, फसलों में होने वाली बीमारियाँ, कीट इत्यादि का प्रकोप आते है। सामाजिक व आर्थिक कारकों में कृषि प्रबन्धन को प्रभावित करने वाले कारक जैसे: कृषि लागत, संसाधनों का उपयोग, श्रमिकों की उपलब्धता, उर्वरक, रसायन, सिंचाई के जल की उपलब्धता, सरकारी नीतियाँ इत्यादि आते है। इन सभी उत्पादन के लिए जिम्मेदार कारकों में मौसमी कारक सबसे ऊपर आते है। मौसमी कारक फसल उत्पादन को दो तिहाई तक प्रभावित कर सकता है, अत: सतत उत्पादन लेने के लिए मौसमी कारकों की जानकारी अति आवश्यक है। इन कारकों की जानकारी यदि किसानों को पहले से ही मिल जाये तो किसान अपनी फसल में इन कारकों से होने वाले दुष्प्रभाव को कम कर सकता है। मौसम पूर्वानुमान मौसम के वर्तमान ओर पिछले मौसम की स्थिति का मूल्यांकन करके भविष्य में संभावित मौसम के बारे में पहले ही बता देने को ही मौसम पूर्वानुमान कहते है। यह वातावरण के अध्ययन में एक बहुत उपयोगी परिमाण है। यह भविष्य में किसानों, योजनाकारों, नीति निर्माताओं तथा कृषि वैज्ञानिकों के...