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कीट नि‍यंत्रण Tag

माहू यानी Aphid एक छोटा रस चूसने वाला कीट है, जो कई तरह की फसलों, सब्जियों, फलों और बागवानी पौधों को नुकसान पहुंचा सकता है। यह कीट अक्सर पौधे की कोमल पत्तियों, नई शाखाओं और पत्तियों की निचली सतह पर समूह में दिखाई देता है। माहू का आकार बहुत छोटा होता है, लेकिन अनुकूल मौसम मिलने पर इसकी संख्या तेजी से बढ़ सकती है। अधिक प्रकोप होने पर पौधों की नई बढ़वार कमजोर हो जाती है, पत्तियां मुड़ने लगती हैं और फसल की सामान्य वृद्धि प्रभावित हो सकती है। कुछ माहू प्रजातियां पौधों में वायरस रोग भी फैला सकती हैं। पौधे की पत्ती और कोमल हिस्सों पर दिखाई देने वाला माहू कीट का प्रकोप। पौधे की कोमल पत्तियों और तनों पर समूह में दिखाई देने वाले माहू कीट। माहू कीट क्या है? माहू एक नरम शरीर वाला छोटा कीट है, जिसे अंग्रेजी में Aphid कहा जाता है। इसकी अलग-अलग प्रजातियों का रंग हरा, पीला, काला, भूरा, लाल या गुलाबी हो सकता है। यह कीट अपने मुंह के विशेष अंगों की सहायता से पौधे का रस चूसता है। सामान्यतः माहू नई पत्तियों, कोमल तनों, नई शाखाओं और फूलों की कलियों के आसपास पाए जाते हैं। कुछ परिस्थितियों में माहू के पंख वाले रूप भी दिखाई देते हैं। ये एक पौधे से दूसरे पौधे तक फैलने में मदद करते...

Light Trap: An efficient IPM tool for farmers of Sipahijala, Tripura   समेकित नाशीजीव प्रबंधन (आईपीएम) किसानों के लिए एक प्रभावी नीति है | यह एक स्थायी संयंत्र संरक्षण रणनीति है जो पर्यावरण की दृष्टि से सुरक्षित, आर्थिक रूप से व्यवहार्य और किसान हितैषी है । उधाराण के तौर पर त्रिपुरा में सिपाहीजला में जहाँ किसान कई फसलों की खेती कर रहे हैं परन्तू इन फसलों पर कीटो के हमले के कारणवश किसानों को उपज में भारी नुकसान उठाना पड रहा है | इन प्रमुख कीटों की दीर्घकालिक रोकथाम या हानि को सांस्कृतिक, जैविक, भौतिक, यांत्रिक उपकरणों, रासायनिक कीटनाशकों के संयोजन के माध्यम से प्रबंधित किया जा सकता है| कीटों और कीटनाशकों के प्रदूषण से जोखिम को कम करने / पहचानने, प्रबंधन और त्वरित निदान के लिए ये हमारे लिए सहायक हैं । आईपीएम प्रबंधन के उपकरण और रणनीति समग्र आर्थिक नुकसान को कम करने में मदद करते हैं और पशु / मानव स्वास्थ्य और पर्यावरणीय नुकसान को भी कम करता है। और यह आर्थिक चोट स्तर (EIL) के नीचे इन कीटों की आबादी को भी कम करता है। लाइट ट्रैप, आईपीएम/ जैविक खेती उत्पादकों के लिए कीट प्रबंधन के लिए उपयोग किए जाने वाले प्रभावी आईपीएम उपकरणों में से एक है। यह व्यापक रूप से निगरानी, ​​कैप्चरिंग, कीड़ों को मारने और जैव विविधता अध्ययन...

Entomopathogenic nematodes (EPNs) in biological pest control कीटों के आक्रमण को रोकने के लिए कीटनाशकों का उपयोग दिन - प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है । जिसके कई दुष्प्रभाव सामने आ रहे है । इन दुष्प्रभावों को कम करने में जैविक कीट नियंत्रण अहंम भूमिका निभाता है । जैविक नियंत्रण का उपयोग जीव विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में किया गया है, खासकर कीटनाशक और पौधों की वृद्धि के लिए । फसलों के नाशीजीवों को नियंत्रित करने के लिए दूसरे जीवो को प्रयोग में लाना जैव निंयत्रण कहलाता है । वर्तमान में ईपीएन जैविक नियंत्रण कारक दुनिया भर में कई महत्वपूर्ण कीटो को नियंत्रित करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है । ताकि कई महत्वपूर्ण कीट कीटनाशकों को नियंत्रित किया जा सके । कीटनाशको को नियंत्रित करने के लिए ईपीएन का उपयोग एक संभावित गैर रासायनिक दृश्टिकोण है। ईपीएन जैविक नियंत्रण गुणों के अनुकूलतम संतुलन रखने वाले एकमात्र कीट परजीवी सूत्रकृमि है । किसी विशेष कीट को नियंत्रित करने के लिए एक ईपीएन का चयन विभिन्न कारको पर आधारित है । सूत्रकृमि की मेजबान श्रृंखला, मेजबान खोज, पर्यावरणीय कारको की सहनशीलता, उत्तरजीविता और प्रभावशीलता । मृदा बनावट, तापमान और मेजबान उपलब्धता को उनके वितरण का निर्धारण करने के लिए महत्वपूर्ण कारक माना जाता है । एंटोमोपैथोजेनिक नेमाटोड्स (ईपीएन) क्या है ? ईपीएन, सूत्रकृमियो (धागे या कीड़ो)...

Pest management in crops by ecological engineering फसलों में कीट प्रबंधन के लिए पारिस्थितिक अभियांत्रिकी  हाल ही में एक नए आयाम के रूप में उभरी हे जिसमे मुख्यतया कृषिगत क्रियाओ द्वारा कीटो के निवास स्थान में हेर फेर किया जाता हे, ताकि हानिकारक कीटो का जैविक नियत्रण हो सके । यह विधि आधुनिक काल में प्रचलित अन्य तरीको जैसे संश्लेषित कीटनाशको, किट प्रतिरोधी किस्मो इत्यादि से परे, पारिस्थितिक ज्ञान पर आधारित हे। वर्तमान में बढ़ते हुए कीटनाशी रसायनो के अंधाधुन्द उपयोग से कृषि पारिस्थितिक तंत्र में मित्र कीटो की जैव विविधता में काफी कमी आई हे I इसीलिए जरुरी हे की फसलों में मित्र कीटो की जैव विविधता में बढ़ावा देने वाली क्रियाये अपने जाये जो भविष्य में कृषि क्षेत्र  में सतत  विकास के लक्ष्यो को प्राप्त करने में सक्षम हो सके I पारिस्थितिक आभियांत्रिकी क्या हे? पारिस्थितिक अभियांत्रिकी कीट नियंत्रण की एक पारिस्थितिकीय विधि हे जिसमे पराग या नेक्टर उपलब्ध करने वाली फसलों को मुख्या फसल के किनारो पर तथा मध्य में पाश फसलों, किटकारी पोधो, अंतराशस्य, मिश्रित शस्य को ढकने वाली फसलों के रूप में लगाया जाता हे ताकि यह फैसले अधिक से अधिक संख्या में मित्र कीटो को आकर्षित कर हानिकारक कीटो की समष्टि को कम कर सके।   इस विधि में मित्र कीटो को छोटा पशुधन समझा जाता हे तथा उनके लिए...

फसलों मे कीट नि‍यंत्रण के लि‍ए जैवि‍क कीटनाशकों का प्रयोग Pesticides having biological origin i.e., viruses, bacteria, pheromones, plant or animal compounds are known as biopesticides. They are natural in origin derived from animals, plants, bacteria, and certain non-synthetic minerals. Bio-pesticides are highly specific affecting only the targeted pest or closely related pests. They are safer for living beings. Biopesticides are one of the promising alternatives to manage environmental pollution and subsequently has gained interest in view of the growing demands for organic food. Biopesticides can successfully be used for specific crops and niche areas as a component of IPM. Biopesticide in India  In India, so far only 12 types of biopesticides have been registered under the Insecticide Act, 1968. Neem based pesticides, Bacillus thuringiensis, NPV (Nuclear Polyhedrosis Virus) and Trichoderma are the major biopesticides produced and used in India. Whereas more than 190 synthetics are registered for use as chemical pesticides. Most of the biopesticides find use in public health, except a few that are used in agriculture.   Consumption of biopesticides has increased from 219 metric tons in 1996-97 to 683 metric tons in 2000-01, and about 85% of the biopesticides used are neem based products. Consumption of chemical pesticides has significantly fallen from 56,114 MT to 43,584 MT during the same period. Table 1:   Annual availability of...