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बहुफसलीय खेती Tag

Fruit based multinational farming system in dry areas शुष्क कृषि क्षेत्र में पंजाब और हरियाणा, राजस्थान एवं कच्छ  के भाग शामिल हैं। ये क्षेत्र देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र के 9.78 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करते है तथा 319 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल पर फैलें है। शुष्क क्षेत्रों की मिट्टी प्रायः बलूई (लगभग 64.6%) हैं। मिट्टी में नाइट्रोजन, फास्फोरस और तांबा, जस्ता और लोहे जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व आमतौर पर कम हैं। मिट्टी में अक्सर उच्च लवणता एवं कम जल धारण क्षमता पायी जाती है। इसके अतिरिक्त, मौसम की अनियमितता, सीमित भू-जल संसाधन तथा मिट्टी का कटाव भी इन क्षेत्रों मे चिंता का विषय है। भारतीय शुष्क क्षेत्रों में, वार्षिक औसत वर्षा बहुत कम (200 से 450 मिमी) और अनिश्चित है। इन विषम परिस्थितियों के कारण, यहाँ के निवासियों के लिए भोजन, चारे और ईंधन की समस्या सदैव बनी रहती है। विविधीकरण की आवश्यकता ऊपर इंगित परिस्थितियों में, यदि भूमि का प्रबंधन ठीक से न हो तो इससे और भूमि क्षरण हो सकता है। शुष्क क्षेत्रों के ये सीमांत भूमि, विशेष रूप से सूखे के दौरान, कृषि योग्य फसलों को पैदा करने में सक्षम नहीं हैं। शुष्क कृषि क्षेत्र में, फल-वृक्ष घटक खेती प्रणाली को स्थायित्व प्रदान करने के अलावा, उत्पादन और आय बढ़ाने मे भी सहयोग करते हैं। फसल प्रणाली में वार्षिक फसलों के साथ...