08 Oct Scientific Cultivation of fenugreek (Trigonella foenum-graecum L.) seed crop
बीजीय मेथी फसल की वैज्ञानिक विधि से खेती मेथी (ट्राइगोनेला फोइनम-ग्रेइकम एल.), फेबेसी कुल के अन्तर्गत आने वाली एक वर्षीय बहुपयोगी बीजीय मसालो की एक प्रमुख फसल है। भारत में मुख्य रुप से मेथी की खेती राजस्थान , मध्यप्रदेश तथा गुजरात में की जाती है। देश की मेथी का 80 प्रतिशत से अधिक क्षेत्रफल व उत्पादन अकेले राजस्थान राज्य में है, अतः इसे मेथी का कटोरा कहा जाता है| राजस्थान में मेथी उत्पादन मुख्यत: नागौर, उदयपुर, कोटा, बून्दी, झालावाड. आदि जिलो में होता है। मेथी का उपयोग सब्जियों व खाद्य पदार्थो में किया जाता है तथा इसका औषधीय महत्व भी है। इसकी हरी पत्तियों में प्रोटीन, विटामिन सी तथा खनिज लवण आदि पाये जाते हैं। इसका उपयोग भोज्य पदार्थ को सरस एवं सुगंधित बनाने में किया जाता हैं। मसालों के अतिरिक्त इसका उपयोग दवाओं में भी होता हैं। इसके बीजों में मूत्रवर्धक, शक्तिवर्धक, वायुनाशक, पोषक व कामोद्दीपक शक्ति पायी जाती है। एक फलीदार फसल होने के कारण मृदा में पाये जाने वाले राइजोबियम जीवाणु इसके पौधों की जड़ ग्रन्थियों में वातावरण की नत्रजन को स्थिर कर भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाते है। इसके दानों में ‘डायोस्जेनिन‘ नामक स्टेरोइड़ पाया जाता है, जो सेक्स हार्मोन व गर्भ निरोधक दवाओं में प्रयुक्त होता है। अतः इस पदार्थ के कारण मेथी का महत्व कई गुना बढ़ रहा है। मेथी...