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Crop Cultivation

अलसी की वैज्ञानिक खेती Flax is an oldest grown fiber crop in the world. It is a self pollinated crop and the scientific name of flax is Linum usitatissimum L. (n= 15) Usitatissimum means ‘most useful’. Synonyms of flax are Linseed, Common flax, Lint bells, Toad flax, Flax weed and Alsi (in hindi). It belongs to the family Linaceae and genus Linum. Most believed that flax originated from Mediterranean Sea near India. Flax is an annual herbaceous plant of 12 to 48 inches height, leaves are linear, ovate or lanceolate attenuated at both end , flowers are small about 2.5 cm long and bluish violet in colour. The flowers have five petals; flowers are self-pollinated, although cross pollination is possible. The fruit is a round capsule, divided into five chambers and each chamber containing up to two seeds of yellow or brown colour (at maturity). Flax (Linseed) is a dual purpose crop grown for fiber and oil. The fiber obtained from the stem of flax type and oil from the seeds of linseed type. The flax seed contain 37 to 43 % oil. Most of the oil is used for manufacturing paints, varnishes, soaps, ink and very small amount of oil is used for edible purposes. Flax is cultivated in maximum part of India,...

चारा फसल जायद बाजरा की वैज्ञानिक खेती बाजरा शुष्क एवं अर्द्ध शुष्क क्षेत्रों में उगाई जाने वाली प्रमुख अनाजवर्गीय फसल है| इसकी खेती गर्मी और वर्षा ऋतू दोनों में की जाती है| यह अन्य चारा फसलो की अपेक्षा शीघ्रता से बढने वाली रोग निरोधक तथा अधिक कल्ले फूटने वाली चारे की फसल है। हरे चारे के लिए इससे कई कटाई ली जा सकती है| यह घनी पत्तीदार व सुकोमल होती है तथा इसका चारा स्वादिष्ट व पौष्टिक होता है| इसके चारे में प्रूसिक अम्ल नहीं होता है तथा ओक्सेलिक अम्ल भी कम होता है, इस वजह से गर्मियों में पशुओ के लिए यह अधिक सुरक्षित चारा रहता है| खरीफ के अलावा जायद में भी बाजरा की खेती सफलतापूर्व की जाने लगी है, क्योंकि जायद में बाजरा के लिए अनुकूल वातावरण जहॉ इसके दाने के रूप में उगाने के लिए प्रोत्साहित करता है वहीं चारे के लिए भी इसकी खेती की जा रही है। यह अकेले अथवा दलहनी फसलों के साथ मिलाकर इसकी खेती की जाती है। बाजरे की फसल से अधिक व गुणवत्तापूर्ण चारा उत्पादन हेतु किसान भाइयो को निम्न पहलू ध्यान में रखने चाहिए- भूमि का चुनाव व तैयारी: बलुई दोमट मिट्टी इसकी खेती के लिए अच्छी है। यह हल्की भूमि से भी भली प्रकार पैदा हो जाती है। भली भॉति समतल व...

आलू फसल में पोषक तत्वों की उपयोगिता एवं महत्व एक ही खेत में सघन फसल चक्र अपनाने एवं उर्वरकों की संतुलित एवं समुचित मात्रा में प्रयोग न करने तथा केवल नाइट्रोजन फास्फोरस एवं पोटाश युक्त उर्वरकों का इस्तेमाल करने से मिट्टी से प्राप्त होने वाले पोषक तत्वों की कमी प्रायः देखने में आती है। लगातार अच्छी उपज लेने के लिए आवश्यक है कि फसल को सभी पोषक तत्व समुचित मात्रा में मिलते रहें। सामान्यताः सभी पोषक तत्वों की कमी से पौधों में कुछ न कुछ कमी के लक्षण प्रकट हो जाते हैं तथा इन तत्वों की कमी से प्रायः पौधों की बढ़वार घट जाती है और रंग बदल जाता है यदि हम आलू के संदर्भ में विचार करें तो किसान अपने आलू के पौधों में पोषक तत्वों की कमी के लक्षणों को देखकर उन कमियों का पता लगा सकते हैं तथा कमियों को दूर करके अपनी फसल स्वस्थ बना सकते हैं। आलू के पौधों में विभिन्न पोषक तत्वों के अभाव से जो प्रभाव पड़ते हैं तथा जो लक्षण उत्पन्न होते हैं वह निम्नलिखित प्रकार से वर्णित किए जा सकते हैं। पोषक तत्वों की कमी से उत्पन्न लक्षणः संपूर्ण पौधों पर पड़ने वाले प्रभाव या पुरानी तथा निचली पत्तियों तक सीमित प्रभावअ. सामान्यतः भूमि में नाइट्रोजन और फास्फोरस की कमी होने पर पौधा पीला पड़कर सूखता...

ग्रीनहाउस में सीजन टमाटर की खेती आज बुनियादी खेती में दिलचस्पी नहीं रखते हैं, लेकिन ग्रीनहाउस जैसी नवीनतम कृषि तकनीकों की ओर उन्हें आकर्षित करना संभव है। इन दिनों उच्च गुणवत्ता वाली सब्जियों की मांग बढ़ रही है और इन मांगों को पूरा करने के लिए हमारे सब्जी उत्पादकों के लिए ऐसी संरक्षित सब्जी उत्पादन तकनीक को अपनाना आवश्यक है। ग्रीनहाउस प्रौद्योगिकी के माध्यम से प्रतिकूल परिस्थितियों जैसे भारी वर्षा, गर्मी, कीटों, वायरस रोगों आदि से सुरक्षित रखते हुए सब्जियों का उत्पादन करना संभव है। इस लेख में, हम आपको विस्तार से बताएंगे कि कैसे मौसम में टमाटर की खेती करना है। ग्रीनहाउस का प्रकार, लागत और सिंचाई प्रणाली स्वाभाविक रूप से हवा में ठंडा रहने वाला शून्य - ऊर्जा ग्रीनहाउस, ग्रीनहाउस के मुख्य प्रकारों में से एक है। ग्रीनहाउस बनाने के लिए इसकी कीमत लगभग 700 से 1000 रुपये प्रति वर्ग मीटर है। ग्रीनहाउस प्रणाली के लिए आवश्यक सिंचाई प्रणाली एक निम्न दबाव वाली सिंचाई प्रणाली है। आप 1.5 से 2.0 मीटर ऊंचे प्लेटफॉर्म पर 1000 लीटर पानी की टंकी लगा सकते हैं। उपयुक्त किस्में टमाटर का वजन जिसे आप ग्रीनहाउस खेती के लिए चुन रहे हैं, 100 से 120 ग्राम के बीच होना चाहिए। कुछ उपयुक्त किस्में DARL-303, लक्ष्मी, पूसा दिव्या, अबिमन, अर्का सौरभ, पंत बहार, अर्का रक्षक हैं। पूसा चेरी टमाटर- 1 चेरी टमाटर की विभिन्न किस्मों में...

सहजन एक जादुई पौधा सहजन या ड्रम्स्टिक ( moringa olieifera ) maringacea कुल के पौधे के बारे हम सभी जानते हैं की इसे सीजना,सुरजना, शोभाजन, इंडियन हार्सरैडिश आदि नामों से जानते हैं लेकिन इनके औषधीय गुणों के बारे मे बहुत कम ही लोग जानते हैं इसके जड़, पते, छाल और फलियों आदि भाग किसी न किसी रूप मे उपयोग लेते हैं इनके सभी भागों मे औषधीय गुण बहुत अधिक मात्रा मे होते हैं इसके पते एवं फलिया शरीर को ऊर्जा देने के साथ साथ शरीर मे विटामिन,खनिज एवं पोषक तत्व प्रदान करते हैं और शरीर मे उपस्थित हानिकारक या विषैले तत्वों को निकालने का काम करते हैं सहजन भारत,पाकिस्तान,बांग्लादेश और अफगानिस्तान की मूल वानस्पतिक पौधा हैं ! सहजन हमे संतरा से 7 गुना विटामिन सी ओर गाजर से 10 गुना विटामिन ए और दुध से  17 गुना कैल्सीयम तथा योगर्ट से 9 गुना अधिक प्रोटीन और केला से 15 गुना अधिक पोटेशियम तथा पालक से 25 गुना अधिक लौह तत्व की पूर्ति करते हैं ! सहजन के औषधीय महत्व  सहजन के पौधे के सभी भागों से आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं सहजन का पौधा आवश्यक  पोषक तत्वों का खजाना हैं सहजन की पत्तियों से आयरन, कैल्सीयम, पोटेशियम, जिंक, कॉपर तथा विटामिन जैसे विटामिन ए, विटामिन बी, विटामिन सी और विटामिन डी उपस्थित होते हैं ! सहजन की फलियों मे...

स्प्राउट ब्रोकोली: छत्तीसगढ़ सब्जी उत्पादन में रिवोल्यूशनरी उद्यम Sprout broccoli belongs to cruciferae family. Its botanical name is B. oleracea L. var. italica . Due to its cauliflower like appearance, sprouting broccoli or broccoli in the local parlance is known as ‘Hari Gobhi’, meaning green cauliflower. Broccoli with purple and white heads is grown in Italy. Broccoli is an Italian word, derived from the Latin branchium, meaning anarm or branch.  Broccoli has two distinct forms. One makes a dense, white curd like that of cauliflower and is called ‘heading broccoli’. The other makes a somewhat branching cluster of green flower buds atop a thick, green flower stalk. Small axillary heads/ sprouts arise from the stem at leaf axils. This form is called ‘sprouting broccoli’. Broccoli is an important vegetable among the Cole crops. It is a rich source of vitamins and minerals. In fact, it contains more vitamin A than cabbage and cauliflower and the highest amount of proteins among the Cole crops. It also contains anti-cancerous compounds and antioxidants. Broccoli is an excellent source of vitamins A and C and also a good source of folate. Dark green colour of broccoli is an indicator of its rich carotene content. Sulforaphane, indoles, β-carotene and phytochemicals, found in broccoli, are reported to have anti cancerous properties. Broccoli is also reported...

ग्वार का महत्त्व एवं उत्पादन की उन्नत तकनीक ग्वार शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में उगाई जाने वाली दलहनी फसल है जो कि एक अत्यन्त सूखा एवं लवण सहनशील है। अतः इसकी खेती असिंचित व बहुत कम वर्षा वाले क्षेत्रों में सफलतापूर्वक की जा सकती है। ग्वार शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के गऊ आहार से हुई है जिसका तात्पर्य “गाय का भोजन” है। विश्व के कुल ग्वार उत्पादन का लगभग 80 प्रतिशत भाग अकेले भारत में पैदा होता है जोकि 65 देशों में निर्यात किया जाता है। ग्वार की खेती प्रमुख रूप से भारत के उत्तर-पश्चिमी राज्यों (राजस्थान, हरियाणा, गुजरात, उत्तरप्रदेश एवं पंजाब) में की जाती है। हमारे देश के कुल ग्वार उत्पादक क्षेत्र का लगभग 87 प्रतिशत क्षेत्र राजस्थान के अन्तर्गत आता है। राजस्थान में ग्वार की खेती मुख्यतः चुरू, नागौर, बाडमेर, सीकर, जोधपुर, गंगानगर, सिरोही, दौसा, बीकानेर, हनुमानगढ एवं झुन्झुनू में की जाती है। ग्वार का महत्त्व- ग्वार एक बहुउद्देशीय फसल है जिसका प्राचीनकाल से ही मनुष्य एवं पशु आहार के लिए महत्त्व रहा है। इसमें प्रोटीन, घुलनशील फाइबर, विटामिन्स (के, सी, ए), कार्बोहाइड्रेट के साथ-साथ प्रचुर मात्रा में खनिज, फास्फोरस, कैल्शियम, आयरन एवं पौटेशियम आदि भी पाया जाता है। इसकी ताजा व नरम हरी फलियों को सब्जी के रूप में खाया जाता है जो कि पौष्टिक होती है। ग्वार फली विभिन्न रोगों जैसे -...

ड्रैगन फ्रूट: स्वास्थ्य लाभ और खेती The dragon fruit commonly refers as Pithaya, ‘wonderous Fruit’ is to ring in a revolution in the Indian horticulture scenario. In the last few years fruit has become very popular among farmers as well as consumers due to its enormous health benefits. The fruit originally native to Central America and extensively cultivated around the world including Thailand, Malaysia, Vietnam, Sri Lanka, Bangladesh and now knocking at our door in India. The tree belongs to the genus hylocereus and a cactus vine by nature. The tree grows fast and requires a support system (a vertical pole) to grow vertically and a ring-like umbrella structure to supports its hanging branches. The tree has a life span of 15-20 years and is merely affected by pests and diseases. However, excess heat cause sunburn which can be remedial easily.     Nutritional information Dragon fruit is referred as to be one of the tropical super foods due to its nutrient richness. The dragon fruit is a rich source of protein, fat, vitamins, fibers, and various minerals and nutrients. On average, the consumption of 100 grams of dragon fruit gives 60 kcal energy, 194g protein, 41g fat, 8g fiber, 85mg carotene, 7.55 mg calcium, 33.15 mg phosphorous, 6 mg iron, 1615 mg vitamin B1, 44...