12 Mar कपास के 2 प्रमुख सूत्रकृमि एवं उनका प्रबंधन
2 Major nematodes of Cotton crop and their management कपास गोसीपियम जाति की एक मुख्य नकदी फसल है । यह विश्व के गर्म इलाकों में उगाई जाती है। भारत में महाराष्ट्र, पंजाब, हरियणा, गुजरात मध्य प्रदेश, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश कपास के प्रमुख उत्पादक राज्य हैं। उत्तर भारत में खरीफ के मौसम में व दक्षिण भारत में यह पूरे साल उगाई जाती है। इस फसल के क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत विश्व में पहले स्थान व उत्पादन में दूसरे स्थान पर है । अनेक प्रकार के कीट,फफूंद एवं सूत्रकृमि कपास के सफल उत्पादन को प्रभावित करते हैं। कपास के दो मुख्य सूत्रकृमि निम्नलिखित हैं। 1) जड़ गांठ सूत्रकृमि (मेलॉइडोगाइनी): यह सूत्रकृमि भारत सहित विश्व के अनेक देशो में कपास की फसल को नुकसान पहुँचाता है। उत्तर भारत, गुजरात एवं तमिलनाडु में यह आमतौर पर पाया जाता है। जड गांठ सूत्रकृमि का जीवन चक्र: यह पादप सूत्रकृमि अपना जीवन चक्र लगभग 30 दिन में पूरा कर लेता है। अत: इसकी एक वर्ष में कई पीढ़ियां बन जाती हैं। जड गांठ सूत्रकृमि से ग्रसित कपास फसल के लक्षण: पौधे के उपरी भाग के लक्षण विशिष्ट नही होते हैं। संक्रमित पौधे छोटे और बोने रह जाते है। तेज धूप में पत्तियां मुरझा जाती हैं। अधिक संख्या में सूत्रकृमि संक्रमण पौधे की प्रांरम्भिक मृत्यु का कारण होता है। संक्रमित...