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प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY)  की समीक्षा Farmers' produce is insured by the Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana (PMFBY). PMFBY is being restructured through several initiatives such as introduction of competitive bidding for premium quotes from insurers and use of artificial intelligence (AI) based technologies for timely assessment of crop , yield data for quick claim settlement. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY)  की समीक्षा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) द्वारा किसानों की उपज का बीमा किया जाता है।  Pradhanmantri Fasal Bima Yojana को 18 फरवरी, 2016 को पेश किया गया था। इसका उद्देश्य किसानों पर प्रीमियम के वित्तीय बोझ को कम करना और पूरी बीमा राशि के लिए फसल बीमा दावों का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित करना है। किसानों की आय को स्थिर करने के लिए, PMFBY का इरादा फसल की विफलता के खिलाफ एक व्यापक बीमा कवर की पेशकश करना है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) का उद्देश्य पिछले दो कार्यक्रमों ,राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना (NAIS) और संशोधित राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना (MNAIS), को बदलना और उनके बेहतरीन तत्वों को जोड़कर और उनकी खामियों को दूर करना था।  प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) ने जमा किए गए किसान आवेदनों के मामले में दुनिया की अन्य सभी फसल बीमा योजनाओं को पीछे छोड़ दिया है। यह योजना अपनी पूर्ववर्ति कृषि बीमा योजनाओ की तुलना...

खेती में लाभकारी कीटों का आर्थिक महत्व Some insects are beneficial to agriculture, while many are destructive. About a third of the world's crop production depends directly or indirectly on insect pollination. About 80% of flowering plants on Earth are pollinated by insects. Examples of pollinators are bees (75-80%), butterflies, flies, beetles, thrips, etc. कीट पृथ्वी पर सबसे प्रमुख प्रजातियों में से एक हैं। दुनिया में कीटों की प्रजातियां बहुत तेजी से घट रही हैं, अगर कीट प्रजातियों के विलुप्त होने को नहीं रोका जा सका तो मानव जाति के अस्तित्व के लिए विनाशकारी परिणाम होंगे। सभी कीट हानिकारक नहीं होते, कुछ कीट खेेेती के लिए फायदेमंद होते हैं, जबकि कई विनाशकारी होते हैं। जब तक उनका जनसंख्या घनत्व निश्चित सीमा (ETL) को पार नहीं कर जाता उनसे होने वाले नुकसान की तुलना में लाभ अधिक हैं। दोनों कारणों से, कीटों का बहुत आर्थिक महत्व है और इसका अध्ययन कीट विज्ञान विभाग में एक महत्वपूर्ण विषय है। फोरेंसिक अध्ययन में भी कीट का उपयोग किया जाता है। कीट साक्ष्य अक्सर सबसे सटीक और कभी-कभी मृत्यु के बाद बीता हुआ समय निर्धारित करने का एकमात्र तरीका होता है। कीटों के लाभकारी प्रभाव औद्योगिक महत्व, औषधीय और अनुसंधान के कीट कई कीट जैसे मधुमक्खियाँ, रेशम-कीट और लाख कीट विभिन्न उत्पादों के उत्पादन के लिए जिम्मेदार हैं, जो मनुष्य...

पराली जलाने के नुकसान और रोकने के उपाय Stubble burning is not only harming the environment, but by doing so the fertility of the land is also decreasing. The innovations can help farmers to manage crop residue effectively by using agricultural machines like Happy Seeder, Rotavator, Baler, Paddy Straw Chopper, etc. पराली जलाने के नुकसान और रोकने के उपाय भारत में वायु प्रदूषण एक बड़ी समस्या है जिसके लिए अनेक कारण जिम्मेवार हैं। इनमें से एक कारण पराली भी है। पता चला है कि देश में फसलों के बचे अवशेषों को जलाने से न केवल वायु गुणवत्ता खराब हो रही है, साथ थी इसकी कीमत इंसानी जीवन के रुप में भी चुकानी पड़ रही है। जो राज्य कभी भारत में हरित क्रांति का लाभ हथियाने में कामयाब रहे थे, वे वर्तमान में उसी की भारी संख्या में कमियों से पीड़ित हैं। पिछले कुछ वर्षों में पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी यूपी के किसान विशेष-उच्च उपज देने वाली चावल-गेहूं फसल प्रणाली में चले गए हैं, जिसे “कुशल” माना जाता है, लेकिन पर्यावरण और स्वास्थ्य की भारी कीमत चुकानी पड़ती है। दिल्ली, एनसीआर में विशेष रूप से उत्तर भारत में किसानों द्वारा पराली जलाने को दिल्ली में वायु प्रदूषण का एक प्रमुख कारण माना जाता है। पराली जलाना खेत से कृषि अपशिष्ट को हटाने की एक प्रथा है...

बाजरा  प्रसंस्करण: स्वास्थ्य एवं आर्थिक स्तर में सुधार Processing refers to such activities by which value addition of primary agricultural products is done . Processing also increases the nutritional value of crop products and can also keep them safe for a long time. Traditionally only a few dishes are prepared from millet . In order to increase the variety and taste in the food, an attempt has been made by the Home Science Unit of Krishi Vigyan Kendra to prepare dishes like millet cake, sprouted millet-moth chaat, shakkarpare, which are as follows बाजरा  प्रसंस्करण: स्वास्थ्य एवं आर्थिक स्तर में सुधार हमारा देश भारत जैव विविधता की दृष्टि से समृद्ध देशों में गिना जाता है। यहाँ खाद्यान्न, दलहन, तिलहन, फल एवं सब्जियों का उत्पादन बड़े पैमाने पर हो रहा है। परन्तु उपलब्ध आंकड़ों पर ध्यान दे तो प्रतिवर्ष कुल उत्पादन का लगभग 18 प्रतिशत भाग विभिन्न कारणों से खराब हो जाता है क्योंकि तकनीकि ज्ञान के अभाव में उपलब्ध संसाधनों का समुचित उपयोग नहीं हो पाता  है। बदलते सामाजिक परिवेश में अब लोगों की आय बढ़ाने के साथ – साथ स्वास्थ्य एवं पोषण की और भी जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है । खाद्य प्रसंस्करण:   प्रसंस्करण का तात्पर्य ऐसी गतिविधियों से है जिनके द्वारा प्राथमिक कृषि उत्पादों को प्रसंस्कृत कर मूल्य संवर्धन किया जाता है।  प्रसंस्करण...

शहद उत्पादन इकाई (मधुशाला) का मौसमी प्रबंधन Bees can be affected by diseases and before any control measures can be taken, the actual cause of any abnormality in the brood or any disease must be ascertained. After accurate diagnosis of the causative agent of a particular bee disease, the guidelinesgiven by the expert should be followed. However, below is general advice for managing common diseases of bees: शहद उत्पादन इकाई (मधुशाला) का मौसमी प्रबंधन ग्रीष्मकालीन प्रबंधन (i) कॉलोनियों को घनी छाया में रखें (ii) मध्याह्न के समय मधुशाला में ऊपरी आवरण पर गीली बोरियों का उपयोग करके और कालोनियों के चारों ओर पानी का छिड़काव करके मधुमक्खी पालन गृह के माइक्रॉक्लाइमेट को नियंत्रित करें। (iii) कॉलोनी के प्रवेश द्वार को चौड़ा करके कॉलोनी में उचित वेंटिलेशन प्रदान करें, मल्टी चैंबर कॉलोनियों को अतिरिक्त गेट प्रदान करें, ताजी हवा के पारित होने के लिए दो आसन्न कक्षों के बीच पतली छोटी छड़ी के टुकड़े रखें, फ्रेम की संख्या को 1 से कम करें और कक्ष में 9 की अनुमति दें (iv) मधुशाला में/ के पास ताजा पानी उपलब्ध कराएं मानसून प्रबंधन (i) मधुमक्खी पालन स्थल में नमी से बचें और उचित जल निकासी प्रदान करें (ii) नीचे के बोर्ड पर पड़े मलबे को साफ और गहरा गाड़ दें (iii) अवांछित वनस्पतियों को काटकर कॉलोनी के आसपास के वातावरण को साफ रखें जिससे...

फसल अवशेष प्रबंधन की आवश्यकता Burning of crop residues has a bad effect on the number of micro-organisms present in the soil and burning of crop residue destroys all types of beneficial micro-organisms in the most active layer of soil up to 15 cm. Burning crop residues reduces the number of friendly insects like earthworms, spiders. This does not lead to natural control of harmful insects, resulting in the use of costly insecticides. फसल अवशेष प्रबंधन की आवश्यकता भारत में पहले खेती केवल जीविकोपार्जन के लिए किया जाती थी लेकिन धीरे धीरे खेती ने व्यवसाय का रूप ले लिया है। किसान अधिक उपज प्राप्त करने के लिय अंधाधुंध रासायनिक उर्वरक, कीटनाशकों का प्रयोग कर रहा है जिससे मृदा के साथ-साथ पर्यावरण पर भी हानिकारक प्रभाव हो रहा है फसल अवशेष को जलाना भी एक पर्यावरण तथा मृदा प्रदूषण का महत्वपूर्ण कारण है। पिछले कुछ वर्षों में एक समस्या मुख्य रूप से देखी जा रही है कि जहां हार्वेस्टर के द्वारा फसलों की कटाई की जाती है उन क्षेत्रों में खेतों में फसल के तने के अधिकतर भाग खेत में खड़े रह जाते हैं। तथा वहां के किसान खेत में फसल के अवशेषों को आग लगाकर जला देते हैं। खरीफ सीजन में 500 लाख टन फसल अवशेष का उत्पादन होता है। फसल के अवशेषों का सिर्फ...

जलवायु परिवर्तन पर काबू पाने के लिए किसानों की अनुकूलन/ शमन रणनीतियां Climate change is a global phenomenon which refers to long term changes of temperature and weather patterns. Major variations in temperature like extreme coldness in winter or extreme heat during summer occurs rapidly. Moreover alterations in seasonal rainfall also occurs leading to flash flood or off-season drought period. Climate change is caused by various factors out of which the main cause is human alterations to the environment. Since the 1800s, various human activities are mainly responsible for the change in climate which include activities like burning of fossil fuels (coal, oil, gas), deforestation, etc. Since the nineteenth century, anthropogenic activities have caused an increase in average temperature of 0.9 °C, primarily as a result of greenhouse gas (GHG) releases into the atmosphere. Given the rate of deforestation, the increase in GHG emissions, and the pollution of the soil, water, and air, it is predicted that this rise will be 1.5 °C by 2050, though it may even be higher. Change in climate also disrupts the agriculture sector as it reduces the availability of food due to reduction in food productivity, lack of water availability, presence of problematic soil conditions like salinity, lack of easy access to food, etc.  It not only affects the...

फसल सुधार में जैव प्रौद्योगिकी की भूमिका कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था का मूल आधार है, भारत की लगभग 65-70 प्रतिशत आबादी प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है, लेकिन इस बदलते परिवेश में जहाँ बढ़ती आबादी के कारण कृषि जोत सिकुडती जा रही है, वहीं बदलती हुई जलवायुवीय परिस्थितियों ने कृषि स्थति को और भयावाह बना दिया है। कहीं पानी की कमी के कारण बुवाई पर रोक है, तो कहीं अधिक पैदावार की वजह से उपज की पर्याप्त कीमत नहीं मिल पा रही है। हरित क्रांति ने उपज तो बढ़ा दी है, लेकिन बदलते वक्त में खेती के सामने अलग चुनौतियां भी पैदा कर दी हैं। ऐसी खोज जरूरी है, जो क्लाइमेटिक जोन और पानी की उपलब्धता को देखते हुए कृषि उत्पादकता को बढ़ा सके। घटते प्राकृतिक संसाधनों और बढ़ती आबादी की खाद्य सुरक्षा को देखते हुए कृषि क्षेत्र की चुनौतियां बढ़ गई हैं। आधुनिक कृषि हमेशा भारतीय अर्थव्यवस्था का सबसे प्रमुख क्षेत्र रहा है इसके अतिरिक्त भारत गेहूं, चावल, दालें, मसालों और कई उत्पादों के दुनिया के सबसे बड़े उत्पादक के रूप में उभरा है। आज कोई भी क्षेत्र तकनीकी से अछूता नहीं है। इसमें कृषि एक ऐसा क्षेत्र है जिस पर पूरा मानव जीवन चक्र निर्भर करता है और इसमें तकनीकी का अहम योगदान है। देश की जीडीपी में कृषि क्षेत्र...