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टमाटर की फसल को कीटों से कैसे बचाएं: एकीकृत प्रबंधन तकनीक

टमाटर की फसल को कीटों से कैसे बचाएं: एकीकृत प्रबंधन तकनीक

Tomato Pest Management: टमाटर की फसल के प्रमुख कीट और उनका नियंत्रण

टमाटर एक बहुत ही मुनाफ़ेदार और सालभर होने वाली सब्ज़ी की फ़सल है, जो दुनिया भर के कई छोटे और प्रगतिशील किसान परिवारों की आमदनी का मुख्य आधार है। हालांकि, टमाटर की खेती में एक बहुत बड़ी चुनौती है क्योंकि हानिकारक कीट नर्सरी के समय से लेकर आख़िरी कटाई तक फ़सल पर लगातार हमला करते हैं। यदि किसान समय पर इन कीटों का प्रबंधन नहीं करते हैं, तो वे आसानी से अपनी कुल उपज का 80% तक खो सकते हैं, जिससे बाज़ार में होने वाला मुनाफ़ा ख़त्म हो जाता है और किसानों की कड़ी मेहनत, पानी व ज़मीन जैसे संसाधन पूरी तरह बर्बाद हो जाते हैं। इन विनाशकारी कीटों से लड़ने के लिए, कई किसान घबरा जाते हैं और भारी मात्रा में लगातार अंधाधुंध रासायनिक कीटनाशकों का छिड़काव करने लगते हैं। दुर्भाग्य से, रसायनों का बहुत अधिक उपयोग एक ख़तरनाक जाल की तरह काम करता है। इससे खेती की लागत बढ़ जाती है, टमाटर के फलों पर ज़हरीले रासायनिक अवशेष रह जाते हैं और सब्ज़ियां उपभोक्ताओं के खाने के लिए असुरक्षित हो जाती हैं। इससे भी बदतर बात यह है कि बार-बार छिड़काव करने से कीटों में इन रसायनों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता (सहनशक्ति) आ जाती है, जिससे वे ऐसे “सुपर-बग” बन जाते हैं जिन्हें महँगे रसायन भी नहीं मार पाते। साथ ही, यह छिड़काव अनजाने में किसानों के प्राकृतिक मित्र जैसे मधुमक्खियों और मकड़ियों को भी नष्ट कर देता है।

इससे बचने का एकमात्र टिकाऊ और समझदारी भरा रास्ता एकीकृत कीट प्रबंधन (आईपीएम – Integrated Pest Management) को अपनाना है। यह तरीक़ा एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है जो कम लागत में कीटों को नियंत्रित करता है और खेत के वातावरण को भी सुरक्षित रखता है। रसायनों पर आँख मूँदकर निर्भर रहने के बजाय, आईपीएम में कई व्यावहारिक तरीक़ों को एक साथ मिलाया जाता है—जैसे गर्मियों में गहरी जुताई करना (सांस्कृतिक तरीक़ा), नर्सरी पर नायलॉन की जाली लगाना व रंग-बिरंगे चिपचिपे (sticky) जाल का उपयोग करना (यांत्रिक तरीक़ा), और मित्र कीटों व प्राकृतिक नीम के अर्क का उपयोग करना (जैविक तरीक़ा)। इसमें रसायनों का उपयोग केवल आख़िरी उपाय के रूप में किया जाता है, जिससे किसान अपने ख़र्चों को कम कर सकते हैं, बेदाग़ व उच्च गुणवत्ता वाले टमाटर उगा सकते हैं और अपनी मिट्टी के स्वास्थ्य की रक्षा कर सकते हैं। वर्ष 2023-24 में भारत में टमाटर का क्षेत्रफल, उत्पादन और उत्पादकता क्रमशः 854 हजार हेक्टेयर, 21,323.2 हजार मीट्रिक टन और 25 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर रहा, जबकि राजस्थान में यह क्रमशः 20.47 हजार हेक्टेयर, 2.53 लाख मीट्रिक टन एवं 12.35 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर रहा। राज्य में जयपुर जिला टमाटर उत्पादन में शीर्ष स्थान पर है, जहाँ चोमू, नांगल भरदा, हाथनोदा, गोविंदगढ़ और शाहपुरा मुख्य उत्पादक बेल्ट हैं। इस क्षेत्र की रेतीली दोमट मिट्टी तथा आधुनिक ड्रिप इरीगेशन (टपकन सिंचाई) तकनीक उन्नत किस्म के हाइब्रिड टमाटरों की बंपर पैदावार में मदद करती है, जिससे यहाँ की चोमू मंडी टमाटर व्यापार का प्रमुख केंद्र बन चुकी है। लेकिन इसमें लगने वाले हानिकारक कीट और पेस्ट (जैसे फल छेदक) फसलों को भारी नुकसान पहुँचाकर पैदावार को प्रमुख रूप से कम कर देते हैं। इसके बावजूद, हमारे जोबनेर (जयपुर) में भी कृषक टमाटर की खेती अच्छा मुनाफा प्राप्त करने के लिए करते हैं।यदि किसान वैज्ञानिक विधि से कीट प्रबंधन करें तो इससे होने वाले नुकसान को आराम से बचाया जा सकता है।

टमाटर की फसल के प्रमुख हानिकारक कीट और उनके लक्षण

टमाटर का फल छेदक (Tomato Fruit Borer – Helicoverpa armigera) — सबसे बड़ा दुश्मन

टमाटर का फल छेदक दुनिया भर में टमाटर की फसल को नुकसान पहुँचाने वाला सबसे विनाशकारी, आक्रामक और लालची कीट है। यदि समय रहते इसकी पहचान और प्रबंधन न किया जाए, तो यह अकेले ही आपकी पूरी मौसमी लागत को बर्बाद कर सकता है। इस खतरनाक कीट का जीवन चक्र तब शुरू होता है जब इसकी वयस्क मादा कीट—जो कि मजबूत, भूसे जैसी पीली और पंखों पर गहरे धब्बों वाली एक पतंगा (moth) होती है—पौधे की कोमल पत्तियों और फूलों की कलियों के पास सैकड़ों छोटे, पीले-सफेद अंडे देती है। कुछ ही दिनों में, इन अंडों से छोटे और बेहद भूखे कीट (कैटपिलर) बाहर निकल आते हैं। शुरुआती चरणों में, ये छोटे कैटपिलर कोमल पत्तियों की हरी सतह को खुरच कर खाते हैं और खुद को पत्तियों तक ही सीमित रखते हैं। लेकिन जैसे-जैसे वे अपनी त्वचा बदलते हैं और बड़े होते हैं, वे सीधे अपने मुख्य आर्थिक लक्ष्य यानी टमाटर के फलों की तरफ बढ़ते हैं। ये कैटपिलर फलों की त्वचा को सीधे चबाते हुए छोटे-बड़े हरे और पकने वाले टमाटरों में बड़े व असमान छेद कर देते हैं।

इसके नुकसान की पहचान कैसे करें: इस कैटपिलर की एक अनोखी और अचूक आदत यह है कि यह टमाटर के फल के अंदर पूरी तरह से नहीं छिपता। इसके बजाय, यह अपने शरीर का अधिकांश हिस्सा छेद से बाहर लटकाए रखता है और केवल अपना सिर और आगे के पैर फल के अंदर घुसाकर उसके अंदर के रसीले गूदे को मजे से खाता है।

बात को और बिगाड़ने के लिए, एक अकेला कैटपिलर बहुत बेचैन और लालची होता है; वह शायद ही कभी एक फल के अंदर टिकता है। वह अपने बढ़ने के दौरान एक ही गुच्छे के तीन से आठ अलग-अलग टमाटरों में एक के बाद एक छेद करता जाता है। भले ही वह आगे बढ़ने से पहले किसी फल में केवल कुछ ही बाइट (कट) क्यों न मारे, लेकिन उन खुले छेदों के कारण बारिश का पानी, फंगस (उल्बी) और बैक्टीरिया फल के अंदर चले जाते हैं। इससे फल का अंदरूनी गूदा सड़ जाता है, उसमें से बदबू आने लगती है और कटाई से पहले ही वह असमय जमीन पर गिर जाता है। एक ही गुच्छे के सबसे अच्छे फलों को बर्बाद करके, यह फल छेदक आपकी फसल के बाजार भाव को पूरी तरह खत्म कर देता है, जिससे सही समय पर इसका प्रबंधन करना आपकी सबसे पहली प्राथमिकता बन जाता है।

चना कटवर्म / कटुआ कीट (Gram Cutworm – Agrotis ipsilon) — नर्सरी का रात का हमलावर

कटुआ कीट मिट्टी में रहने वाला एक छुपा रुस्तम कीट है, जो टमाटर के शुरुआती विकास के दौरान, विशेष रूप से नर्सरी से पौधों को मुख्य खेत में लगाने (transplant करने) के तुरंत बाद भारी नुकसान पहुँचाता है। पत्तियों पर रहने वाले अन्य कीटों के विपरीत, इसके कैटपिलर दिन की तेज धूप के दौरान मिट्टी की सतह के नीचे या फसल के कचरे (सूखी पत्तियों) के नीचे छिपे रहते हैं। वे केवल रात के अंधेरे में खाना खाने के लिए बाहर निकलते हैं।

इसके नुकसान की पहचान कैसे करें: कटुआ कीट के हमले का सबसे आम लक्षण यह है कि खेत में टमाटर के स्वस्थ युवा पौधे मिट्टी की सतह के ठीक ऊपर, अपने तने के निचले हिस्से से पूरी तरह कटे हुए मिलते हैं। यह कैटपिलर आमतौर पर पौधे का केवल एक बहुत छोटा हिस्सा खाता है और बाकी का पौधा जमीन पर मुरझाकर मरने के लिए छोड़ देता है। जब किसान ताजे कटे हुए पौधे के आसपास की ऊपरी मिट्टी को हल्का सा खोदते हैं, तो उन्हें एक मोटा, गहरे भूरे या भूरे रंग का, चिकना दिखने वाला कैटपिलर मिलता है, जो छूने पर तुरंत एक ‘C’ आकार में कसकर मुड़ जाता है। यदि इसे बेकाबू छोड़ दिया जाए, तो कटुआ कीटों की एक छोटी सी आबादी कुछ ही रातों में खेत की पूरी लाइन को साफ कर सकती है, जिससे किसानों को दोबारा पौधा लगाने का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है।

सफेद मक्खी (Whitefly – Bemisia tabaci) — वायरस फैलाने वाला मूक दुश्मन

सफेद मक्खियां सूक्ष्म, नाजुक और सफेद पंखों वाले कीड़े हैं जो टमाटर की पत्तियों के निचले हिस्से में भारी संख्या में जमा होते हैं। जब आप इसके प्रकोप वाले पौधे को हिलाते हैं, तो छोटी सफेद धूल जैसे कीड़ों का एक बादल उड़ता हुआ दिखाई देता है और फिर वापस पत्तियों पर बैठ जाता है। इसके वयस्क और उनके स्केल जैसे दिखने वाले बच्चे (nymphs) दोनों ही लगातार पत्तियों को छेदकर उनका महत्वपूर्ण रस चूसते हैं, जिससे पत्तियां अंततः पीली, सूखी और कमजोर हो जाती हैं।

हालांकि, इनका सीधे रस चूसना ही सबसे बड़ा खतरा नहीं है। असली खतरा छिपा हुआ है: सफेद मक्खियां उड़ती हुई सूइयों की तरह काम करती हैं जो संक्रमित खरपतवारों से लेकर स्वस्थ टमाटर के पौधों में घातक ‘टमाटर लीफ कर्ल वायरस‘ (Tomato Leaf Curl Virus – TLCV / मट्ठा रोग) फैलाती हैं। एक बार जब किसी पौधे को यह वायरस लग जाता है, तो उसका कोई इलाज नहीं होता। पौधे का विकास पूरी तरह से रुक जाता है और वह एक ठूंठदार, झाड़ीदार रूप ले लेता है। पत्तियां कसकर सिकुड़ जाती हैं और ऊपर व अंदर की ओर मुड़कर छोटी चमड़े की कटोरी जैसी दिखने लगती हैं। ऐसा पौधा बाजार में बिकने लायक एक भी फल नहीं बना पाता, जिससे पूरी फसल बर्बाद हो जाती है।

सर्पेन्टाइन लीफ माइनर / पत्ती सुरंगक (Serpentine Leaf Miner – Liriomyza trifolii) — पत्तियों में सुरंग बनाने वाला

इस कीट को पहचानना बेहद आसान है क्योंकि यह आपकी फसल पर सफेद रंग के साफ और स्थायी निशान छोड़ देता है। यदि आप अपनी टमाटर की पत्तियों को ध्यान से देखें और सतह पर साफ, घुमावदार, सांप जैसी सफेद लकीरें या सुरंगें दिखाई दें, तो समझ लें कि आपके खेत में लीफ माइनर का प्रकोप है। इसका वयस्क एक छोटी मक्खी होती है जो पत्ती के ऊतकों (tissue) के अंदर अपने अंडे देती है। एक बार जब अंडों से कीड़े (maggots) बाहर आते हैं, तो वे पत्ती की ऊपरी और निचली परतों के बीच सुरक्षित रूप से रहते हैं। वे आगे की ओर चबाते हुए सुरंग बनाते हैं और उस हरे क्लोरोफिल को खा जाते हैं जिसका उपयोग पौधा धूप से भोजन (प्रकाश संश्लेषण) बनाने के लिए करता है। जैसे-जैसे ये सुरंगें चौड़ी और बढ़ती जाती हैं, पत्ती पौधे को पोषण देने की क्षमता खो देती है। गंभीर मामलों में, पत्तियां भूरे कागज की तरह सूख जाती हैं और समय से पहले गिर जाती हैं, जिससे बढ़ते हुए टमाटरों पर सीधी तेज धूप पड़ती है (sunscald) और उनकी बाजार की गुणवत्ता खराब हो जाती है।

थ्रिप्स (Thrips) — रस खुरचने वाले कीट

थ्रिप्स इतने छोटे होते हैं कि इन्हें नग्न आंखों से देख पाना लगभग असंभव होता है। ये सूक्ष्म, पतले कीड़े होते हैं जो फूलों की कलियों के अंदर और नई पत्तियों के नीचे छिपे रहते हैं। सीधे रस चूसने के बजाय, ये अपने नुकीले मुंह से पत्तियों और कलियों की कोमल सतह को बेरहमी से खुरचते हैं और फिर वहां से निकलने वाले पौधे के रस को चाटते हैं।

इस खुरचने की वजह से पत्तियों पर साफ, चमकदार, चांदी जैसी सफेद लकीरें और भूरे रंग के धब्बे बन जाते हैं। जैसे-जैसे हमला बढ़ता है, पत्तियां बुरी तरह विकृत हो जाती हैं, किनारों से ऊपर की ओर मुड़ जाती हैं और सूख जाती हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सफेद मक्खी की तरह ही थ्रिप्स भी बहुत खतरनाक हैं क्योंकि वे ‘टमाटर स्पॉटेड विल्ट वायरस‘ (Tomato Spotted Wilt Virus – TSWV) को ले जाते हैं और फैलाते हैं, जो नियंत्रण न करने पर पूरे के पूरे हरे-भरे खेतों को तेजी से मरते हुए धब्बेदार पौधों में बदल सकता है।

टमाटर के लिए एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM) कार्य योजना

खेती की लागत बढ़ाए बिना अपनी टमाटर की फसल को सफलतापूर्वक सुरक्षित रखने के लिए, आपको एक बहु-स्तरीय सुरक्षा कवच लागू करना होगा जो कीटों के जीवन चक्र के हर चरण को निशाना बनाता है।

टमाटर के फल छेदक (Helicoverpa armigera) के लिए रणनीतिक प्रबंधन

चूंकि फल छेदक अत्यधिक विनाशकारी होता है, इसलिए आपकी रणनीति मुख्य रूप से पतंगों (moths) को अंडे देने से रोकने और कैटपिलर (इल्लियों) को फलों में छेद करने से पहले मारने पर केंद्रित होनी चाहिए।

  • गेंदा जाल फसल प्रणाली (सांस्कृतिक/Cultural): खेत की मेड़ों पर और कतारों के बीच अफ्रीकी गेंदे को जाल फसल (trap crop) के रूप में बोएं। इसके लिए टमाटर की प्रत्येक 16 कतारों पर गेंदे की 1 कतार का सख्त अनुपात बनाए रखें। पीले पतंगे टमाटर की तुलना में चमकीले गेंदे के फूलों पर अंडे देना अधिक पसंद करते हैं। एक बार जब गेंदे पर कैटपिलर निकल आएं, तो आप केवल उन कतारों में दवा का छिड़काव कर सकते हैं, जिससे आपका मुख्य टमाटर का खेत कीटनाशकों से मुक्त रहेगा।
  • पक्षी बसेरा / बर्ड परचेस (यांत्रिक/Mechanical): पूरे खेत में प्रति हेक्टेयर 15-20 T-आकार के लकड़ी के पक्षी बसेरे लगाएं। स्थानीय कीटभक्षी पक्षी सुबह और शाम के समय इन बसेरों पर बैठेंगे और प्राकृतिक रूप से बड़े कैटपिलरों का शिकार करेंगे।
  • फेरोमोन ट्रैप (निगरानी/Monitoring): प्रति एकड़ 5 हेलील्योर फेरोमोन ट्रैप लगाएं। ये जाल नर पतंगों को आकर्षित करके पकड़ते हैं, जिससे उनका प्रजनन चक्र टूट जाता है और आपको यह चेतावनी मिलती है कि खेत में कीटों का बड़ा हमला कब होने वाला है।
  • अंडे के परजीवी (जैविक/Biological): मित्र परजीवी ततैया ट्राइकोगामा प्रिटिओसम (Trichogramma pretiosum) को 50,000 वयस्क प्रति हेक्टेयर की दर से खेत में छोड़ें। शुरुआती फूल आने की अवस्था से सप्ताह में 3 से 4 बार ऐसा करें। ये नन्ही ततैया फल छेदक के अंडों को भूखे कैटपिलर में बदलने से पहले ही नष्ट कर देती हैं।
  • लक्षित रासायनिक कार्रवाई: यदि आपको खेत में निरीक्षण के दौरान औसतन एक छोटी सुंडी (कैटरपिलर) प्रति पौधा दिखाई दे या 2% फलों का नुकसान (छिद्रित फल) दिखे, तो तुरंत लक्षित रासायनिक नियंत्रण अपनाएं। । क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 18.5% SC 60 मिली प्रति एकड़ या स्पिनोसाड 45% SC 60-70 मिली प्रति एकड़ या फ्लुबेंडियामाइड 20 डब्ल्यूजीकी 40 ग्राम प्रति एकड़दर से, चुने गए रसायन को 200 लीटर साफ पानी में अच्छी तरह मिलाकर छिड़काव करें।

चना कटवर्म / कटुआ कीट (Agrotis ipsilon) के लिए रणनीतिक प्रबंधन

चूंकि कटुआ कीट दिन के समय मिट्टी के नीचे छिपे रहते हैं और रात में नए लगाए गए पौधों पर हमला करते हैं, इसलिए इसका प्रबंधन मिट्टी की तैयारी और शुरुआती सुरक्षात्मक उपायों पर केंद्रित होना चाहिए।

  • गर्मियों में गहरी जुताई (सांस्कृतिक/Cultural): गर्मियों के मुख्य महीनों (मई और जून) में अपने खेत की गहरी जुताई करें। मिट्टी के नीचे छिपे हुए प्यूपा (pupae) को तेज धूप और प्राकृतिक पक्षी शिकारियों के सामने लाने से बुवाई से पहले ही कटुआ कीटों की आबादी में भारी कमी आती है।
  • मिट्टी और पौधों के निचले हिस्से की सफाई (यांत्रिक/Mechanical): खेत को पूरी तरह से खरपतवार मुक्त रखें। ताजे कटे हुए पौधों के ठीक आसपास की ऊपरी मिट्टी में केवल 1-2 इंच गहराई में छिपे हुए कैटपिलरों को हाथ से चुनकर तुरंत नष्ट कर दें।
  • विषाक्त चारा / पॉइज़न बेटिंग (रासायनिक जाल): खेत में गंभीर प्रकोप होने पर, रात के समय असर करने वाला एक अत्यधिक प्रभावी जहरीला चारा तैयार करें। इसके लिए 10 किलोग्राम चावल की भूसी या गेहूं का चोकर, 1 किलोग्राम गुड़ और क्विनालफॉस 25% EC को जरूरत भर पानी के साथ मिलाकर भुरभुरा (लड्डू जैसा) बना लें। शाम के समय टमाटर के पौधों की जड़ों के पास कतारों में इस चारे को थोड़ी-थोड़ी मात्रा में डाल दें। कटुआ कीट रात में बाहर निकलेंगे, चारे को खाएंगे और पौधों को काटने से पहले ही मर जाएंगे।
  • मिट्टी का उपचार / ड्रेन्चिंग: देर दोपहर या शाम के समय संक्रमित कतारों के पास पौधों की जड़ों की मिट्टी को क्विनालफॉस 25% EC की 2 मिली मात्रा प्रति लीटर पानी के घोल से अच्छी तरह गीला (drench) करें। यह मिट्टी में छिपे कटुआ कीटों को तुरंत नष्ट कर देता है।

रस चूसने वाले कीटों और पत्ती सुरंगक (सफेद मक्खी, थ्रिप्स और लीफ माइनर) के लिए रणनीतिक प्रबंधन

ये छोटे कीट ‘लीफ कर्ल’ (पत्ती मरोड़) और ‘स्पॉटेड विल्ट’ (धब्बेदार मुरझान) जैसे विनाशकारी वायरस फैलाते हैं। इसका उद्देश्य भौतिक बाधाएं बनाना और पत्तियों को नुकसान पहुँचाने से पहले ही उन्हें जाल में फंसाना है।

  • 40-मेश नर्सरी नेटिंग (भौतिक सुरक्षा कवच):
    टमाटर के युवा पौधों को हमेशा 40-मेश की सफेद नायलॉन की जाली के अंदर ही उगाएं। यह उड़ने वाली सफेद मक्खियों और थ्रिप्स को छोटे पौधों को काटने से पूरी तरह रोकता है, जिससे पौधों में शुरुआत से ही लाइलाज वायरस फैलने का खतरा खत्म हो जाता है।
  • पीले और नीले चिपचिपे जाल / स्टिकी ट्रैप (यांत्रिक/Mechanical): पौधों की ऊपरी सतह की ऊंचाई पर प्रति एकड़ 20-25 पीले चिपचिपे जाल (सफेद मक्खियों और लीफ माइनर मक्खियों के लिए) और नीले चिपचिपे जाल (विशेष रूप से थ्रिप्स के लिए) लगाएं। चमकीले रंग उड़ने वाले वयस्कों को आकर्षित करते हैं, जिससे वे चिपचिपी गोंद वाली सतह पर फंस जाते हैं और उनका प्रजनन रुक जाता है।
  • नीम आधारित वानस्पतिक स्प्रे (जैविक नियंत्रण): हर 10-14 दिनों में नीम बीज अर्क (NSKE 5%) या बाजार में मिलने वाले नीम के तेल (3000 ppm) का 4-5  मिली प्रति लीटर पानी की दर से सुरक्षात्मक छिड़काव करें। नीम कीटों को अंडे देने से रोकता है और लीफ माइनर व थ्रिप्स के भोजन चक्र को प्राकृतिक रूप से बाधित करता है।
  • सिस्टेमिक (अंतरप्रवाही) रासायनिक कार्रवाई: यदि कीटों की संख्या सुरक्षा सीमा (5 सफेद मक्खियाँ या थ्रिप्स प्रति पत्ती) को पार कर जाती है, तो ऐसे सिस्टेमिक कीटनाशकों का उपयोग करें जो पौधे के रस में मिल जाते हैं। इसके लिए इमिडाक्लोप्रिड 17.8% SL
    65 मिली प्रति एकड़ या एसिटामिप्रिड 20% SP
    50 ग्राम प्रति एकड़ की दर से 200 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।

टमाटर में कीटनाशक छिड़काव के चार सुनहरे सुरक्षा नियम

  • नाइट्रोजन (यूरिया) का अधिक उपयोग कभी न करें: अत्यधिक नाइट्रोजन टमाटर के पौधों को बहुत नरम, रसीला और अत्यधिक हरा-भरा बना देता है, जो सफेद मक्खियों और फल छेदक कीटों की भारी आबादी को न्योता देता है। इसे हमेशा फास्फोरस और पोटैशियम के साथ संतुलित करें।
  • छिड़काव के समय का ध्यान रखें: रसायनों का छिड़काव हमेशा सुबह जल्दी (सुबह 6 बजे से 9 बजे) या देर शाम (शाम 4 बजे से 6 बजे) करें। दोपहर की तेज धूप में छिड़काव से बचें, क्योंकि दवा का लिक्विड तेजी से वाष्पीकृत (उड़) जाएगा, जिससे उसका असर कम हो जाएगा और पत्तियों के झुलसने का खतरा रहेगा।
  • मित्र कीटों की रक्षा करें: शांत शाम के समय छिड़काव करने से मधुमक्खियों जैसे लाभकारी परागणकों और मकड़ियों, लेडीबर्ड बीटल (लेडीबग) व लेसविंग्स जैसे प्राकृतिक शिकारियों को नुकसान नहीं पहुँचता है।
  • कीटनाशकों के समूहों को बदलें: कभी भी एक ही कीटनाशक का लगातार दो बार छिड़काव न करें। अलग-अलग टेक्निकल (सक्रिय तत्वों) वाले कीटनाशकों को बदल-बदल कर उपयोग करें ताकि कीटों में दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित न हो और वे बेकाबू “सुपर-बग” न बन सकें।

Authers

डॉ. जितेन्द्र कुमार गुप्ता, डॉ. सुमन चौधरी,डॉ. शंकर लाल शर्मा एवं डॉ. राजेन्द्र सिंह बाजीया

सहायक आचार्य (कीट विज्ञान)
(कीट विज्ञान विभाग, श्री करण नरेन्द्र कृषि महाविद्यालय, जोबनेर)

(श्री करण नरेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर, राजस्थान)

डॉ. जितेन्द्र कुमार गुप्ता, डॉ. सुमन चौधरी,डॉ. शंकर लाल शर्मा एवं डॉ. राजेन्द्र सिंह बाजीया