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कृषि अपशिष्ट Tag

Pollution reduction and wealth creation from agricultural crop wastes with the help of briquetting plant ब्रिकेटिंग प्लांट वानिकी, औद्योगिक और कृषि अपशिष्ट जैसे विविध अवशेषों को जैव-ईंधन के ठोस ब्लॉकों में परिवर्तित करने के लिए एक पर्यावरण के अनुकूल तकनीक है। बेलनाकार आकार के ब्रिकेट्स (white coal) उच्च यांत्रिक दबाव के साथ बाइंडर रहित तकनीक का उपयोग करके बनाए जाते हैं। इसके लिए किसी बाइंडर या केमिकल की जरूरत नहीं है। जैव-ब्रिकेट गैर-नवीकरणीय जीवाश्म ईंधन (Non- renewable fossil fuels) के विकल्प हैं और इसका उपयोग कई विनिर्माण उद्योगों जैसे भट्टों, भट्टियों और बॉयलरों में किया जा सकता है। ब्रिकेटिंग का अर्थ थोक घनत्व वाले कच्चे माल के आकार को कॉम्पैक्ट रूप में कम करना है। जिससे परिवहन, जलने और इसके कैलोरी मान को भी बढ़ाना आसान हो जाता है। पारिस्थितिक जैव-ब्रिकेट्स प्रदूषण मुक्त हैं और हरित परिवेश में भी योगदान करते हैं जो योग्य विदेशी मुद्रा को बचाते हैं। बायो-ब्रिकेट्स के पीछे का आदर्श वाक्य वेल्थ फ्रॉम वेस्ट (Wealth from Waste) है। ग्रामीण भारत में कृषि और प्रदूषण से जुडी हुई दो समस्याएं ग्रामीण भारत में नीचे दी गयी दो प्रमुख समस्याएं हैं - ग्रामीण भारत में, ईंट भट्टे, वायु, जल और मृदा प्रदूषण के सामान्य स्रोत हैं। ईंट भट्टों में कच्ची ईंटों को सेंकने के लिए कोयले (Black Coal) का प्रयोग किया जाता है जैसे...