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बीज उपचार Tag

परिचय बीज अंकुरण सफल फसल स्थापना की आधारशिला है। सब्जी फसलों में उच्च गुणवत्ता वाले बीज का महत्व अधिक होता है क्योंकि इनकी खेती गहन एवं व्यावसायिक होती है। तथापि, अनेक सब्जी बीजों में बीज सुप्तावस्था पाई जाती है, जिसमें जीवित बीज अनुकूल परिस्थितियों में भी अंकुरित नहीं होते। यह स्थिति अंकुरण क्षमता, बीज परीक्षण परिणाम तथा कुल उत्पादकता को प्रभावित करती है। बीज सुप्तावस्था की अवधारणा बीज सुप्तावस्था एक शारीरिक अवस्था है जिसमें जीवित बीज पर्याप्त नमी, तापमान, ऑक्सीजन एवं प्रकाश उपलब्ध होने के बावजूद अंकुरित नहीं होता। यह एक प्राकृतिक अनुकूलन प्रक्रिया है जो प्रतिकूल परिस्थितियों में अंकुरण को रोककर प्रजाति के अस्तित्व को सुनिश्चित करती है। किंतु व्यावसायिक सब्जी उत्पादन एवं बीज परीक्षण में यह कई व्यावहारिक समस्याएँ उत्पन्न करती है। [caption id="attachment_14336" align="alignnone" width="300"] चित्र: तोरई के बीजों में बीज सुप्तावस्था[/caption] सब्जी बीजों में सुप्तावस्था के प्रकार (i) बाह्य सुप्तावस्था यह बाहरी कारणों से होती है, मुख्यतः कठोर या अभेद्य बीजावरण के कारण, जो जल अवशोषण एवं गैस विनिमय को रोकता है। उदाहरण: भिंडी, लोबिया, एवं सेम। कठोर बीजावरण के कारण अंकुरण में विलंब एवं असमानता आती है। (ii) आंतरिक सुप्तावस्था यह आंतरिक कारणों जैसे अपरिपक्व भ्रूण या हार्मोनल असंतुलन के कारण होती है। उदाहरण: गाजर, प्याज, अजवाइन। कुछ मामलों में अंकुरण के लिए आफ्टर-राइपनिंग या विशेष तापमान उपचार की आवश्यकता...

सब्जियों में बीज जनित रोगों के प्रबंधन के लिए बुवाई पूर्व बीजोपचार  बीज जनित रोगों के प्रबंधन के लिए रोपण से पहले सब्जियों के बीजों का उपचार आवश्यक है। फसल की उपज में कमी को रोकने के लिए इन रोगों का प्रबंधन आवश्यक है। इस प्रकार, बुवाई से पहले बीज उपचार बीमारियों को नियंत्रित करने का एक महत्वपूर्ण साधन है, लेकिन अन्य रोग प्रबंधन प्रथाओं के साथ संयुक्त होने पर यह सबसे प्रभावी है। कुछ बीजों का उपचार आपूर्तिकर्ताओं या वाणिज्यिक नर्सरी द्वारा प्रत्यारोपित फसलों के बोने से पहले या सीधे बोई गई फसलों के लिए उत्पादकों को बेचने से पहले किया जाता है। बीज उपचार एक ऐसा शब्द है जो उत्पादों और प्रक्रियाओं दोनों का वर्णन करता है। विशिष्ट उत्पादों और विशिष्ट तकनीकों के उपयोग से बीज, अंकुर और युवा पौधों के विकास में सुधार हो सकता है। बीज उपचार में मूल ड्रेसिंग (seed dressing) से लेकर कोटिंग (seed coating) और पेलेटिंग (seed pelleting) शामिल हैं: 1. बीज ड्रेसिंग (seed dressing) यह बीज उपचार का सबसे आम तरीका है। बीज की ड्रेसिंग या तो सूखे फॉर्मूलेशन या तरल फॉर्मूलेशन के साथ  कि जाती है। ड्रेसिंग तकनीक खेत और उद्योग दोनों में की जा सकती है। बीज के साथ कीटनाशकों को मिलाने के लिए कम लागत वाले मिट्टी के बर्तनों का उपयोग किया जा सकता...

Seed treatment: the basis of prosper farmers हमारेे देश में ऐसे किसानों की संख्या ज्यादा है जिनके पास छोटे-छोटे खेत है और प्रायः खेती ही उनके जीवन-यापन का प्रमुख साधन है। आधुनिक समय मे खाधान्न की मांग बढ़ती जा रही है तथा आपूर्ति के संसाधन घटते जा रहे है।  विज्ञान के नवीन उपकरणों, तकनीकों तथा प्रयोगों से किसानों की स्थिति मे सुधार हुआ है। नवीन तकनीकों के प्रयोग करने से उनकी जीवन शैली में तीव्र बदलाव आये है। इन्ही में से एक तकनीक बीचोपचार है। जिसको सुनियोजित तरीके से अपनाने से खेती की उत्पादकता बढ़ सकती है। बीजोपचार एक सस्ती तथा सरल तकनीक है, जिसे करने से किसान भाई बीज जनित एवं मृदा जनित रोगों से अपनी फसल को खराब होने से बचा सकते हैं। इस तरीके में बीज को बोने से पहले फफूंदनाशी या जीवाणुनाशी या परजीवियों का उपयोग करके उपचारित करते हैं। भारत एक उष्ण कटिबंधीय प्रदेश है। उष्ण प्रदेश होने के कारण यहाँ रोगों एवं कीटों का प्रकोप अधिक होता है जिससे की उपज को बहुत अधिक नुकसान होता है। उन्नत प्रजातियों के प्रयोग, पर्याप्त उर्वरक देने व सिंचाई के अतिरिक्त यदि पौध संरक्षण के उचित उपाय न किये जाये तो फसल की अधिकतम उपज नही मिल सकती है। बीज की गुणवत्ता को बनाये रखने के लिए बीजोपचार करना अति मत्वपूर्ण है,...

Importance and Methods of Seed Treatment in Kharif crops अच्‍छी फसल के जिस तरह बीज चयन महतवपूर्ण है, उसी तरह बीज का उपचार करना भी उतना ही आवश्यक है| आधुनिक खेती में निरंतर हो रही वैज्ञानिक प्रगति से तभी लाभ हो सकता है जब उन्नत किस्मो के शुद्ध व अच्छी गुणवत्ता वाले बीजो काा चुनाव कि‍या जाऐ और  बुवाई पूर्व उसे  उपचारित करके ही बोया जावे| बीजो का अंकुरण बढाने, कीटो व रोगों से सुरक्षा करने के लिए बीजोपचार अति आवश्यक प्रक्रिया है| अधिकांशत: किसान, फसलो की बीजाई बिना बीजोपचार किये ही करते है जिससे फसल उत्पादन 8-10 प्रतिशत कम रहने की सम्भावना रहती है| किसानो द्वारा बीजोपचार की महत्वपूर्ण प्रक्रिया को अपनाने के लिए प्रचार प्रसार की आवश्यकता है जिससे फसलो मे इसके फायदे की जानकारी किसानो तक पहुचें| 100 प्रतिशत बीजोपचार को बढावा देने के लिए भारत सरकार एवं राज्य सरकार कार्यरत है| जिसमे कृषि विश्वविधालय, कृषि विज्ञान केन्द्र, आत्मा, ओधोगिक संगठन एवं एन.जी.ओ. मिलकर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे है| बीजों का एफ. आई. आर. या FIR क्रम मे उपचार करना चाहि‍ए यानि‍ सबसे पहले फफूँदनाशक दवाओं से, फिर आवश्यकता के अनुसार कीटनाशक दवा से  एवं अंत मे जीवाणु कल्चर से उपचारित करना चाहिये| रसायनों अथवा जैवकारको के अनुप्रयोग के लिए आमतौर पर तीन विधियाँ अपनाई जाती है जो की रसायन या जैवकारक की...

How to treat seeds in rabi crops. जिस तरह फसल मे बीज चयन महतवपूर्ण है, उसी तरह बीज उपचार करना भी आवश्यक है| आधुनिक समय मे खेती की निरंतर बढ़ती हुई वैज्ञानिक प्रगति से तभी लाभ हो सकता है, जब उन्नत किस्मो के शुद्ध व अच्छी गुणवत्ता वाले बीजो की बुवाई की जावे साथ ही उसे पूर्णतया उपचारित किया जावे| बीजो का अंकुरण बढाने, कीटो व रोगों से सुरक्षा करने के लिए बीजोपचार अति आवश्यक प्रक्रिया है| अधिकांशत: किसान बीजाई बिना बीजोपचार किये ही करते है जिससे फसल उत्पादन 8-10 प्रतिशत कम रहने की सम्भावना रहती है| किसानो द्वारा बीजोपचार की महत्वपूर्ण प्रक्रिया को अपनाने के लिए प्रचार प्रसार की आवश्यकता है जिससे फसलो मे इसके फायदे की जानकारी किसानो तक पहुचें| बुवाई पुर्व सौ प्रतिशत बीजोपचार को बढावा देने के लिए भारत सरकार एवं राज्य सरकार कार्यरत है| जिसमे कृषि विश्वविधालय, कृषि विज्ञान केंद्र, आत्मा, ओधोगिक संगठन एवं एन.जी.ओ. मिलकर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे है| बीजोपचार की विधियां 1. दवा से बीजोपचार की सुखी विधि: इस विधि के अंतर्गत बीजो को उपचारित करने के लिए बीज और दवा की उपयुक्त मात्रा को प्लास्टिक के ड्रम मे डालकर 10-15 मिनट घुमाया जाता है| जिससे दवा की हल्की परत सामान रूप से बीज के ऊपर चढ़ जाती है| यदि ड्रम उपलब्ध नही हो तो किसी साफ़ बर्तन मे या पॉलिथीन...

Importance of Seed Treatment in Kharif crops बीजोपचार से फसलों की उपज बढ़ाई जा सकती है एवं फसलों में कीट रोग प्रकोप से होने वाली हानि को 10 से 15 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। सभी दलहनी फसलों के बीजों को राईजोबियम कल्चर से तथा अनाज वाली फसलों, सब्जियों व औषधीय फसलों में बीजों को एजेटोबैक्टर व पीएसबी संवर्ध (कल्चर) से उपचारित करने से पैदावार अधिक होती है। ध्यान रखेेंं बीजोपचार करते समय सर्वप्रथम फफूंदनाशक, फिर कीटनाशक रसायन औैर अंतं में संवर्ध (कल्चर) से उपचारित करें।  खरीफ ऋतु में भारत में उगाई जाने वाली प्रमुख फसलें है मुंगफली, मक्‍का , ज्‍वार , बाजरा, सोयाबीन, ग्‍वार, तथा दलहनी फसलें है। इनमे बीजोपचार करते समय बीजोपचार के उपरोक्‍त क्रम का काफी महत्‍व है। मूंगफली मे बीजोपचार कालर रॉट, जड़ गलन रोग से बचाव के लिए टेबुकोनाजोल (2 डीएम) 1.5 ग़्राम या 3 ग्राम थाइरम या 2 ग्राम मैन्कोजेब या 2 ग्राम कार्बेन्डाजिम प्रति किलो बीज की दर से उपचारित करें अथवा 4-8 ग्राम ट्राईकोडर्मा प्रति किलो बीज की दर से उपचारित कर बोए। दीमक, सफेद लट से बचाव के लिए 45 मिलीलीटर क्लोरोपायरीफॉस से प्रति किलो बीज की दर से उपचारित करें। दीमक से बचाव हेतु एसीफेट 75 एसपी 6 ग़्राम दवा का प्रति किलो बीज की दर से भी  पचार कर सकते हैं। राइजोबियम कल्चर 600...

Seed treatment and its benefits for profitable crop production बीजोपचार एक महत्वपूर्ण क्रिया है जो कि बीज व पौधे को मृदा व बीज जनित बिमारियों व कीटों द्वारा होने वाले नुकसान से बचाता हैं।  हालांकि भारत में बहुत से किसान या तो बीजोपचार के बारे जानते ही नहीं या फिर इसको अपनाते नहीं हैं । भारत में किसानों के पास पहुचने वाला 70%  बीज अनुपचारित होता है। इसके पश्चात् बहुत कम ऐसे किसान होते है जो स्वंय बीज को उपचारित करते हैं। परिणामस्वरुप भारत में अधिकतर फसलें अनुपचारित बीज के द्वारा बोई जाती हैं। जबकि विकसित देशों में शत-प्रतिशत उपचारित बीज बोया जाता है। बीज उपचार से न केवल बीज और मृदा जनित बिमारियों से बचाया जा सकता है बल्कि फसल की प्रारंभिक विकास को प्रभावित करने वाले, रस चूसने वाले कीटों से भी बचाया जा सकता है। देश के अधिकतर किसान इस सामान्य प्रक्रिया से अनभिज्ञ है जिनके कारण कम खर्चीले उपाय होने के बावजूद इसका उपयोग नहीं कर पाते  है। बीजोपचार, रोग व कीट प्रबंधन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। किसानों द्वारा इस महत्वपूर्ण कार्य को अपनाने के लिए पूरे देश में प्रचार-प्रसार की आवश्यकता है जिससे किसान कीटनाशकों का खर्च बचाकर तथा फसल उतपादन बढाकर खेती से अधि‍क लाभ पा सके। बीजोपचार की मुख्य विधियाँ 1.  बीज प्रसाधन (Seed dressing) बीज प्रसाधन , बीजोपचार की...

Importance of Seed treatment in Agriculture कृषि क्षेत्र की प्राथमिकता उत्पादकता को बनाये रखने तथा बढ़ाने मे बीज का महत्वपूर्ण स्थान है। उत्पादकता बढ़ाने के लिए उत्तम बीज का होना अनिवार्य है। उत्तम बीजों के चुनाव के बाद उनका उचित बीजोपचार भी जरूरी है क्यों कि बहुत से रोग बीजो से फैलते है। अतः रोग जनको, कीटों एवं असामान्य परिस्थितियों से बीज को बचाने के लिए बीजोपचार एक महत्वपूर्ण उपाय है। बीजोपचार के लाभ अनुसंधान द्वारा पाया गया कि बीजोपचार के लाभ उत्तम पौधों, अच्छी गुणवत्ता, ऊँची पैदावार और रोगों तथा कीट नियंत्रण मे लगी पूंजी पर अच्छी आय के रूप में दिखाई देते है। परंतु आज भी ऐसे किसानों की संख्या बहुत अधिक है, जो अनुपचारित बीज बोते है। इसलिए उपचारित बीजों के लाभों का व्यापार प्रचार तथा प्रसार करना बहुत आवश्यक है। बीजोढ़ रोगों का नियंत्रण:- छोटे दाने की फसलों, सब्जियों व कपास के बीज के अधिकांश बीजोढ़ रोगों के लिए बीज निसंक्रमण व बीज विग्रसन  बहुत प्रभावकारी होता है। मृदोढ़ रोगों का नियंत्रण:- मृदोढ़ कवक, जीवाणु व सूत्रकृमि से बीज व तरूण पौधों को बचाने के लिए बीजों को कवकनाशी रसायन से उपचारित किया जाता है, जिससे बीज जमीन मे सुरक्षित रहते है, क्योंकि बीजोपचार रसायन बीज के चारो और रक्षक लेप के रूप में चढ़ जाता है और बीज की बुवाई ऐसे जीवों...