Agriculture Knowledge for Everyone

जीवामृत Tag

Cow dung and urine, once considered mere waste, can now become a source of income and sustainable farming for farmers through a combination of scientific approaches and traditional knowledge. They can be used to produce not only biogas and organic fertilizer, but also Ayurvedic products and household items....

Main components of natural farming and benefits of their use प्राकृतिक खेती एक कृषि पद्धति है जो रसायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों और जुताई के बिना खेती करने पर जोर देती है इसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण को सुरक्षित रखते हुए स्वस्थ और प्राकृतिक उत्पाद उगाना है। यह पद्धति मासानोबू फुकुओका का द्वारा विकसित की गई थी जिसे फुकुओका विधि भी कहा जाता है। जिसमें केवल प्राकृतिक आदानों का उपयोग किया जाता है। प्राकृतिक खेती फसलों, पेड़ों और पशुधन को एकीकृत करती है, जिससे कार्यात्मक जैव विविधता के इष्टतम उपयोग की सुविधा मिलती है। प्राकृतिक खेती मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरणीय स्वास्थ्य की बहाली, और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का शमन या निम्नीकरण, प्रदान करते हुए किसानों की आय बढ़ाने का मजबूत आधार प्रदान करती है। प्राकृतिक खेती प्राकृतिक या पारिस्थितिक प्रक्रियाओं, जो खेतों में या उसके आसपास मौजूद होती हैं, पर आधारित होती है। इसके साथ-साथ पशुओं जैसे गाय व भैंस के मल-मूत्र आदि के विघटन से विभिन्न प्रकार के जैविक खाद जैसे जीवामृत, घन जीवामृत, नीमास्त्र, ब्रह्मास्त्र आदि तैयार किए जाते हैं तथा साथ ही साथ बीजामृत जैसे बीजोपचार से बीजों का शोधन भी किया जाता है यह बहुत ही सस्ती व आधुनिक समय की एक बहुत ही महत्वपूर्ण जैविक खादों में से एक है। प्राकृतिक खेती के सिद्धांत 1. पहला सिद्धांत है, खेतों में कोई जुताई...

शून्य बजट प्राकृतिक खेती Zero Budget Natural Farming was developed by Subhash Palekar in the mid-1990s in Maharashtr. Zero budget natural farming totally depends on natural resource and chemical is totally avoided.  In zero budget farming sowing to harvesting cost is zero because external input such as pesticide, fertilizer etc. totally avoid. The farmers income is increased with the help of ZBNF’s and it is guidance towards sustainable farming methods that help to maintain soil fertility, productivity, assure chemical-free agriculture, and ensure a cheap cost of production (zero cost). Zero budget natural farming is eco friendly and create sustainable environment in soil and local areas. So it’s as good agro-ecology model for sustainable point of view. Component of ZBNF: - These are mainly four. Jeevamrutha: - Jeevamrutha is mixture of liquid natural organic fertilizer. It is prepared with mixing of water (200 lit.), cow dung (10 kg) and urine (10 lit.), Pulse flour (2 kg) and jiggery (1 kg) properly for one acre. After that keep this solution for fermentation purpose for 7 days. Shake the solution regularly three times a day. Bijamrita: - Bijamrita is used for seed treatment purpose. Because seed treatment is necessary for protect seed against diseases and insect attack. It’s prepared with water (20 lit.), cow dung (5 kg) and...

Zero Budget Natural Farming जीरो बजट नेचुरल फार्मिंग मूल रूप से महाराष्ट्र के एक किसान सुभाष पालेकर द्वारा विकसित रसायन मुक्त कृषि का एक रूप है।सुभाष पालेकर के नाम पर इसे सुभाष पालेकर नेचुरल फार्मिंग यानी जीरो बजट प्राकृतिक खेती कहा जाता है. यह विधि कृषि की पारंपरिक भारतीय प्रथाओं पर आधारित है। इस खेती के पैरोकारों का कहना है कि यह खेती देसी गाय के गोबर और मूत्र पर आधारित है. इस विधि में कृषि लागत जैसे कि उर्वरक, कीटनाशक और गहन सिंचाई की कोई आवश्यकता नहीं होती है। जिससे कृषि लागत में आश्चर्यजनक रूप से गिरावट आती है, इसलिये इसे ज़ीरो बजट नेचुरल फार्मिंग का नाम दिया गया है।इस विधि के अंतर्गत किसी भी फसल का उत्पादन करने पर उसका लागत मूल्य शून्य (ज़ीरो) ही आता है। जीरो बजट प्राकृतिक खेती के अंतर्गत घरेलू संसाधनों द्वारा विकसित प्राकृतिक खाद का इस्तेमाल किया जाता है जिससे किसानों को किसी भी फसल को उगाने में कम खर्चा आता है और कम लागत लगने के कारण उस फसल पर किसानों को अधिक लाभ प्राप्त होता है। जीरो बजट नेचुरल फार्मिंग का आधार है जीव-अमृत. यह गायब के गोबर, मूत्र और पत्तियों से तैयार कीटनाशक का मिक्सचर है. सुभाष पालेकर  सुभाष पालेकर एक पूर्व कृषि वैज्ञानिक हैं और इन्होंने पारंपरिक भारतीय कृषि प्रथाओं को लेकर कई रिसर्च...