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मोरिंगा ओलीफेरा अनुपूरण के माध्यम से डेयरी मवेशियों में प्रजनन और उत्पादक क्षमता में सुधार In addressing the challenges of suboptimal reproductive performance and escalating veterinary costs in livestock production, it's essential to explore alternative feed resources. Moringa (Moringa oleifera), drought-tolerant tree rich in crude protein and devoid of inhibitors like tannins, trypsin, and amylase, presents a promising solution. मोरिंगा ओलीफेरा अनुपूरण के माध्यम से डेयरी मवेशियों में प्रजनन और उत्पादक क्षमता में सुधार In tropical livestock production, underfeeding is a critical issue due to limited feed quantity and quality, resulting in reduced milk yields and incomes for farmers, especially in the dry season when natural pastures lack nutritive value. Dairy farming in tropical regions is complex, intertwined with economic and social dimensions. Conventional concentrates are expensive, limiting their use. Alternative, low-cost supplements, cultivable by farmers year-round, are needed to enhance nutritional levels and boost the economy in small-scale dairy production. This highlights the necessity of finding cost-effective solutions to improve dairy farming in tropical climates. Under good cultivation practices, such as proper soil preparation, adequate irrigation, fertilization, and pest control, drumstick plantations can indeed yield significant quantities of pods and leaves per acre per year. The yield of drumstick pods can range from 18 to 20 tonnes per acre per year and leaves can...

Role of nutrition in reproductive health and management of dairy animals Fertility of dairy animals is influenced primarily by a nexus of genetic, environmental, and management indicators, and their complex interactions make it even more difficult to isolate the exact cause of this decline. The physical condition and reproductive capacity of dairy animals depend on nutrition.  Role of nutrition in reproductive health and management of dairy animals दूध और उसके उत्पाद एक पोषण का महत्वपूर्ण स्रोत हैं और उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में यह ग्लोबल स्तर पर बढ़ेगा, जो बढ़ती वैश्विक जनसंख्या के साथ मेल खाता है। हालांकि आनुवांशिक उन्नति ने पशु उत्पादकता को बढ़ावा दिया है, डेयरी गायों की विफलता में भी गिरावट का सामना किया गया है। डेयरी जानवरों की फर्टिलिटी को प्रमुख रूप से जेनेटिक, पर्यावरणीय, और प्रबंधन संकेतकों की एक संज्ञानबद्ध श्रृंग के द्वारा प्रभावित किया जाता है, और उनके जटिल संवादों के कारण इस गिरावट के सटीक कारण को अलग करना और भी मुश्किल बनाता है। डेयरी जानवरों की शारीरिक स्थिति और प्रजनन क्षमता पोषण पर निर्भर करती है। भोजन में विभिन्न घटक शामिल होते हैं, लेकिन ज्यादातर वसा, कार्बोहाइड्रेट्स, प्रोटीन, और छोटे तत्व पशु की प्रजनन प्रदर्शन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट्स रूमेन संगठन के लिए उपकारक होते हैं, जो वॉलेटाइल फैटी एसिड्स (VFA)...

महिलाओं के पोषण और आजीविका सुधार में डेयरी की सम्भाब्य भूमिका Dairying is a livelihood option after agriculture in most parts of India. But due to industrialization, privatization, male migration for employment, many women farmers in hilly and natural calamity areas have accepted dairy as their primary option of livelihood. महिलाओं के पोषण और आजीविका सुधार में डेयरी की सम्भाब्य भूमिका भारत में पशुधन क्षेत्र सकल घरेलू उत्पाद का 4.11 प्रतिशत और कुल कृषि सकल घरेलू उत्पाद का 25.6 प्रतिशत योगदान देता है। भारत के लगभग 20.5 मिलियन लोग अपनी आजीविका के लिए पशुधन पर निर्भर हैं और उनमें से 69 प्रतिशत कार्यबल का योगदान महिलाओं द्वारा किया जाता है। अन्य क्षेत्रों के विपरीत, पशुधन क्षेत्र महिलाओं की सशक्तिकरण और आजीविका को सुरक्षित करने का अवसर प्रदान करता है । महिलाएं अन्य संपत्तियों की तुलना में अधिक पशुधन रखती हैं, इसलिए वे उनके संबंध मे ठोस निर्णय ले सकती हैं। भारत को खाद्य उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने में पशुधन क्षेत्र विशेष रूप से डेयरी की महत्वपूर्ण भूमिका है। बढ़ती मानव आबादी और सिकुड़ते भूमि संसाधनों के कारण स्वस्थ भोजन की बढ़ती मांग ने डेयरी को आज की जलवायु संकट के समय में किसानों के लिए जीवन रक्षक विकल्प बना दिया है। 19वीं पशु गणना की तुलना में 20वीं पशुगणना में पशुधन की संख्या में 4.6...

मैस्टाइटिस पशुओं के उपचार के लिए मेसेनकाइमल कोशिकाओं की भूमिका  Stem cells are the undifferentiated and uncommitted cells that give rise to deferent cell types or lineage on dividing. These stem cells are used as regenerative medicine for the treatment of various diseases in human and animals. In the present study mesenchymals Stem cells (MSC) used for the treatment of mastitis animal and it found that diseased animal treated with MSC has been cured which suggest that stem cell therapy use as regenerative medicine providing a promising area for the treatment of various diseases in animals. Stem cells “the hope cells”: A stem cell is a specialized cell which has the unique characteristic to develop into specialized cell types in the body and these stem cells may be used to replace cells and tissues that have been damaged due to disease. Due to their ability to repair, regenerate, and develop into specialized cell types, Stem cells hold considerable promise as a source of cells for therapeutic applications in various conditions including metabolic, degenerative and inflammatory diseases for the repair and regeneration of damaged or lost tissues. Stem cell therapy for animals has seen breakthroughs over past few years. The past decade has witnessed an exponential growth in treatment of diseases. In a few instances, stem-cell-based therapies produced remarkable...

Nurturing and management of livestock पशुपालन ग्रामीण जीवन का महत्‍वपूर्ण अंग है। समृद्ध डेयरी व्‍यवसाय के कारण देश,  दुग्‍ध उत्‍पादन मे अग्रणी बना हुआ है। पशुओं के पालन पोषण एवं प्रबंधन  के लिए तीन बातों पर ध्यान देना अत्‍यंत आवश्‍यक है। सही जनन, सही खानपान और रोगों से बचाव 1. सही जनन: सही जनन के लिए निम्नलिखित बातों पर ध्यान देना आवश्यक है। अच्‍छी नस्ल का चुनाव : पशुपालन के लिए नस्लों का चुनाव करते समय वहाँ की जलवायु और सामाजिक एवं आर्थिक परिवेश पर ध्यान देना आवश्यक है। बिहार की जलवायु के अनुसार यहा जो पशुपालक संकर नस्ल की पशु पालना चाहते है वह जरसी क्रॉस पाल सकते है। वैसे इलाके जहां हरा चारा प्रचुर मात्रा मे उपलब्ध है वहाँ फ्रीसियन क्रॉस भी पाली जा सकती है। जो पशुपालक देशी नस्ल की गाय पालना चाहते है वो साहिवाल, रेड सिंधी अथवा थरपारकर नस्ल की गाय पाल सकते है। भैंसों मे मुर्रा नस्ल की भैंस को पालना यहा की आवो हवा के अनुसार सबसे उपयुक्त है। कृत्रिम गर्भाधान: मादा के जननांग मे शुक्राणु को कृत्रिम रूप से रखने की प्रक्रिया को कृत्रिम गर्भाधान कहते हैं। इसके कई लाभ हैं सांढ को पालने की आवश्यकता नहीं रहती है संक्रामक बीमारियो के फैलने की संभावना कम हो जाती है। उत्तम गुण वाले सांढ का उपयोग अधिक से अधिक किया जा सकता है। नर के मरने...

Camel milk contribution to milk production and its beneficial properties ऊंट रेगिस्तान का एक महत्वपूर्ण पशुधन है और उसके दूध में मानव के लि‍ए लाभकारी पोषक तत्त्व पाए जाते है। साल 2012  के सर्वेक्षण के अनुसार भारत में ऊंट की जनसँख्या 4 लाख पाई गई थी जो कि औसतन 22.63 प्रतिशत गिरावट दर्शाता है। अच्‍छी नस्‍ल के ऊंट की दुग्ध उत्पादन क्षमता 7  - 8 लीटर दूध प्रति दिन होती है। लेकिन जैसलमेरी या बिकानेरी नस्लों की औसतन उत्पादन  प्रति दिन केवल 5 - 6 लीटर है जो कि काफी कम है। ऊंट के पास किसी अन्य पशुधन की तुलना में रेगिस्तान की कठोर परिस्थितियों में लम्बे समय की अवधि तक अधिक से अधिक दूध का उत्पादन करने की क्षमता है। ऊॅट की लैक्टेशन अवधि 8 - 18 महीनों की होती है। औसतन, दैनिक दूध उत्पादन का अनुमान बेहतर खाद्य की उपलब्धता , पानी की उपलब्धता और पशु चिकित्सा  व देखभाल पर निर्भर करता है। भारत, रूस और सूडान सहित कई देशों में ऊंट के दूध का मानव उपभोग में बहुत बड़ा योगदान है। इस दूध में मानव आवश्‍यकता के सभी पोषक तत्व स्वाभाविक रूप से मौजूद होते हैं जिसमे अधिकतम मात्रा प्रोटीनों की होती है।  इसका दूध विभिन्न बीमारिया जैसे कि जलोदर, पीलिया, तपेदिक, अस्थमा और लेशमैनियासिस से उपचार के लिए लाभदाई है। ऊंट के...

Ways of hygienic milk production दूध यदि गंदगी, दुर्गंध तथा हानिकारक जीवाणु रहित है तो ऐसे दूध को हम स्वच्छ दूध कहते हैं। दूध जब थन से निकलता है तो स्वच्छ रहता है, पर थन से निकलने के बाद यदि साफ सफाई का ध्यान सही से न रखा जाए तो बाहरी आवोहवा के संपर्क मे आकर दूषित हो जाता है। दूषित दूध का सेवन करने से कई बीमारियाँ हो जाती हैं। अतः स्वच्छ दूध का उत्पादन अति आवश्यक है। स्वच्छ दूध के उत्पादन के लिए निम्नलिखित बातों पर ध्यान देना आवश्यक है जिस पशु से दूध निकाला जा रहा है वो स्वस्थ होना चाहिए। पशु मे टी. बी. तथा ब्रूसेलोसिस का परीक्षण साल मे एक बार करवा लेना चाहिए। पशुओं के शरीर पर किसी प्रकार की गंदगी नहीं होना चाहिए। पशुओं को साफ सुथरी जगह पर रखना चाहिए। दूध दुहने के लिए साफ बर्तन का उपयोग करना चाहिए। दूध दुहने वाला ब्यक्ति साफ सूथड़ा होना चाहिए। स्वच्छ दूध के उत्पादन के लिए पशु घर मे निम्नलिखित सावधानी बरतनी चाहिए पशु घर या पशु शेड को किसी ऊंची जगह पर बनाना चाहिए ताकि पानी की निकासी मे सुविधा हो। दूध दुहने वाले शेड के आस पास गोबर या अन्य अवशिष्ट पदार्थ रखने की जगह नहीं होनी चाहिए क्योंकि इससे शेड की हवा प्रदूषित होती हैं तथा ये मक्खियों के प्रजनन केन्‍द्र...

Care of newborn dairy calf  नवजात  बछड़ो  की देखभाल या नवजात  बछड़ो का वैज्ञानिक प्रबंधन करके डेरी यवसाय में  फायदा हो कमाया जा सकता हैं । गाय ब्याने के बाद उसके बच्चे को दो तरीके से पाला जा सकता है एक पशु के साथ रखकर और दुसरा बच्चे को दूसरे बच्‍चों के साथ रखकर (वीनिंग). वीनिंग ज्यादा फययेदेमन्द होता है उसको आवश्यकता अनुसार खानपान दिया सकता है और बच्चा मरने पर भी माँ दूध देती रहती है। बच्चा पैदा होने के बाद टाट भूसा रगड़कर अच्छे से साफ़ करना चाहिए। और उसके पिछले पैरो  को पकड़कर उल्टा लटका दे ताकि नाक से स्लेश्मा बाहर निकल जाए अौर वो ठीक से  सांस लेने लगेे। ब्याने के बाद बछड़े की नाल साफ़ कैची से  ३-४ इंच छोड़कर काट दे तथा टिंचर आयोडीन ३-४ दिनों तक लगाते रहे जिससे बछड़े को जॉइंट इल या नैवेल इल नामक बिमारी से बचाया  सके। यह करने के बाद बच्‍चे को तुरन्त कोलस्ट्रम  (खीस) पिलाने का इंतज़ाम करना चाहिए। कोलस्ट्रम  निकालते समय माँ के पिछले थनाे व पिछले भाग का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इसके लिए पोटेशियम परमेगनेट (लाल दवा) या नीम की पत्ती का पानी गुनगुना करके पिछले भाग व थनाे को अच्छी तरह से साफ़ करना चाहिए इसके बाद स्वच्छ बर्तन मे खिस निकालकर नवजात बछड़े को पिलाये (बछड़े...