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Problem faced by the farmers of Rohru-Shimla in the production and marketing of apple crop हिमाचल प्रदेश मुख्य रूप से एक समशीतोष्ण पहाड़ी राज्य है जो वाणिज्यिक समशीतोष्ण फलों जैसे कि सेब, आड़ू, बेर, खुबानी, अखरोट, स्ट्रॉबेरी और चेरी इत्यादि के उत्पादन के लिए जाना जाता है। हिमाचल प्रदेश के 12 जिलों में से शिमला, कुल्लू, किन्नौर, मंडी, सिरमौर और चंबा में सेब का उत्पादन होता है और इन जिलों में से शिमला और कुल्लू सेब के उत्पादन की दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण जिले हैं। रोहरु शिमला जिले का एक पहाड़ी खंड है जो कि सेब के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है। रोहरू देशांतर 77.45° और 77.75° E और अक्षांश 31.12° और...

Agricultural Drone is a modern and contemporary version of precision agriculture ड्रोन एक मानव रहित छोटा विमान है जिसे दूर से नियंत्रित किया जा सकता है या यह स्वायत्त रूप से उड़ सकता है। इसमें एक जीपीएस आधारित नेविगेशन सिस्टम। कई तरह के सेंसर और एक नियंत्रक होता है। यह बैटरी आधारित ऊर्जा पर काम करता है। नियंत्रक से इसे उड़ाया और नियंत्रित किया जाता है। इस पर अंतिम उपयोग के आधार पर कई तरह के उपकरण जैसे कि कैमरा, कीटनाशक छिड़काव यंत्र आदि भी लगे होते हैं। वर्तमान बजट में खेती में ड्रोन तकनीकी को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय दिशानिर्देशों को अधिसूचित किया गया है। यह भारत सरकार द्वारा कृषि...

Wheat bran consumption is beneficial भारत में उगाई जाने वाली फसलों में गेहूँ एक प्रमुख अनाज की फसल है। गेहूँ के दाने से प्राप्त उच्च कैलोरी के कारण  दुनिया की एक तिहाई से भी अधिक आबादी द्वारा उपभोग की जाने वाली प्रमुख खाद्य फसल है। गेहूँ एक पौष्टिक अनाज होने के साथ-साथ प्रोटीन, खनिज, विटामिन बी एवं आहार रेशा का भी एक समृद्ध स्रोत है। भारत में इसकी खेती लगभग 31 मिलियन हैक्टर क्षे़त्रफल पर की जाती है, जिससे गेहूँ का उत्पादन लगभग 110 मिलियन टन होता है (2021)। गेहूँ के बीज के तीन अलग-अलग भाग होते हैं जिन्हे चोकर, एंडोस्पर्म एवं जर्म के नाम से जाना जाता है। आटे के उत्पादन...

Maintenance of farm machinery कृषि हमारा जीवन है। यह हमारे देश एवं राज्य की अर्थव्यवस्था का मेरुदण्ड है। राज्य में ही नही पुरे देश में प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता है पर आज आवश्यकता है इन संसाधनों के वैज्ञानिक उपयोग से कृषि उत्पादकता को शीघ्र बढ़ाने की, इसलिए कृषि यंत्रों का योगदान कृषि में पैदावार बढ़ाने के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है । इन यंत्रों की आवयकता खेत की तैयारी से लेकर अनाज को बाजार पहुँचाने तक प्रत्येक कार्य में होता है। अतः इन उन्नत कृषि यत्रों के रख रखाव के बारे में जाने बिना उन्हें प्रयोग करने से किसान भाइयों की परेशानी बढ़ जाने की संभावना है। इसलिए किसी भी यंत्र को...

एकीकृत चावल और पशुधन खेती In the scenario of declining trend of availability of land for agriculture and size of land holding, one of the serious threats to our national food security is providing food security to our growing population. Diversion of agricultural land for industrialisation restricts horizontal expansion. Vertical integration of land based enterprises within the socio-economic environment of small and marginal farmer is the only option. Integrated farming systems are viewed as a sustainable alternative for enhancing livelihood security of small and marginal farmers. Objectives of Integrated Farming System: It includes reversing resource degradation, Stabilising farm income, Efficient soil management, Recycling of farm waste and nutrients, Minimisation of adverse environmental impacts, Sustainability...

Stubble Burning in India: Problems and Mitigation Strategies जहां एक तरफ भारत कोविड-19 से जंग लड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ हम पर्यावरणीय स्थिरता के साथ-साथ वैश्विक स्वास्थ्य के प्रति अपनी जिम्मेदारी को नहीं भूल सकते। पूरा विश्व एक सांस की बीमारी से जूझ रहा है। इस स्थिति में वैज्ञानिक वायु प्रदूषण में मध्यस्थता में वृद्धि के कारण उत्तर भारत में अधिक श्वसन हानि की भविष्यवाणी कर रहे हैं। जो राज्य कभी भारत में हरित क्रांति का लाभ हथियाने में कामयाब रहे थे, वे वर्तमान में उसी की भारी संख्या में कमियों से पीड़ित हैं। पिछले कुछ वर्षों में पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी यूपी के किसान विशेष-उच्च उपज देने वाली चावल-गेहूं फसल...

Impact of Covid-19 Pandemic on Agriculture and Allied Sectors वर्ष 2020 के पूर्वार्ध में शुरू हुए वैश्विक स्वास्थ्य संकट (कोविड-19 महामारी) का वैश्विक और भारतीय अर्थव्यवस्थाओं पर बहुत ही प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। वही अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF, 2020) ने दुनिया के सकल घरेलू उत्पाद में 3 प्रतिशत की गिरावट और भारत के सम्बन्ध में 1.9% की एक बहुत ही मामूली विकास दर का अनुमान लगाया था। जब की अन्य विभिन्न एजेंसियों ने अपने आकलन में भारत की सकल घरेलु उत्पाद में 0.2-0.5 प्रतिशत तक के गिरवाट का अनुमान लगाया था। आज लगभग दो साल के बाद, महामारी के उत्तारर्ध में अगर पूरी दुनिया के विभिन्न पहलुओं जैसे सामाजिक, आर्थिक और राजनितिक इत्यादि...

Food Security in the Age of Climate Change through Coarse Cereals जलवायु परिवर्तन का भारत जैसे उभरते देशों की खाद्य सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर बड़ा प्रभाव पड़ा है। यह खाद्य उपलब्धता, खाद्य पहुंच, खाद्य उपयोग और खाद्य प्रणाली स्थिरता को प्रभावित करता है जो खाद्य सुरक्षा के चार आयाम है। वर्तमान स्थिति में विश्व में हर तरफ जलवायु परिवर्तन के कारण मुख्य खाद्य फसलों की उत्पादकता पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। कृषि विशेषज्ञ बारिश की बढ़ती अनियमतता और फसलों के पकाव के समय अत्यधिक तापमान के प्रतिकूल प्रभाव से फसलों को बचाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे है। मोटे अनाज वाली फसलों में अन्य खाद्य फसलों के मुकाबले सूखे...