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Integrated disease and pest management in Vegetable crops. भारत मे  भिन्न-भिन्न जलवायु होने के कारण हर प्रकार की सब्जियाँ उगाई जाती है। सब्जी उत्पादकता कम होने का प्रमुख कारण सब्जियों की फसल में लगने वाले रोग एवं कीट हैं। सब्जियों में रोग उत्पन्न करने के लिए बहुत से रोगकारक जैसे- कवक, जीवाणु, विषाणु, फाइटोप्लाज्मा, सूत्रकृमि इत्यादि जिम्मेदार हैं, जिनकी वजह से सब्जी के उत्पादन एवं उसकी गुणवत्ता में कमी आती है। सब्जियों में अधिकतर रोग, कवकों द्वारा उत्पन्न होता है। पौध तैयार करने से लेकर उत्पादन, भण्डारण एवं विपणन तक सूक्ष्मजीवों द्वारा होने वाली व्याधियाँ सब्जी उत्पादन में मुख्य बाधाएँ हैं। उपरोक्त बातों को ध्यान में रखते हुये यह सबसे बड़ी चुनौती है कि सब्जी को निर्यात करने के लिए उत्तम गुणवत्तायुक्त तथा नाशीजीव रसायनों से मुक्त पैदा किया जाए। यह सिर्फ एकीकृत रोग प्रबन्ध की तकनीकी से ही सम्भव है। बैंगन ( Brinjal ) की फसल के रोग: बैंगन का फोमोप्सिस झुलसा रोग: यह रोग फोमोप्सिस वेक्सान्स नामक कवक द्वारा होता है। पौधशाला में पौधों की पत्तियों में स्पष्ट हल्के भूरे रंग के गोल धब्बे बन जाते हैं जो ज्यादातर निचली पत्तियों में होता है। ज्यादातर धब्बे कागज की तरह होकर फट जाते हैं और पत्तियों में छिद्र बन जाता है। पौधशाला तथा रोपाई के बाद मुख्य फसल में धब्बों के बनने में समानता होती है। तनों पर...

Advanced cultivation Techniques of Tomato टमाटर का वानस्पतिक नाम  लाइकोपर्सिकन एस्कुलेन्टम है। यह सोलेनेसी कुल का पौधा है। भारत में उगाई जाने वाली सब्जियों में टमाटर की खेती का प्रमुख स्थान है। सब्जी के अतिरिक्ति इसका सुप, चटनी, सलाद, सांस आदि में भी इसका उपयोग किया जाता है। टमाटर के विविध उपयोगों के कारण इसकी मांग सालभर रहती है अत: किसान भाई सालभर टमाटर की खेती करके अधिक लाभ कमा सकते है। फसल योजना:- टमाटर उगाई गई मेडों के बीच में लोबिया (चवंला) लगाने से कीटो की संख्या में कमी आती है तथा 1-2 दवाई के छिडकाव में कमी आती है। अरण्डी को खेत के चारों तरफ लगाने से पत्ताी छेदक लट से बचा जा सकता है। पत्ताी छेदक कीट पहले अरण्डी पर आक्रमण करता है अत: इसका आसानी से नियन्त्रण किया जा सकता है। खेत व उसकी तैयारी:- भूमि में 3-4 बार जुताई करने के पश्चात् पाटा चलाकर भूमि को भूरभूरी व समतल कर लेना चाहिए। पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से की जानी चाहिए। भूमि में जल निकास की उचित व्यवस्था होनी चाहिए तथा पी.एच. 6-7 के मध्य होना चाहिए। उन्नत किस्में:- टमाटर को पौधों को वृध्दि की प्रकृति के अनुरूप दो भागों में बांटा गया है। निर्धारित वृध्दि वाली किस्में :- एस एच 2, पुसा गौरव, पुसा अर्ली ड्वार्क अनिर्धारित वृध्दि वाली किस्में:- पूसा रूबी, सलेक्षन - 120, पंत बहार इसके अतिरिक्त रबी...