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अश्वगंधा Tag

हर्बल कि‍सान मोबाईल एप्‍प     It is a mobile app, for the farmers, students and entrepreneurs to acquaint them about the latest production technologies of Medicinal and Aromatic Crops.   Farmers can easily learn about the cultivation techniques and other information of Medicinal plants like Aloe barbadensis, Andrographis paniculata, Artimisia annua, Cassia angustifolia, Chlorophytum borivilianum, Commiphora wightii, Cymbopogon flexuosus, Cymbopogon martini, Ocimum sanctum, Papavera somniferum, Piper longum, Plantago ovata, Terminalia arjuna, Tinospora cordifolia, Withania somnifera, Mucuna pruriens, Catharanthus rosseus, Stevia rebaudiana, Glycyrrhiza glabra and Gloriosa superba.   This app is available in google play store on the given link.    https://play.google.com/store/apps/details?id=com.hpandro.demo​   Please download as well as endorse it to the farmers who are growing the above said crops. Author Dr. P. Manivel Directorate of Medicinal and Aromatic Plants Research (DMAPR),Boriavi, ANAND 387 310. Gujarat, India Email: P.Manivel@icar.gov.in ...

अश्वगंधा उगायें और अधि‍क लाभ पाऐं भारत में अश्वगंधा अथवा असगंध जिसका वानस्पतिक नाम वीथानीयां सोमनीफेरा है, यह एक महत्वपूर्ण औषधीय फसल के साथ-साथ नकदी फसल भी है। अश्वगंधा आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में प्रयोग किया जाने वाला एक महत्वपूर्ण पौधा है। सभी ग्रथों में अश्वगंधा के महत्ता के वर्णन को दर्शाया गया है। इसकी ताजा पत्तियों तथा जड़ों में घोंड़े की मूत्र की गंध आने के कारण ही इसका नाम अश्वगंधा पड़ा। आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में अश्वगंधा की माँग इसके अधिक गुणकारी होने के कारण बढ़ती जा रही है। अश्वगंधा एक औषधि है। इसे बलवर्धक, स्फूर्तिदायक, स्मरणशक्ति वर्धक, तनाव रोधी, कैंसररोधी माना जाता है। इसकी जड़, पत्ती, फल और बीज औषधि के रूप में उपयोग किया जाता है। यह पौधा ठंडे प्रदेशो को छोड़कर अन्य सभी भागों में पाया जाता है।  संस्कृत नाम: अष्वगंधा (Ashwagandha), हिन्दी नाम :  असगंध (Asgandh), अंग्रेजी : विन्टरचेरी (Winter Cherry), इंडियन गिनसेंग (Indian ginseng)  अश्‍वगंधा उगाने के लि‍ए उपयुक्त जलवायु यह पछेती खरीफ फसल है। यह उष्णकटिबंधी और समशीतोष्ण जलवायु की फसल है। अशवगंधा को शुष्क मौसम की आवश्यकता होती है। बारिश के महीने के अंतिम दिनों में इसे बोया जाता है। फसल के विकास के लिए शुष्क मौसम अच्छा रहताहै। जिन स्थान में वर्षा 660-750 मिमी की होती है वे स्थान फसल के विकास के लिए उपयुक्त होते है।  वार्षिक वर्षा...

6 Major diseases of Aloevera or Gwarpatha and Their Prevention ग्वारपाठा या घृतकुमारी (Aloevera) कांटेदार पत्तियों वाला पौधा हैं, जिसमें रोग निवारण के गुण कूट-कूट कर भरे पड़े हैं। यह भारत के गर्म प्रांतों में पाया जाने वाला एक बारहमासी पौधा हैं  और लिलिएसी परिवार से संबंधितहैं। आयुर्वेद में इसे घृतकुमारी की 'उपाधि' मिली हुई हैं तथा महाराजा का स्थान दिया गया हैं। ग्वारपाठा की 200 जातियां होती हैं, परंतु 5 ही मानव शरीर के लिए उपयोगी हैं। यह खून की कमी को दूर करता हैं तथा शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता हैं। पत्तियों का रस माइकोबैक्टीरियम क्षयरोग के विकास को रोकता हैं। यह एंटीइन्फ्लामेंटरी, एंटीसेप्टिक, एंटी अलसर ,एंटी टूमओर और मधुमेह के उपचार में कारगर हैं। अर्द्ध ठोस जेल कॉस्मेटिक, क्रीम, लोशन और शैम्पू में प्रयोग किया जाताहैं। यह विकिरण प्रेरित घावों के उपचार में भी कारगर हैं। ग्वारपाठा का पौधा विभिन प्रकार के रोगों दवारा ग्रसित होता हैं। हर एक मौसम में रोग इन पर पनपते हैं तथा इनको प्रभावित करते हैं। इस पौधे के मुख्य रोग एवं निवारण निचे दिये गए हैं। 1. गोलाकार धब्बे         लक्षण यह एलोवेरा का एक गंभीर रोग हैं। गोलाकार धब्बे पौधे के पत्तो पर प्रमुख होते हैं। यह बीमारी पहली बार हचिोजिमा और चिचिजिना, टोक्यो के समुद्री टापुओं पर पाई गए थी। धब्बो के ऊपर हेमटोनेक्टेरिआ हेमटोकोका...

Improved agronomical techniques of Ashwagandha or Winter cherry cultivation अश्वगंधा (withania somnifera) की पौधा सीधा 1.25 मीटर उॅचा होता हैं तथा इसके तने में बारीक रोम पाये जाते हैं। इसके पत्तिायों का आकार अण्डाकार एवं पत्तिायों में रोम पाये जाते है जिसे छूने से मुलायम महसूस होता है। फूल छोटे हरे या हल्के पीले रंग के तथा फल छोटे गोले नारंगी या लाल रंग के होते है। जड़ो को मसलकर सूॅघने से अश्व (घोड़े) के पसीने एवं मूत्र जैसी गंध आती है। जड़ों का रंग सफेद सा भूरा होता हैं। इसका संस्कृत नाम: अष्वगंधा, हिन्दी नाम :  असगंध, अंग्रेजी : विन्टरचेरी (Winter cherry), इंडियनगिनसेंग  (Indian ginseng)  हैैै। । भोगौलिक वितरण: अशवगंधा  का वितरण अफ्रीका, भूमध्यसागरीय से भारत एवं श्रीलंका में पहुॅचा है। भारत के हिमालय पहाड़ के तटों में 1000 मीटर की उंचाई तक पाई जाती है। भारत मे हिमाचल प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, हरयाणा, उत्तारप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र एवं मध्यप्रदेश आदि क्षेत्रों में पाये जात है। अश्वगंधा के लि‍ए जलवायू: अश्वगंधा को उष्णकटिबंधी और समशीतोष्ण जलवायु वालें क्षेत्रो में उगाया जाता है और साथ ही शुष्क मौसम की आवश्यकता होती है। वार्षिक वर्षा 600 से 750 मिलीलीटर में अश्वगंधा की वृद्वि अच्छी से होती है बीच में 1-2 बार ठण्ड में बर्षा होने से अश्वगंधा की जड़ो की पूर्ण विकास होता है। अश्वगंधा की खेती के लिए रेतीली दोमट से हल्की...