Crop Cultivation

ग्वार का महत्त्व एवं उत्पादन की उन्नत तकनीक ग्वार शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में उगाई जाने वाली दलहनी फसल है जो कि एक अत्यन्त सूखा एवं लवण सहनशील है। अतः इसकी खेती असिंचित व बहुत कम वर्षा वाले क्षेत्रों में सफलतापूर्वक की जा सकती है। ग्वार शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के गऊ आहार से हुई है जिसका तात्पर्य “गाय का भोजन” है। विश्व के कुल ग्वार उत्पादन का लगभग 80 प्रतिशत भाग अकेले भारत में पैदा होता है जोकि 65 देशों में निर्यात किया जाता है। ग्वार की खेती प्रमुख रूप से भारत के उत्तर-पश्चिमी राज्यों (राजस्थान, हरियाणा, गुजरात, उत्तरप्रदेश एवं पंजाब) में की जाती है। हमारे देश के कुल ग्वार उत्पादक...

ड्रैगन फ्रूट: स्वास्थ्य लाभ और खेती The dragon fruit commonly refers as Pithaya, ‘wonderous Fruit’ is to ring in a revolution in the Indian horticulture scenario. In the last few years fruit has become very popular among farmers as well as consumers due to its enormous health benefits. The fruit originally native to Central America and extensively cultivated around the world including Thailand, Malaysia, Vietnam, Sri Lanka, Bangladesh and now knocking at our door in India. The tree belongs to the genus hylocereus and a cactus vine by nature. The tree grows fast and requires a support system (a vertical pole) to grow vertically and a ring-like umbrella structure to supports its hanging...

सब्जी फसलों में आनुवांशिक विविधता का दोहन हेतु भ्रूण बचाव तकनीक  आधुनिक युग में बढ़ते यातायात के साधन एवं औद्योगिकरण के फलस्वरुप वातावरण प्रदूषण काफी बढ़ा है। कृषि मे विशेषकर सब्जी फसलों में रासायनिक कीटनाशकों, उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से मृदा व मानव स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ा है। इस स्थिति में आवश्यक है कि ऐसी तकनीकी व किस्मों को विकसित किया  जाये जिसे किसान अपनाकर कम लागत में स्वस्थ्य उत्पादन के साथ-साथ मृदा स्वास्थ्य में भी वृद्धि कर सकें। सब्जी फसलें आनुवंशिक विविधता की दृष्टि से काफी सम्पन्न है। जाति उद्भव के दौरान एक सब्जी फसल उसी परिवार या वंश की सब्जी फसल से भिन्नता के साथ-साथ कुछ समानता भी दर्शाती...

शीतोष्ण जलवायु में पाए जाने वाले दस प्रमुख औषधीय पोधें  भारतवर्ष में जड़ी-बूटियों का इतिहास बहुत पुराना है। हमारे ग्रन्थों, वेदों व पुराणों में इनका विस्तृत वर्णन है। अनादिकाल से हम वनौषधियों के लिए वनों पर निर्भर रहे हैं। जड़ी-बूटियां कई लोगों की आजीविका का वैकल्पिक आधार भी रही हैं। जलवायु, मिट्टी व तापमान में विविधता के कारण औषधीय महत्व की अधिकांश जड़ी-बूटियां भारतवर्ष में पाई जाती हैं। शीतोष्ण जलवायु में पाए जाने वाले मुख्य जड़ी-बूटी पौधों की विस्तृत जानकारी नीचे दी जा रही है। 1. चिरायता  वानस्पतिक नाम: स्वर्शिया चिरायता (Swertia chirayita) प्रचलित नाम: चिरायता, चिराता, अर्धतिक्ता, किरातिक्त नाढीतिक्ता                   औषधीय महत्व: चिरायता भारत वर्ष का एक बहुमूल्य औषधीय पौधा है तथा ज्वर रोग में इसके...

सेब की फसल में पोषण की कमी और उसका प्रबंधन Apple plants/ fruits may exhibit following specific visual symptoms as well as reduction in growth and yield under nutrient stress. Nutritional Deficiency Symptoms Nitrogen: Shoots short, thin, upright and spindly, leaves small, normal in shape with pale yellowish green colour in early stage followed by orange, red purple, yellow tints starting with the older leaves, blossoming and fruiting reduced, fruits small with marked reddening and poor storage qualities. Phosphorus: Shoots short, thin, upright and spindly, leaves small, with dull purple and bronze tints, early defoliation of older leaves, blossoming and fruiting reduced, bud break in spring may be delayed. Potassium: Growth restricted and branches die...

 फ्रूट क्रॉप्स में प्लांट जेनेटिक रिसोर्स का उपयोग Plant genetic resources in horticultural crops and their wild relatives are of immense value to mankind as they provide food, fodder, fuel, shelter and industrial products. India is the second largest fruit-producing country in the world. A number of problems including diseases, insects, pests and various disorders are associated with fruit growing in India these problems can solve by utilising of Plant genetic resources. Inferior quality of planting material and poor orchard management are some of the reasons for the low productivity. Plant genetic resources are of great importance as they form the basic raw material to meet current and future needs of crops...

मेंथा (पुदीना) की उन्नत खेती मेंथा का तेल व्यवसायिक रूप से महत्वपूर्ण योगदान रखता है। इसका व्यापक रूप से प्रयोग दवा उद्योग में किया जाता है। प्राचीन काल से ही मेंथा (पुदीना) को किचन गार्डनिंग में प्रयोग किया जाता था। प्राथमिक रूप से मेंथा के तेल में मेंथाल पाया जाता है। मेंथा के तेल का प्रयोग ज्यादातर टूथपेस्ट के स्वाद के रूप में , नहाने के साबुन में, चबाने वाली चिंगम तथा अन्य बहुत से खाद्य पदार्थों में इसका प्रयोग किया जाता है। ऐसा माना जाता है, कि मेंथा का जन्म स्थान भूमध्यसागरीय क्षेत्र के आसपास से हुआ है। और वहां से यहां विभिन्न देशों में समय-समय पर पहुंचाया जाता रहा है।...

सामान्य बीमारियों के लिए प्रमुख औषधीय पौधे प्राचीन काल से ही मनुष्य सामान्य रोगों के शमन के लिए अपने दैनिक जीवन में औषधीय पौधों का प्रयोग करते आ रहा है। इस आधार पर सामान्य रोगो के चिकित्सा को सर्वसुलभ तथा सस्ता बनाया जा सकता है। अपने पूरे जीवनकल में हम इन औषधीय पौधों का उपयोग किसी न किसी रूप में करते हैं। इनमें मारक गुण काम और शोधक अधिक होता है। ये औषधीय पौधे रोगों को दबाती नहीं, वरन उखाड़ती और भागती हैं।  जीवन-शक्ति संवर्धक औषधीय पौधे हमारे आस-पास ही खेतों, जंगलों में बहुताय उपलब्ध हैं। सही औषधीय पौधे उपुक्त क्षेत्र से, उपयुक्त मौसम में एकत्र की जाए, उन्हें सही ढंग से...