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Management of major post-harvest fungal diseases of mango fruits and plants आम (मैंगीफेरा इंडिका एल.) भारत में सबसे लोकप्रिय व्यावसायिक फल फसलों में से एक है। दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया में हजारों सालों से मैंगिफेरा इंडिका एल की खेती की जाती रही है और आम दुनिया भर में आठवां सबसे अधिक उत्पादित फल है, जिसका उत्पादन बांग्लादेश, भारत, नेपाल और अन्य उष्णकटिबंधीय देशों में 43 मिलियन टन होता है भारत ने 2016-17 के दौरान 22.63 लाख हेक्टेयर क्षेत्र से 19.69 मिलियन टन आम का उत्पादन किया, जिसकी औसत उत्पादकता 8.7 टन प्रति हेक्टेयर रही। भारत ने 2016-17 के दौरान 53.18 हजार टन ताजे आम का निर्यात किया और 445.55 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा अर्जित की (भारत सरकार, 2017)। बिहार देश में आम का पाँचवाँ प्रमुख उत्पादक (7.52ः टन) है, जो वर्ष 2016-17 के दौरान 1.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र से लगभग 1.48 मिलियन मीट्रिक टन उत्पादन करता है, जिसकी उत्पादकता 9.82 टन प्रति हेक्टेयर रही। बिहार में, भागलपुर ने 2015-2016 में 7.68 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में 71.21 हजार मीट्रिक टन आम का उत्पादन किया और बिहार के सभी आम उत्पादक जिलों में सातवें स्थान पर रहा (भारत सरकार, 2017)। आम के पौधों में मांसल पत्थर के फल होते हैं जो पॉलीफेनोल, विटामिन और फाइटोकेमिकल्स से भरपूर होते हैं, जो अपने एंटीऑक्सिडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी,...

Management of Mango Malformation मैंगो मैलफार्मेशन (Mango Malformation) एक प्रकार की फलों और पौधों की बीमारी है जिसमें मैंगो के पेड़ों में विकृतियाँ होती हैं। इसका परिणाम होता है की पूरे पेड़ या उसके भागों में गुच्छ परिरूपण, पत्तियों का असमान विकास और विकृत फूल हो जाते हैं। मैंगो मैलफार्मेशन के कारणों में फंगल इंफेक्शन, पोषण की कमी, अधिक तापमान और नमी, और बाकी कई प्रकार की वायुमंडलिक परिस्थितियाँ शामिल हो सकती हैं। यह बीमारी मैंगो पेड़ों की उत्पादकता को प्रभावित कर सकती है और उनके उत्पादन में कमी ला सकती है। मैंगो मैलफार्मेशन (Mango Malformation) आम की कायिक विकृति के कुछ मुख्य कारण मैंगो मैलफार्मेशन (Mango Malformation) के कुछ मुख्य कारणों को समझना महत्वपूर्ण है ताकि इसका प्रबंधन किया जा सके। निम्नलिखित हैं मैंगो मैलफार्मेशन के प्रमुख कारण: जैविक कारण: फंगसिडल असमंजस (Fungicidal Imbalance): अनियमित फंगसाइड का उपयोग या उचित फंगसाइड की अधिक उपयोग करने से मैंगो मैलफार्मेशन हो सकता है। संक्रामक रोग (Infectious Diseases): कुछ संक्रामक रोग जैसे की फंगल इंफेक्शन या बैक्टीरियल रोग, मैंगो मैलफार्मेशन का कारण बन सकते हैं। मुर्दानुयायिक विकार (Microbial Abnormalities): कुछ अविशिष्ट फंगस और अन्य माइक्रोबायोटिक विकार, जैसे की स्कोट्च पाइन कीड़े या कोलेटोटिचम सिट्री, भी मैंगो मैलफार्मेशन का कारण हो सकते हैं। पोषण संक्रमण (Nutritional Imbalance) मिनरल और पौष्टिकता की कमी (Mineral and Nutritional Deficiencies): जैसे की जिंक, बोरॉन और अन्य मिनरल्स की...

आम में अत्यधिक ऊतक गलन, इसके कारण और प्रबंधन Mango the king of fruit occupies approximately 50% of all tropical fruits produced worldwide. Mango is growing in many countries like India, Indonesia, Brazil, China, Egypt, Mexico, Phillipines, Pakistan, Vietnam and Thialand. Mango is nutritionally rich and its pulp contains good dietary fiber, pro-vitamin A, Vitamin C and diverse polyphenols Further, India share approx. 49.62 per cent of area and nearly 42.06 per cent of world’s mango production. Moreover, mango production in Uttar Pradesh was the highest i.e. 23.85 per cent in country. Various varieties of mango are cultivated in India but Dashehari stood first in terms of choice particularly in U.P. Dashehari fruit size is medium, shape is elongated with yellow fruit colour. But, the problem of tissue softening (jelly seed) disorder is very high in Dashahari mango (Singh et al., 2006). Several commercially grown mango varieties in India such as ‘Dáshehari’, Langra, Chousa, Bombay green (Singh 2011, Srivastav et al., 2015) or exotic varieties such as ‘Tommy Atkins’, ‘Sensation’, ‘Zill’ and ‘Kent’ (Oosthuyse 1993) are susceptible to jelly-seed disorder. Among these varieties the incidence of JS (excessive softening of tissue of pulp around the stone) is very high in Dashehari, thus need major attention, and it brought down the export potential of this...

Mangoes and their processed products आम प्राचीनकाल से भारत का लोकप्रिय फल है तथा भारत, पाकिस्तान व फिलिपिन्स का राष्ट्रीय फल हैं व बंग्लादेश का राष्ट्रीय पेड़ हैं तथा इसे अपनी आकर्षक रंग, मनमोहक सुगंध, मिठास तथा उत्तम स्वाद के कारण आम ’’फलों का राजा’’ कहलाता हैं। आम का पेड़ एक सदाबहार वृक्ष हैं, जिसकी लम्बाई 8 - 18 मी तक हो होती है। भारत में आम की 1000 से अधिक किस्में पायी जाती है, परन्तु व्यापारिक दृष्टि से आम की 30 प्रजातियाॅ उगाई जाती हैं। आम अपनी प्रारंम्भिक अवस्था से अंतिम अवस्था तक उपयोगी होता है। अप्रैल के महीने से लेकर जुलाई तक आम की अलग-अलग किस्में- तोतापरी, बेनिशान, हापुस, हिमसागर, दशहरी, गौरजीत, लंगड़ा, चैसा, मल्लिका, आम्रपाली, गुलाबखास व अनेको प्रकार की देशी प्रजातियाॅ उपलब्ध होती है। इस फल की जितनी किस्में हैं उतने ही विभिन्नता लिए निराले मिठास भरे स्वाद हैं। फलों के अलावा इसके वृक्ष को पूरे भारतवर्ष में पवित्र माना जाता है। इसे प्रेम बढ़ाने वाला वृक्ष माना जाता है तथा कुछ राज्यों में आम के पत्तियों को मुख्य द्वारा पर टांगना शुभ माना जाता है। हिन्दुओं में विवाह के समय वर-बधू पर इस विश्वास के साथ आम की पत्तियों से पवित्र जल छिड़का जाता है कि परिवार की समृद्धि होगी। इसके फल, पत्ती, डाली का सम्मान के साथ पूजा...

आम का गुच्छा-मुच्छा रोग: आम उत्पादन में एक गम्भीर समस्या The disorder was first reported by Maries (Watt, 1891) in Darbhanga, Bihar (India). In the last three decades or so it has assumed an alarming situation in the Northern India where it is threatening for the mango growers because all the commercial cultivars are highly susceptible to malformation. It widely occurs in Punjab, Delhi, Uttar Pradesh and less prevailing in Gujarat and Maharashtra. However, it is negligible in West Bengal and Bihar. The southern mango growing regions like Tamil Nadu, Andhra Pradesh, Karnataka and Kerala almost free from this disorder. Symptoms of malformation: The incidence of malformation varies from year to year, cultivar to cultivar and also with age of the trees. Generally it is occur in two forms; vegetative and floral malformation. i. The vegetative malformation is observed at seedling stage in nursery. On, seedling over three month old, swelling appears in the axil of leaves. The affected plant shows bunching of terminal portion of leaf, shortening of the size of leaf lamina, shortening of internodal length and reduced length of petiole. ii. Flora malformation directly affects the tree productivity. In the case of bearing trees the panicles are affected. The peduncles become thick and fleshy with profuse branching. The floral branches are crowded and enlarged...

Mango Malformation disease and its treatment आम का गुच्‍छाा या गुम्‍मा , आम के वृक्षों पर होने वाला एक रोग है | प्रायः इस रोग के कारकों में फुजेरियम सबग्लुट्टीनेन्स नामक फफूंद का उल्लेख होता है | किन्तु अनेक विशेषज्ञों का मत है कि इस रोग का कारण पौधे में होने वाले हार्मोनों का असंतुलन हैं | एक अन्य मतानुसार इस रोग का कारण कुछ पोषक तत्वों की कमी भी हो सकती है | गुम्मा रोग से ग्रसित आम के पेड़ में पत्तियों एवं फूलों  में असामान्य वृद्धि एवं फल विकास अवरुद्ध हो जाता है | इस रोग के कारण आम के उत्‍पादन मे असाधारण कमी होती है।  ऐसा पाया गया है कि आम की भारतीय प्रजातियाँ इस रोग से अधिक ग्रसित होती हैं | आम का गुच्‍छा रोग के लक्षण : नई पत्तियों एवं फूलों की असामान्य वृद्धि, टहनियों पर एक ही  स्थान पर अनगिनत छोटी – छोटी पत्तियां निकल आना, बौर के फूलों का असामान्य आकार  होना, फूल का गिर जाना, फल निर्माण अवरुद्ध हो जाना, आदि इस रोग के प्रमुख लक्षण है।| गुम्‍मा रोग दो प्रकार का होता है 1. आम के पत्तियों का गुम्मा (Leaf malformation) : आम की टहनी पर एक पट्टी के स्थान पर अनगिनत छोटी- छोटी  पत्तियों का गुच्छा बन जाना, तने की गाठों के बीच का अंतराल अत्यधिक...

Major agricultural activities in fruit crops in July जुलाई का महीना फल वाली फसलों व अन्य फसलों के लिए महत्वपूर्ण महीनों में से एक है क्योकि, जुलाई का महीना जिसे आषाढ़-श्रावण भी कहते है। एक लम्बी गर्मी या सूखे मौसम के पश्चात तपती हुई धरती को ठंडा करने के लिए मानसून लेकर आता है व पेड़-पौधों को प्रकृति के आशीर्वाद स्वरुप वर्षा जल की प्राप्ति होती है। वर्षा के पश्चात सारा खेत-खलिहान हरियाली से भर उठता है। फल वाली फसलों में अनेक कृषि कार्य जुलाई के महीने में किये जाते है, जैसे- अनेक फल पौधों की रोपाई, बीजू पौधों के बीज की बुवाई, जल निकास की व्यवस्था, उर्वरक प्रबंध, खरपतवार नियंत्रण, अंतर्वर्ती फसलों की बुवाई, फल पौधों में कटिंग, बडिंग, कलम बांधने का काम, बरसात के मौसम में लगने वाले कीट व रोगो का नियंत्रण आदि कार्य किये जाते है, जिनका विवरण इस प्रकार से है- फल पौधों की रोपाई फल पौधों के नये बाग़ लगाने के लिए उचित दूरी पर उचित आकर के गड्ढे मई-जून के महीने में खोद लिए जाते हैं। इनमें बरसात के ठीक पहले दीमक के प्रकोप से बचने हेतु प्रत्येक गड्ढे में 200 ग्राम क्लोरवीर की धुल डालें। जो फल पौधे कलिकायन द्वारा तैयार किये जाते हैं वे लगभग एक साल में रोपाई योग्य हो जाते हैं। पौधे लगाने के...

5 Major diseases of mango and their management आम भारत का प्रमुख फल है जिसे फलों के राजा की उपाधि भी दी गई है। इसके स्वाद, उम्दा सुगंधि के साथ यह फल वि‍टामि‍न ए तथा सी का एक प्रचुर स्रोत है। आम का पाैैैधा प्रकृति‍ि‍ में दढृ होता है अतः कम कीमत व कम मेहनत में इसका रखरखाव कि‍या जा सकता है। भारत में कुल फल उत्पादन क्षेत्र 1.2 मि‍लयन हेक्टेयर में आम का उत्पादन क्षेत्र लगभग 22% है तथा उत्पादन 11 मि‍लयन टन है। उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश सवााधिक आम उत्पादक क्षेत्र हैं इसका उपयोग अपरि‍ि‍पक्व तथा परि‍पक्व दोनों अवस्थाओं में कि‍या जाता है। कच्चे अपरि‍पक्व फलों का उपयोग चटनी, अचार व जूस बनाने में कि‍या जाता है ।  पके हुए फलों का उपयोग खाने में तथा अन्य उत्पाद जैसे की जैम, जैली, स्क्वैश, मर्मलैड , नेक्टर बनाने में होता हैआम के वि‍भि‍न्न वृद्धि अवस्थाओं में कई प्रकार के रोगों का आक्रमण होता है जिनमें से कुछ प्रमुख रोग व उनका प्रबंधन नि‍म्‍न प्रकार है- 1. सफेद रतुआ (पाउडरी मि‍ल्डयू) - यह रोग फफूंद द्वारा होता है इस रोग में पत्ति‍यों डंठलों फलों व फूलों पर सफेद रंग का पाउडर जैसा चूण जमा हो जाता है। रोग ग्रसि‍त फल व फूल शीघ्र ही गि‍र जाते हैं गंभीर परि‍स्थति‍यों में फल भी नहीं लगते । नई पत्ति‍यों...