03 Mar Improved Lentil cultivation
मसूर की उन्नतशील खेती दलहनी वर्ग में मसूर सबसे प्राचीनतम एवं महत्वपूर्ण फसल है। प्रचलित दालों में सर्वाधिक पौष्टिक होने के साथ-साथ इस दाल को खाने से पेट के विकार समाप्त हो जाते है यानि सेहत के लिए फायदेमंद है। मसूर के 100 ग्राम दाने में औसतन 25 ग्राम प्रोटीन, 1.3 ग्राम वसा, 60.8 ग्राम कार्बोहाइड्रेड, 3.2 मिग्रा. रेशा, 38 मिग्रा0, कैल्शियम, 7 मिग्रा0 लोहा, 0.21 मिग्रा, राइबोफ्लोविन, 0.51 मिग्रा0 थाईमिन तथा 4.8 मिग्रा0 नियासिन पाया जाता है अर्थात मानव जीवन के लिए आवश्यक बहुत से खनिज लवण और विटामिन्स से यह परिपूर्ण दाल है। रोगियों के लिए मसूर की दाल अत्यन्त लाभप्रद मानी जाती है क्यांेकि यह अत्यन्त पाचक है। दाल के अलावा मसूर का उपयोग विविध नमकीन और मिठाईयाॅ बनाने में भी किया जाता है। इसका हरा व सूखा चारा जानवरों के लिए स्वादिष्ट व पौष्टिक होता है। दलहनी फसल होने के कारण मसूर की जड़ों में गाॅठे पाई जाती हैं, जिनमें उपस्थित सूक्ष्म जीवाणु वायुमण्डल की स्वतन्त्र नत्रजन का स्थिरीकरण भूमि में करते है जिससे भूमि का उर्वरा शक्ति बढ़ती है। अतः फसल चक्र में इसे शामिल करने से दूसरी फसलों के पोषक तत्वों की भी कुछ प्रतिपूर्ति करती है! इसके अलावा भूमि क्षरण को रोकन के कारण मसूर को आवरण फसल के रूप में भी उगाया जाता है। मसूर की...