01 Oct सुपरफूड सहजन: प्रकृति का अनोखा वरदान और इसके आयुर्वेदिक महत्व
सहजन यानी Moringa के पत्ते, फली और अन्य हिस्सों के पोषण, औषधीय गुण और आयुर्वेदिक महत्व के बारे में जानें। सहजन के उपयोग और फायदे की पूरी जानकारी।...
सहजन यानी Moringa के पत्ते, फली और अन्य हिस्सों के पोषण, औषधीय गुण और आयुर्वेदिक महत्व के बारे में जानें। सहजन के उपयोग और फायदे की पूरी जानकारी।...
सहजन एक जादुई पौधा सहजन या ड्रम्स्टिक ( moringa olieifera ) maringacea कुल के पौधे के बारे हम सभी जानते हैं की इसे सीजना,सुरजना, शोभाजन, इंडियन हार्सरैडिश आदि नामों से जानते हैं लेकिन इनके औषधीय गुणों के बारे मे बहुत कम ही लोग जानते हैं इसके जड़, पते, छाल और फलियों आदि भाग किसी न किसी रूप मे उपयोग लेते हैं इनके सभी भागों मे औषधीय गुण बहुत अधिक मात्रा मे होते हैं इसके पते एवं फलिया शरीर को ऊर्जा देने के साथ साथ शरीर मे विटामिन,खनिज एवं पोषक तत्व प्रदान करते हैं और शरीर मे उपस्थित हानिकारक या विषैले तत्वों को निकालने का काम करते हैं सहजन भारत,पाकिस्तान,बांग्लादेश और अफगानिस्तान की मूल वानस्पतिक पौधा हैं ! सहजन हमे संतरा से 7 गुना विटामिन सी ओर गाजर से 10 गुना विटामिन ए और दुध से 17 गुना कैल्सीयम तथा योगर्ट से 9 गुना अधिक प्रोटीन और केला से 15 गुना अधिक पोटेशियम तथा पालक से 25 गुना अधिक लौह तत्व की पूर्ति करते हैं ! सहजन के औषधीय महत्व सहजन के पौधे के सभी भागों से आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं सहजन का पौधा आवश्यक पोषक तत्वों का खजाना हैं सहजन की पत्तियों से आयरन, कैल्सीयम, पोटेशियम, जिंक, कॉपर तथा विटामिन जैसे विटामिन ए, विटामिन बी, विटामिन सी और विटामिन डी उपस्थित होते हैं ! सहजन की फलियों मे...
सहजन पेड़ की अविश्सनीय पोषण एंव औषधीय क्षमता Moringa (Moringaoliefera L. ) commonly known as the drumstick, horseradish tree and ben oil tree in English,SohjnainAssamese,Sajinain Bengali, Mungna, Sehjanin Hindi, Nuggein Kannada, and Shevagain Marathi. The genus name ‘Moringa’ is derived from the vernacular Tamil ‘Murungai’ meaning twisted pods. It comprises about 13 deciduous tree species belongs to single genus Moringa in Moringaceae family, including M. concanensis, M. drouhardii, M. longituba, M. ovalifolia, M. peregrina, and M. stenopetala. Most of these species are multi-purpose tree with food, fiber, and medicinal value. Moringa is an indigenous plant to the Sub-Himalayan tracts of South Asia, extending from the northeastern Pakistan to northern West Bengal State in India. It is commonly found at elevations from sea level to 1400 m. It is naturalized and being cultivated beyond its native range, in different parts of the world, including India, Pakistan, Nepal, Afghanistan, Bangladesh, Sri Lanka, Southeast Asia, Arabian Peninsula as well as in East and West Africa. In South Indian states,moringa pods are an essential part of diet and assumes special significance in day-to-day life. Moringa is considered as “Miracle Tree” or “Wonder Crop”, power-packed with nutrients. Different plant parts of moringa are consumed for nutraceutical value. Apart from pods for vegetable purpose, roots, bark, leaf, flowers are also...
बहुपयोगी सहजन (मोरिंगा) - एक चमत्कारी वृक्ष सहजन को ड्रमस्टिक (Drumstick) या मोरिंगा (Moringa) के नाम से जाना जाता है। मोरिंगा तमिल शब्द मुरुंगई से बना है जिसका अर्थ त्रिकोणीय मुड़ी हुआ फल है। मोरिंगा ओलीफेरा उल्लेखनीय तेजी से बढ़ने वाले वृृृृक्ष हैै। ये असाधारण पोषण सामग्री के कारण अत्यधिक मूल्यवान पेेेड है। यह वृक्ष उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में तेजी से बढ़ता है। सहजन के फायदे गुण लाभ अनेक है। सहजन के पेड़ पर सामान्यत: वर्ष में एक बार फूल और फिर फल लगते हैं। इसका फल पतला लंबा और हरे रंग का होता है जो पेड़ के तने से नीचे लटका होता है। इसका पौधा 4 - 6 मीटर उंचा होता है तथा 90-100 दिनों में इसमें फूल आता है। जरूरत के अनुसार विभिन्न अवस्थाओं में फल की तुड़ाई करते रहते हैं। पौधे लगाने के लगभग 160-170 दिनों में फल तैयार हो जाता है। एक साल में एक पौधेे से 65 - 70 सें.मी. लम्बेे तथा औसतन 6.3 सेंमी. मोटेे, 200 - 400 फल (40-50 किलोग्राम) मिलतेे है। सहजन के फल काफी गूदेदार होतेे है तथा पकाने के बाद इसका 70 प्रतिशत भाग खाने योग्य होता है। सहजन को एक बार उगाकर 4-5 वर्षो तक पेड़ी फसल ली जाती है। प्रत्येक वर्ष फसल लेने के बाद पौधे को जमीन से एक मीटर छोड़कर...