02 May किन्नू में लगने वाले पीड़क एवं उनका समेकित प्रबंधन
Integrated Pests management of kinnow नीबू वर्गीय फल वाली फसलें बहुवर्षीय एवं वृक्ष नुमा होती हैं। भारत में फल उत्पादन की दृष्टि से नीबू वर्गीय फल तीसरे स्थान पर है। इस वर्ग में लगभग 162 जातियाँ आती हैं। इस वर्ग में मेन्ड्रिन नारंगी (किन्नों, नागपुर, खासी दार्जिलिंग) को एक बड़े क्षेत्रफल में उगाया जाता है। किन्नू के लिए कम आर्द्रता, गर्मी और अपेक्षाकृत सुहानी सर्दी अनुकूल होती है। उत्तर-भारत में जहाँ पर तापमान गिर कर 1-66° से 4-40° सेल्सियस तक पहुँच जाता है वहाँ किन्नू के फल अच्छे रंग, स्वाद और अत्यधिक रसदार होते हैं। भारत में किन्नो का क्षेत्र लगभग 56910 हेक्टेयर है जिससे लगभग 1222-66 मेट्रिक टन वार्षिक उत्पादन होता है। किन्नू एवं नारंगी की खेती पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान का उत्तर-पश्चिमी भाग और उत्तर प्रदेश में की जाती है | किन्नूके लिए बलुई या बलुई दोमट मृदा अच्छे उत्पादन के लिए सर्वोत्तम होती है। नीबू वर्गीय फल की दो किस्मों “राजा (सिट्रस नोबिलिस) व “विलो लिफ” (सिट्रस डेलिसिओसा) के संकरण से किन्नो मेन्ड्रिन तैयार किया गया है। उत्तरी-पश्चिमी भारत में किन्नो के प्रवर्धन की सबसे सफल विधि टी बडिंग है जिसको जट्टी-खट्टी या जम्भेरी रुट स्टोक से तैयार किया जाता है तथा अन्य भागों में खरना-खट्टा से वानस्पितिक प्रवर्धन किया जाता है। किन्नू जनवरी-फरवरी माह में परिपक्व हो जाते हैं। इनके फल...