13 Mar Improved varieties and production technology of wheat
गेहूँ की उन्नत किस्में एवं उत्पादन तकनीकी भारत में चावल के बाद गेंहूँ एक प्रमुख खाद्यान्न फसल है जिसकी खेती शीत ऋतू में की जाती है| गेहूँ के दानों का उपयोग अनेकों प्रकार के भोज्य पदार्थ बनाने में किया जाता है| इसके दानों में कार्बोहाइड्रेट (60-68%) और प्रोटीन (8-12%) मुख्य रूप से पाए जाते है| इसकी भूसी का उपयोग पशुओं के चारे के रूप में किया जाता है| गुणवत्ता व उपयोग के आधार पर गेंहूँ को दो श्रेणियों मे विभाजित किया गया है-मृदु गेहूँ (ट्रिटिकम ऐस्टिवम) एवं कठोर गेहूँ (ट्रिटिकम ड्यूरम)। ट्रिटिकम ऐस्टिवम की खेती देश के सभी क्षेत्रों में की जाती है जबकि डयूरम की खेती पंजाब एवं मध्य भारत में और डाइकोकम की खेती कर्नाटक में की जाती है। वर्ष 2019-20 के आंकडों के अनुसार देश में गेहूँ की खेती 31.45 मिलियन हैक्टर क्षेत्र में हुई है जिससे 107.59 मिलियन टन उत्पादन एवं 3421 कि.ग्रा प्रति हैक्टर उपज प्राप्त हुई है। गेहूँ की फसल से अधिक पैदावार लेने के लिये इसकी उन्नत किस्मों के बारे में जानकारी होना बहुत आवश्यक हैं। क्षेत्र व जलवायु विशेष के अनुसार किस्मों का चुनाव कर खेती करने से किसान भाई गेंहूँ से कम लागत में अधिक मुनाफा ले सकते है| प्रमुख उन्नत किस्में: देश के विभिन्न कृषि संस्थानों व अनुसंधान केन्द्रों द्वारा गेंहूँ की किस्में विकसित की गयी...