Crop Cultivation

जीर्ण उद्यान का कायाकल्‍प करके उत्पादकता में सुधार Fruit tree start decline with their yield and also decline of tree starts with sparse appearance, yellowing and different type foliage symptoms, undergrowth and sickly appearance, dried-up top growth with small and less number of fruits. The branches of trees start to die from the top to downwards, ultimately resulted poor quality fruits (rough surface, thick skin and less juice). Such type of decline may be seen in whole orchards, on in a single tree or patches. The fruit growers do not adopt the proper management practices in terms of plant protection, manuring, irrigation, mulching, pruning etc. and the orchards become sick. In general, canopy of...

जायद में मूंग का उत्पादन दलहनी फसलों में मूंग की बहुमुखी भूमिका है। इससे पौष्टिक तत्व प्रोटीन पर्याप्त होने के कारण स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है। मूंग के दानों में 25 प्रतिशत प्रोटीन, 60 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट, 13 प्रशित वसा तथा अल्प मात्रा में विटामिन सी पाया जाता है। इसमें वसा की मात्रा कम होती है और इसमें विटमिन बी कम्पलेक्स, कैल्शियम, खाद्य रेशा एवं पोटेशियम भरपूर होता है। मूंग की दाल से दही बडे, हल्वा, लड्डू, खिचड़ी, नमकीन, चीला, पकोडे़ आदि बनाये जाते हैं। बीमार होने पर डाॅक्टर मूंग की खिचड़ी या मूंग की दाल खाने का परामर्श देते हैं क्योकि यह जल्दी पच जाती है। फली तोड़ने के बाद फसलों...

मसूर की उन्नतशील खेती दलहनी वर्ग में मसूर सबसे प्राचीनतम एवं महत्वपूर्ण फसल है। प्रचलित दालों में सर्वाधिक पौष्टिक होने के साथ-साथ इस दाल को खाने से पेट के विकार समाप्त हो जाते है यानि सेहत के लिए फायदेमंद है। मसूर के 100 ग्राम दाने में औसतन 25 ग्राम प्रोटीन, 1.3 ग्राम वसा, 60.8 ग्राम कार्बोहाइड्रेड, 3.2 मिग्रा. रेशा, 38 मिग्रा0, कैल्शियम, 7 मिग्रा0 लोहा, 0.21 मिग्रा, राइबोफ्लोविन, 0.51 मिग्रा0 थाईमिन तथा 4.8 मिग्रा0 नियासिन पाया जाता है अर्थात मानव जीवन के लिए आवश्यक बहुत से खनिज लवण और विटामिन्स से यह परिपूर्ण दाल है। रोगियों के लिए मसूर की दाल अत्यन्त लाभप्रद मानी जाती है क्यांेकि यह अत्यन्त पाचक है। दाल...

सब्‍जी माइक्रोग्रीनस - पोषण का एक संभावित स्रोत Microgreens are young and tender edible seedlings produced using the seeds of different species of vegetables, herbaceous plants, aromatic herbs and wild edible plants (Di Gioia and Santamaria 2015a, b). The edible portion constitutes single stem, the cotyledon leaves and, often, the emerging first true leave (Di Gioia et al. 2017). A few days of photosynthesis of microgreen is known to provide nearly 4-9 times more nutrients including antioxidants, vitamins and minerals than their mature counterparts. Microgreens first appeared in the menus of the chefs of San Francisco, in California, at the beginning of the 1980s. By geography, North America contribute ~50% of market share in...

सरसो में खरपतवार प्रबंधन  तिलहनी फसलों में राई-सरसों का मूंगफली के बाद दूसरा स्थान है। देश में राई-सरसों की खेती मुख्यत: उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्यप्रदेश, हरियाणा, पंजाब, बिहार, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, असम, गुजरात, जम्मू कश्मीर आदि राज्यों में की जाती है I इस समय कुल खाद्य तेल उत्पादन का लगभग एक तिहाई तेल राई-सरसों द्वारा प्राप्त होता है इसकी खेती हमारे देश में लगभग 62.3 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में की जाती है जिससे लगभग 59 लाख टन उत्पादन होता है।  खरपतवार फसल के साथ पोषक तत्व, नमी, स्थान एवं प्रकाश के लिए प्रतिस्पर्धा करके राई-सरसों की पैदावार एवं तेल प्रतिशत में कमी कर देते है। राई-सरसों की पैदावार में खरपतवारों की संख्या...

ब्रसेल्स स्प्राउट की खेती ब्रसेल्स स्प्राउट्स जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु के पहाड़ी क्षेत्रों में खेती की जाने वाली महत्वपूर्ण ठंडी सब्जियों में से एक है। इस सब्जी की खेती ज्यादातर अमरीका और यूरोपीय देशों में की जाती है। पत्तियों की धुरी पर उगने वाले स्प्राउट्स का उपयोग खाना पकाने और सलाद के उद्देश्य के लिए किया जाता है। ब्रसेल्स स्प्राउट्स के अच्छे स्वास्थ्य लाभ हैं और ये विटामिन और खनिजों से भरपूर हैं। यह सब्जी मिनी गोभी से मिलती जुलती है। ब्रसेल्स स्प्राउट्स के स्वास्थ्य लाभ निम्नलिखित हैं। ब्रसेल्स स्प्राउट्स वजन प्रबंधन में मदद करते हैं। ब्रसेल्स स्प्राउट्स फाइबर का अच्छा स्रोत हैं। ब्रसेल्स स्प्राउट्स एंटी.ऑक्सीडेंट का अच्छा स्रोत हैं। ब्रसेल्स स्प्राउट्स विटामिन...

फलदार पौधों में पत्ती विश्लेषण द्वारा पोषक तत्व प्रबंधन फलदार बागीचों के विभिन्न खण्ड (ब्लाक) या खेत फल उत्पादकता में प्राय: एक दूसरे से भिन्न होते हैं। इसके बहुत से कारण हैं जैसे कि पौधों की किस्म और आयु, भूमि की किस्म एवं उसमें विद्यमान पौधों के लिए आवश्यक पोषक तत्वों की मात्रा इत्यादि में असमानता होना। पौधों के समुचित विकास हेतु इनमें पोषक तत्वों की न्यूनतम एंव संतुलित मात्रा का होना आवश्यक है जो कि काफी हद तक भूमि की उर्वरा शक्ति पर निर्भर करती है। भूमि में उर्वरकों का अंधाधुंध प्रयोग पौधों में पोषण संबंधी असंतुलन पैदा करता है जो फसल की पैदावार और फलों की गुणवत्ता को गंभीर रूप से...

फलदार पौधों में प्रसार तकनीक Fruit plants, as basic input have vital importance in the development of fruit industry. However, long gestation period of fruit crops calls for utmost care in selection of planting material and adoption of right technology for its mass multiplication, as any mistake committed during the initial establishment of an orchard may result in huge economic loss at a later stage. In commercial fruit production, planting material should be of high quality, uniform and true to the type. Most of the fruit plants do not produce true to the type progeny when propagated through seed. Since fruit crops are cross pollinated, the progeny produced through seeds are not exactly...